एमिटी लाॅ स्कूल नोएडा द्वारा अंर्तराष्ट्रीय व्याख्यान सत्र का आयोजन





नोयडा। (हि. वार्ता )

एमिटी लाॅ स्कूल नोएडा, एमिटी विश्वविद्यालय द्वारा अंर्तराष्ट्रीय व्याख्यान श्रृखंला (एमिटी को विश्व में ले जाना और विश्व को एमिटी में ले आना ) के अंर्तगत छात्रों को विधी एंव समसमायिक विषयों पर जानकारी प्रदान करने के लिए किया जा रहा है। इस व्याख्यान श्रृखंला के अंर्तगत आज ढाका के बंग्लादेश ज्युडिशियरी के जिला एंव सत्र न्यायाधीश श्री मोहम्मद अब्दुल हलीम द्वारा वैकल्पिक विवाद समाधान, मध्यस्थता एंव यूके के इंडिया चार्टर्ड इंस्टीटयूट आॅफ आर्बिट्रेटर के निदेशक एंव अधिवक्ता श्री रतन के सिंह द्वारा एंव आर्बिट्रेशन पर छात्रों को जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर एमिटी लाॅ स्कूल नोएडा के चेयरमैन डा डी के बंद्योपाध्याय ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर एमिटी लाॅ स्कूल नोएडा के एडिशनल डायरेक्टर डा आदित्य तोमर एंव डा शेफाली रायजादा भी उपस्थित थे।

ढाका के बंग्लादेश ज्युडिशियरी के जिला एंव सत्र न्यायाधीश श्री मोहम्मद अब्दुल हलीम ने छात्रों को वैकल्पिक विवाद समाधान एंव मध्यस्थता पर संबोधित करते हुए कहा कि भारत एंव बंग्लादेश में जब कोई भी समस्या होती है तो न्यायालय में केस फाइल करते है और ऐसे कई उदाहरण है जब कई वर्षो बाद केस का फैसला आता है तो जितना समय एंव धन उन्होनें व्यय किया होता है उसके मुकाबले नतीजा शून्य होता है। न्यायाधीश श्री हलीम ने कहा कि वैकल्पिक विवाद समाधान, न्यायालय से बाहर समस्या का निवारण करने की एक प्रक्रिया है जिसमें विवादित दोनो व्यक्ति किसी तीसरे व्यक्ति की सहायता से समस्या का निवारण करते है। उन्होनें कहा कि जिस कार्य में वर्षो का समय लगता है उसे मध्यस्थकर्ता के माध्यम से अधिक से अधिक पांच से छह घंटों में सुलझा लिया जाता है। इस कार्य में दोनो पार्टी विजेता रहती है वही न्यायालय में अगर एक पार्टी के पक्ष में फैसला आ जाता है तो दूसरी पार्टी उच्च न्यायालय में केस फाइल करती है। आज भारत एंव बंग्लादेश में न्यायालय किसी भी केस के निवारण में अधिक समय लगता है ऐसे में शीघ्र समस्या निवारण हेतु वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रिया को अपनाया जा रहा है। उन्होनें छात्रों को सलाह देते हुए कहा कि आप स्थानीय या अंर्तराष्ट्रीय मध्यस्थकर्ता का कार्य कर सकते है। मध्यस्थता एक अनौपचारिक प्रक्रिया है और विवादित व्यक्तियों पर मध्यस्थकर्ता की बात मानने की कोई बाध्यता नही होती। उन्होनें छात्रों को वैकल्पिक विवाद समाधान के क्षेत्र में कैरियर बनाने की सलाह दी।

यूके के इंडिया चार्टर्ड इंस्टीटयूट आॅफ आर्बिट्रेटर के निदेशक एंव अधिवक्ता श्री रतन के सिंह ने आर्बिट्रेशन में कैरियर बनाने के संर्दभ में छात्रों को जानकारी देते हुए कहा कि वैश्विकरण ने कौशल युक्त एंव ज्ञान वर्धक अंर्तराष्ट्रीय अधिवक्ताओं की मांग को बढ़ा दिया है। भारत में सदैव माध्यस्थम पर्यावरण रहा है। आज स्थानीय एंव अंर्तराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने के लिए आर्बिट्रेटर की मांग देश में बढ़ रही है। अगर कोई अधिवक्ता एक बेहतरीन मुकदमेबाज है तो जरूरी नही कि वो अच्छा आर्बिट्रेटर हो सकता है। श्री सिंह ने हमारे विधि संस्थानो में निर्माण कानून की शिक्षा नही दी जाती है जो कि प्रदान किया जाना चाहिए। उन्होनें छात्रों को आर्बिट्रेशन में कैरियर बनाने की सलाह देते हुए कहा कि मूट कोर्ट में हिस्सा लेने से आपके कौशल में निखार आयेगा। आपको न्यायालयों एंव आर्बिट्रेशन सेंटरों में कार्यवाही को देखना चाहिए। अंर्तराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन के लिए चार्टर्ड इंस्टीटयूटशन आॅफ आर्बिट्रे शन से मान्यता प्राप्त करना आवश्यक है। श्री सिंह ने छात्रों को अंर्तराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन के लिए पुस्तकों के संर्दभ मे जानकारी प्रदान की।

एमिटी लाॅ स्कूल नोएडा के चेयरमैन डा डी के बंद्योपाध्याय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में इस प्रतियोगी विश्व में किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए स्वंय को अपडेट रखना आवश्यक है। छात्रों को विश्व पर विधि के क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों एंव नवीनतम की जानकारी प्रदान करने के लिए एमिटी द्वारा इस अंर्तराष्ट्रीय व्याख्यान श्रृखंला का आयोजन किया गया। एमिटी विश्वविद्यालय छात्रों के संपूर्ण विकास हेतु प्रतिबद्ध है इसलिए कक्षा में प्रदान की गई अकादमिक शिक्षा के साथ उन्हें विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करने का मौका प्रदान किया जाता है।

इस अवसर पर छात्रों एंव शिक्षकों ने अतिथियों से कई प्रश्न भी किये जिनके उन्होनें जवाब प्रदान किये।