"लोक भारती" का स्वच्छ 'बड़ा मंगल' अभियान



आस्था के साथ सेवा..

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

लखनऊ : नगर में ज्येष्ठ मास के सभी मंगवार,हनुमानजी की सेवा में समर्पित हैं। ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगल को नगर भर में हजारों भंडारे हनुमान जी की सेवा में बड़े श्रद्धाभाव से आयोजित होते हैं, जिन्हें यहां बड़ा मंगल कहते हैं।

इसके अतिरिक्त लखनऊ के कई स्थानों पर पूरे गर्मी के काल में स्वच्छ एवं शीतल जल की प्याऊ संचालित होती हैं, उनमें परिवर्तन चौक जहाँ शास्त्री नगर दुर्गा मन्दिर समिति द्वारा वर्षों से नियमित प्याऊ संचालित होती है और ज्येष्ठ मास में दैनिक प्याऊ के साथ बहां पर मंगलवार को बड़े मंगल का भंडारा चलता है।

आज से कोई चार वर्ष पूर्व दुर्गा मन्दिर प्याऊ,परिवर्तन चौक के संयोजक तारा चन्द्र जी का लोकभारती को फोन आया कि इस बार पांच जून विश्व पर्यावरण दिवस को हम भंडारा भी आयोजित कर रहे हैं, वह पर्यावरण के अनुकूल हो इसके लिए हम क्या करें।

लोकभारती ने उस दिन पर्यावरण के अनुकूल भंडारे की रूपरेखा बनाई जिसका सफ़लता पूर्वक क्रियान्वयन परिवर्तन चौक के उस भंडारे से प्रारम्भ हुआ। उसके बाद उसी पद्धति के अनुसार बड़े मंगल के कुछ भंडारों में भी प्रारम्भ किया गया जो अगले वर्षों में स्वच्छ बड़े मंगल अभियान में बदल गया।

पर्यावरण के अनुकूल स्वच्छ बड़े मंगल की रूपरेखा :

1. भंडारे की एक कार्य टोली का गठन और उसकी बैठक में स्वच्छ मंगल की परिकल्पना पर चर्चा, सहमति और दायित्व निर्धारण।

2. भंडारे के स्थान पर पूर्ण स्वच्छता के साथ ही जहाँ आवश्यक हो चूने का प्रयोग करना।

3. प्लास्टिक और थर्मोकोल पूर्णतया वर्जित तथा उसके स्थान पर पत्तल, दोना पत्ते के प्रयोग करना।

4. पानी पिलाने के लिए उड़ने वाले गिलासों के स्थान पर प्याऊ की भांति टोटी बाले लौटे से पानी पिलाने की व्यवस्था,उसमे यदि किसी को कठिनाई हो तो छोटे जग द्वारा स्वय हाथ से पानी पीने की व्यवस्था। उसके बाद भी किसी को कठिनाई हो तो कुछ स्वच्छ छोटी बोतल में पानी देना, जिसका पुनः प्रयोग हो।

5. बड़े कूड़े दान की व्यवस्था,जिसके चारो ओर स्वच्छता के साथ चूना अवश्य पड़ा हो।

6. प्रसाद देते समय ही बताने की व्यवस्था कि अपना दोना पत्तल वहां रखे कूडे दान में ही डालना है।

7. भंडारे के बाहर कार्यकर्ताओं की एक टोली जो ध्यान रखे कि कोई दोना इधर उधर फेंकने की भूल न करने पाए,फिर भी यदि कोई भूल कर ही देता है तो वह कार्यकर्ता भूल करने वाले को कुछ न कहते हुए उसके सामने ही तुरन्त दोने को अपने आप उठाकर कूडे दान में डालने की व्यवस्था करना।

8. यदि कुड़ा दान दोपहर तक भर जाने की संभावना हो तो नगर निगम से पहले ही बात करके दो बार कुड़ा उठवाने की व्यवस्था सुनिश्चित करना।

9. कूडे दान में दूर से दोना फेंकने के स्थान पर निकट जाकर डालने का आग्रह रखना।

10. प्रातः भंडारे का प्रारम्भ हनुमानजी की पूजा-अर्चना के साथ उन्हें आमंत्रित किया जाता है, उसी प्रकार सांय काल भंडारा स्थल की पुनः स्वच्छता के बाद पूजा-अर्चना के साथ हनुमान जी को विदा करने की व्यवस्था।

इस प्रकार पर्यावरण के अनुकूल पहला स्वच्छ भंडारा सफ़लता पूर्वक सम्पन्न हुआ,जिसमें बड़े सम्पन्न लोगों के साथ रिक्शा चालक,मजदूर एवं हजारों राहगीरों ने साथ साथ भंडारे का प्रसाद लिया और प्रसन्ना का विषय य़ह रहा की किसी एक भी व्यक्ति ने दोना इधर-उधर नहीं फेंका। य़ह सब उचित व्यवस्था और संकल्प से सम्भव हुआ।

 इससे केवल वह भंडारा ही स्वच्छ नहीं हुआ,प्रसाद लेने वाले हजारों लोगों को पर्यावरण और स्वच्छता के अभ्यास का संदेश भी गया। इसके साथ भंडारा करने वाले बंधुओं को स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के साथ भारतीय संस्कृति के सैद्धांतिक विषयों को भी समझने का सुअवसर मिला।

1. मैं अकेला नहीं टोली के साथ कार्य करने का अभ्यास।

2. भारतीयता संस्कृति में यूज एंड थ्रो नहीं है, रि-यूज एवं रि-सायकिल पर बल दिया गया है।

3. स्थानीय रोजगारों को बढावा देना।

4. अच्छाई हम जानते हैं, पर उस अच्छाई के विपरीत व्यवहार करने का हमारा और हमारे समाज का जो अभ्यास बन गया है उसे आस्था और व्यवस्था द्वारा बदलना है।

5. इस एक बार के अभ्यास से हमारे पारिवारिक कार्यक्रमों में भी स्वच्छता और पर्यावरण का महत्त्व बढ़ सकता है।

6. ऐसे शुभ परिवर्तन जिन परिवारों में प्रारम्भ हुए हैं उन्हें लोकभारती ने मंगल परिवार का नाम दिया है, जिससे लखनऊ में ही हजारों मंगलमय परिवार विकसित हुए हैं, जिनसे उनका परिसर और क्षेत्र मंगलमय बनेगा।

 उसी वर्ष पहले भंडारे की सफ़लता के बाद लोकभारती ने विचार किया कि लखनऊ में हजारों बड़े मंगल के भंडारे होते हैं,उनमें इस अभ्यास को जोड़ा जाए तो बहुत बड़े सामजिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त हो सकता है,जिससे आगे स्वच्छ एवं पर्यावरण के अनुरूप लखनऊ का अभियान लेना सम्भव होगा। 

अतः लोकभारती ने उसी वर्ष एक बड़े मंगल को स्वच्छ एवं पर्यावरण के अनुरूप बनाने का निश्चय किया, जिसकी पहल लोकभारती के कोषाध्यक्ष जितेन्द्र बहादुर सिंह ने अपने निवास स्थल चोपड़ अस्पताल परिसर के सामने बड़े मंगल से की,जिसमें उपरोक्त दी गई सभी व्यवस्थाओं के साथ प्राकृतिक कृषि आधरित समस्त खाद्य सामग्री भंडारे में प्रयोग की गई। जिससे पर्यावरण के अनुरूप स्वच्छ बड़े मंगल का अभियान प्रारम्भ करने के संकल्प को और बल मिला।