हिन्दुस्तान वार्ता : ✍️ शाश्वत तिवारी
'भइयाजी' एक ऐसा नाम जो सिर्फ मिठाइयों की दुनिया में ही नहीं,बल्कि समाज सेवा की मिसाल के रूप में भी जाना जाता है। वे गूंगे-बधिर की आवाज हैं,अंधों की आंख,श्रवण-अक्षम के कान, भूखों के लिए अन्नपूर्णा सेवक,प्यासों के लिए वरुण के दास,नंगे तन के लिए वस्त्रदाता और बीमारों के लिए औषधि विशेषज्ञ।
“ये तो इक रस्में-जहाँ है,जो अदा होती है,
वरना सूरज की कहां,सालगिरह होती है।”
मित्र के लिए छाया,शत्रु के लिए काल, और गमगीन चेहरे पर मुस्कान बन जाने वाली हंसी,ये भइयाजी के व्यक्तित्व की पहचान है। धैर्य,संतुलन और सकारात्मकता उनकी वाणी में वैसे ही बहती है,जैसे गुरु चेतना की विचारधारा की अविरल धारा।
एक सच्चे गृहस्थ संत की पहचान यही है,कि वह अपने हित से पहले अंतिम जनों के हित को प्राथमिकता दे। भइयाजी तन,मन,धन और आस्था_all in_के साथ निःस्वार्थ मदद करते हैं।
महान पुण्यात्मा,समाजसेवी,विप्र कुलभूषण,परशुराम वंशज,श्रेष्ठ उद्यमी, माँ काली के अनन्य भक्त, वीर हनुमान के सच्चे सेवक और मानवता के हितैषी भइयाजी को देखकर लगता है,कि जैसे वैदिक काल का कोई ब्राह्मण इस युग में अवतरित हुआ हो।
कोलकाता,कानपुर,मुंबई,नईदिल्ली, हैदराबाद और बंगलुरु में तिवारी ब्रदर्स की मिठाइयों की श्रृंखला आज भी अपने गुणवत्ता पूर्ण स्वाद और परंपरा को चौथी पीढ़ी तक संजोए हुए है।
मंगलवार 12 अगस्त को,सामाजिक समरसता के देवदूत भैयाजी ने अपने जीवन के 79 वर्ष पूरे किए। यह सिर्फ उनका जन्म दिन नहीं,बल्कि समाज और मानवता के लिए उनकी निरंतर सेवा का उत्सव है।

