गुरुजन सम्मान समिति आगरा ने गुरुजन सम्मान एवं संगीत संध्या का किया आयोजन



गौतम तिवारी,हरिओम माहौर और दीपाली सिंह को मिला कला गुरू सम्मान

 गुरुजन सम्मान समिति आगरा ने इंजी. राजेंद्र प्रसाद शर्मा,हार्ड बम कांड से जुड़े स्वतंत्रता सेनानी वासुदेव गुप्ता एवं आचार्य ताराचंद शास्त्री की पुण्य स्मृति में किया गुरुजन सम्मान एवं संगीत संध्या का हृदय स्पर्शी आयोजन

हिन्दुस्तान वार्ता।ब्यूरो

 आगरा। गुरुजन सम्मान समिति,आगरा द्वारा इंजी. राजेंद्र प्रसाद शर्मा, हार्डी बम कांड से जुड़े स्वतंत्रता सेनानी वासुदेव गुप्ता एवं आचार्य ताराचंद शास्त्री की पुण्य स्मृति में सोमवार शाम विजयनगर कॉलोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में गुरुजन सम्मान एवं संगीत संध्या का आयोजन किया गया।

समारोह-अध्यक्ष और स्वतंत्रता सेनानी वासुदेव गुप्ता के सुपुत्र प्रमोद कुमार अग्रवाल, मुख्य अतिथि इंजी. सुरेंद्र बंसल (कनक सान्वी ज्वेलर्स), विशिष्ट अतिथि टैक्सेशन बार एसोसिएशन आगरा के महासचिव एड.संजीव वशिष्ठ और टीसी चंद्रा एजुकेशन ग्रुप के निदेशक डॉ. करतार चंद्र शास्त्री ने स्मृतिशेष महापुरुषों की तस्वीरों पर माल्यार्पण और समक्ष दीप जलाकर समारोह का शुभारंभ किया। 

वरिष्ठ समाजसेवी व कार्यक्रम के स्वागताध्यक्ष आलोक आर्य,कार्यक्रम संयोजक वरिष्ठ कवि राज बहादुर सिंह 'राज', गुरुजन सम्मान समिति आगरा के अध्यक्ष विजयवीर सिंह, मंत्री सुनील अग्रवाल, ग्या प्रसाद शर्मा और सुशील कुमार दौनेरिया ने अतिथियों का स्वागत किया।

समारोह में मंचस्थ अतिथियों व आयोजकों द्वारा गौतम तिवारी (शास्त्रीय गायन), हरिओम माहौर (तबला आचार्य) और दिपाली सिंह (कथक नृत्य निर्देशिका) को कला गुरु सम्मान प्रदान किया गया।

 इस दौरान हरिदत्त शर्मा की गुरु वंदना, ध्रुव अग्रवाल के बाँसुरी  व दलजीत सिंह के तबला वादन, भावना के भजन, झंकार जैन के कथक शैली में भाव नृत्य, गौरांगी के कथक नृत्य, अहाना व अराध्या के युगल नृत्य और विशाल, प्रिंस, निरुपमा व मोनिका की समूह गान प्रस्तुति ने समारोह को जीवंत कर दिया। 

वरिष्ठ कवि-साहित्यकार राज बहादुर सिंह 'राज' ने संचालन,प्रो.नीलू शर्मा ने नृत्य निर्देशन और आलोक आर्य ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान निखिल अग्रवाल, नरेश चुघ, गुंजन जादौन, श्यामवीर सिंह, बृजराज सिंह, डॉ. रामवीर शर्मा 'रवि', राजीव अग्रवाल, उमाशंकर मिश्रा, संजय दौनेरिया, अजय शर्मा, डॉ. सरोज भार्गव, डॉ. बृज बिहारी लाल बिरजू और रामेंद्र शर्म प्रमुख रूप से मौजूद रहे।