श्री महाकालेश्वर मंदिर में महा रुद्राभिषेक से शिव महापुराण कथा महोत्सव का शुभारंभ

 


11 फीट रुद्राक्ष शिवलिंग के दिव्य दर्शन, कैलाश मानसरोवर झांकी और चंचूला भक्त की कथा से शिवभक्ति में डूबे श्रद्धालु

153 जोड़ों ने किया रुद्राभिषेक, 51 कलश यात्रा, सवा लाख शिवलिंग निर्माण का संकल्प

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। यमुना के तट पर स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर, दयालबाग में शुक्रवार से सावन महोत्सव समिति द्वारा आयोजित श्री शिव महापुराण कथा एवं महा रुद्राभिषेक महोत्सव की शुरुआत महा रुद्राभिषेक से हुई।

 द्वादश ज्योतिर्लिंगों के पावन जल से 153 श्रद्धालु जोड़ों ने भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया। यह भव्य आयोजन पं. हरिचरण, गिरधारी और सुदामा के मार्गदर्शन में 153 विद्वान पंडितों द्वारा मंत्रोच्चार सहित सम्पन्न हुआ। 

रुद्राभिषेक के पश्चात पार्थिव शिवलिंग निर्माण की प्रक्रिया आरंभ हुई, जिसमें सवा लाख शिवलिंग निर्माण का संकल्प लिया गया। इसके पश्चात 51 कलशों की भव्य यात्रा निकाली गई, जिसमें पीले वस्त्रों में सजी महिलाओं ने सिर पर कलश धारण कर जयघोषों के साथ भक्ति का अलौकिक दृश्य प्रस्तुत किया। अंतर्राष्ट्रीय कथा मर्मज्ञ आचार्य मृदुल कांत शास्त्री ने शिव महापुराण कथा का शुभारंभ किया।

आचार्य सुनील कुमार वशिष्ठ ने जानकारी दी कि भगवान शिव की महिमा का विस्तृत वर्णन करते हुए कथा व्यास ने चंचूला भक्त की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि "शिव केवल देव नहीं, भाव हैं; जो अंतर्मन से पुकारे, वह शिव का हो जाता है।"

आयोजन की  व्यवस्थाएं आचार्य सुनील वशिष्ठ, पवन शर्मा, सुनील शर्मा, अरविंद द्विवेदी, प्रदीप द्विवेदी, शुभम, अजय पांडे, रामचरण शर्मा, आकाश शर्मा, महिला मंडल अध्यक्ष सरिता तिवारी, नीलू पांडे, रमेश शुक्ला आदि संभाल रहे हैं।

11 फीट ऊंचा शिवलिंग करा रहा आध्यात्मिक अनुभूति :

समिति सदस्य पवन शर्मा ने बताया कि महोत्सव में सुनील सिंघल के मार्गदर्शन में 11 फीट ऊँचा रुद्राक्ष शिवलिंग, जो सवा लाख रुद्राक्ष, साढ़े कुंतल धातु, 5 किलो रुई और निरंतर जलधारा के संयोजन से बना है। इस शिवलिंग पर 21 फीट लंबा वासुकी नाग भी सुशोभित है। यह शिवलिंग कैलाश मानसरोवर की झांकी में स्थापित किया गया है। एक ओर शिवतत्व की ऊर्जस्वित अभिव्यक्ति स्वरूप रुद्राक्ष शिवलिंग विराजमान है, तो दूसरी ओर मानसरोवर झील का दिव्य दृश्य भक्तों को आध्यात्मिक आनंद से अभिभूत कर रहा है।

भक्त एक ओर शिवलिंग के सम्मुख भाव-विभोर होकर शीश नवाते हैं, तो दूसरी ओर मानसरोवर की निर्मल झीलरूपी झांकी को निहारकर आत्मविस्मृति में डूब जाते हैं। शिवलिंग के दर्शन हेतु लंबी कतारें लगी हैं, और श्रद्धालुओं का सैलाब लगातार बढ़ता जा रहा है।

आगामी कार्यक्रमों की झलक :

महोत्सव में प्रत्येक दिन प्रातः महा रुद्राभिषेक, दोपहर में पार्थिव शिवलिंग निर्माण, तथा सायं शिव महापुराण कथा होगी। 14 जुलाई को शिव बारात का आयोजन प्रस्तावित है, जिसमें शिव तांडव, नृत्यमयी झांकियां,भजन मंडलियां और नासिक बैंड आकर्षण का केंद्र होंगे।