11 दिवसीय गरुडझेप मोहिम (यात्रा) का आगरा किला के सामने शिवाजी प्रतिमा स्थल से शुभारम्भ

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा : 17 अगस्त,16661 भारतीय इतिहास का वो अविस्मरणीय दिन जब छत्रपति शिवाजी महाराज अपनी कार्य कुशलता, युद्ध क्षमता और बुद्धि चातुर्य के दम पर आगरा से औरंगजेब की कैद से मुक्त होकर निकल गए थे। उनके सेनापतियों की 14वीं पीढ़ी के वंशज इसे शिव चातुर्य दिवस के रूप में छह वर्षों से मना रहे हैं। आगरा से महाराष्ट्र के पुणे स्थित राजगढ़ किले तक की 1310 किमी दूरी की 11 दिवसीय गरुडझेप मोहिम (यात्रा) रविवार को आगरा किला के सामने स्थित शिवाजी प्रतिमा स्थल से शुरू हुई। इसमें एक हजार धावक और 100 साइकिल सवार दौड़ते हुए मशाल लेकर चल रहे हैं। सराय मलूकचंद पर यात्रा का स्वागत किया गया। यहां आगरा आते समय शिवाजी एक रात के लिए रुके थे। रास्ते में जय शिवाजी, जय भवानी के साथ ही संभाजी महाराज का जय घोष गूंजता रहा।

आगरा किला के सामने स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अभिषेक शिवाजी के अधीन रहे 101 किलों से लाए गए जल से किया गया। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मंत्री आशीष शैलार ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर गरुडझेप मोहिम को झंडी दिखाई।

आरबीएस कालेज के राव कृष्णपाल सिंह आडिटोरियम में शिव चातुर्य दिवस पर कार्यक्रम का शुभारंभछत्रपति शिवाजी महाराज और भारत माता की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ। समर्थ गुरु रामदास छत्रपति शिवराय संस्थान ने यात्रा का स्वागत प्राचीन मराठी युद्ध कला का हैरतअंगेज प्रदर्शन जामखेड़ के शंभूसूर्य मर्दानी खेल प्रशिक्षण संस्था के सदस्यों ने किया। पुणे के जिला परिषद स्कूल की 55 छात्राओं ने आगरा किला से छत्रपति शिवाजी महाराज के बचकर निकलने की घटना पर नाटिका की मोहक प्रस्तुति दी। 

मुख्य आकर्षण गोवा के शिवगाथा नाट्यकला शक्ति नृत्य संस्थान की 150 महिला कलाकारों की प्रस्तुति रही। उन्होंने तलवारबाजी व लाठी कला का प्रदर्शन किया। महाराष्ट्र से आए विधायक राहुल दादा, बाला साहब गोले, महंत निर्मल गिरि, दिव्य सेवा मिशन ट्रस्ट के आशीष गौतम, विश्व हिंदू परिषद के प्रांत संगठन मंत्री राजेश अग्रवाल, प्रीति उपाध्याय, डा. वात्सल्य उपाध्याय, डा. सिमरन उपाध्याय, करन सिंह धाकड़ आदि मौजूद रहे।

पिछली सरकारों ने हिंदू शासकों की शौर्य गाथा को छिपाया :

 उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि कोठी मीना बाजार में छत्रपति शिवाजी महाराज का संग्रहालय बनेगा। इसके अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने औरंगजेब को उस समय छठी का दूध याद दिला दिया होगा,जब हजारों सैनिकों की आंखों में धूल झोंककर वह अपने पुत्र के साथ आगरा से निकल गए थे। पूर्ववर्ती सरकारों ने हिंदू शासकों व साम्राज्यों की शौर्य गाथा को छिपाकर मुगलों की कहानियों का गुणगान किया। हमें शिवाजी महान,राणा प्रताप महान किताबों में नहीं पढ़ाया गया।

रिपोर्ट - असलम सलीमी