सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का संकल्प,“सनातन रक्षा ट्रस्ट” का दीपावली मिलन समारोह सम्पन्न

सनातन रक्षा ट्रस्ट(रजि.) के दीपावली मिलन में सनातन धर्म की गूंज से माहौल हुआ सनातनी

सनातन धर्म की रक्षा हेतु लोगों को संगठित करने के लिए बने 23 मिलन,100 मिलन गठित करने का है लक्ष्य 

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। आत्मा की अजस्ता और अमरता को ध्यान में रखते हुए तथा समाज की व्यवहारिकता को स्वीकारते हुए,अब समय है कि सनातनी बंधु एक सूत्र में बंधें। यही सनातन रक्षा ट्रस्ट का ध्येय और दिशा है। इसी विचार पर संकल्पबद्ध होते हुए शाहगंज स्थित सनातन रक्षा ट्रस्ट (रजि.) के कार्यालय पर स्नेह दीपावली मिलन समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और मंगलाचरण के साथ हुआ। मंत्रोच्चारण और वैदिक ध्वनियों के बीच प्रज्वलित हुए दीप ने आयोजन को पवित्रता और एकता का संदेश दिया। भारत माता और प्रभु श्री राम के चित्र पर माल्यार्पण डॉ हरिशंकर, भवेंद्र,डॉ अनुराग,रविंद्र द्वारा किया गया। 

अतिथियों का स्वागत रामसिया विकास, मनोज सबनानी, मदनलाल, अनुपम ने किया। कार्यक्रम में सनातन रोजगार केंद्र के कारीगर भी मिलन में उपस्थित रहे। ओजस्वी कवि मोहित सक्सेना ने अपने कविता पाठ से पूरे माहौल राष्ट्रप्रेम से भर दिया। उन्होंने कविता के माध्यम से सनातनी भारत की नवीन  रचना को सभी के समक्ष रखा। डॉ अनुराग द्वारा सनातनी रक्षा मिलन के प्रमुखों का परिचय और सनातन रोजगार केंद्र के  विषय को  सभी के समक्ष रखा गया। सतीश चंद्र गुप्ता ने सनातन मिलन से समाज को जोड़े इस विषय पर प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता भवेंद्र शर्मा ने कहा की गुरुकुल आज की आवश्यकता है। वहां से बच्चों के व्यक्तित्व का निर्माण कार्य होता है। आज प्रत्येक सनातनी को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार उपलब्ध कराने की आवश्यकता है जिसके लिए सनातन रक्षा कार्य कर रहा है। 

समारोह को संबोधित करते हुए डॉ हरिशंकर ने कहा कि विगत कुछ वर्षों से देश के सामाजिक और राजनीतिक परिवेश में आए परिवर्तनों ने सनातन समाज में एक नई चेतना और आत्मविश्वास का संचार किया है। किंतु इसी के साथ एक गहरी आत्ममुग्धता भी पनपती जा रही है, जो समाज को अपनी वास्तविकता से दूर कर रही है। 

 डॉ अनुराग ने कहा कि आज का समय आत्मविस्मृति का नहीं, बल्कि आत्मजागरण का है। हमारे शास्त्र स्पष्ट रूप से कहते हैं कि जिस राष्ट्र या समाज के लोग भोगी, विलासी, आलसी या कायर बन जाते हैं, वह समाज धीरे-धीरे पतन की ओर अग्रसर हो जाता है। 

रविंद्र ने कहा कि यदि हम अपनी संस्कृति को जीवित रखना चाहते हैं तो हमें अपने इतिहास, परंपराओं और मूल्यों को पुनः स्मरण कर उन्हें व्यवहार में लाना होगा।

राम सिया विकास ने संस्था के गठन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्नेह मिलन के अंतर्गत सनातन लोगों को जोड़ने का कार्य किया जा रहा है, इसके लिए 23 मिलन बन चुके हैं। लक्ष्य 100 मिलन बनाने का है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज कुम्भ 2025 में सनातन समाज ने जिस चेतना का परिचय दिया, वही ऊर्जा अब एक संगठित स्वरूप में “सनातन रक्षा ट्रस्ट” के माध्यम से पूरे देश में फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का उद्देश्य केवल धार्मिक उत्थान नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाना है।

आज समाज में अनेक ऐसे वर्ग जैसे लोहार, बढ़ई, नाई, पुरोहित, दर्जी, कुम्भकार, मिस्त्री आदि  हैं जो परंपरागत रूप से समाज की नींव हैं, परंतु उन्हें हीन दृष्टि से देखा जाता है। सनातन रक्षा ट्रस्ट इन सभी को आधुनिक परिवेश और रोजगार के अवसर प्रदान कर सम्मान पूर्वक मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि सनातनी समाज के बंधुओं के लिए नियमित मिलन केंद्र स्थापित करना,जहां वे परस्पर विचार-विनिमय कर सकें। समाज के जरूरतमंदों को विधिक,चिकित्सकीय और रोजगार से संबंधित परामर्श व सहयोग प्रदान करना। सामाजिक एवं पारिवारिक सुरक्षा में हरसंभव सहायता देना। सनातनी समाज में हीनता की भावना को समाप्त कर आपसी एकता और गर्व का संचार करना और “एक भारत, जागृत सनातन” का लिया संकल्प जैसे मुख्य बिंदु संस्था के प्रमुख उद्देश्य हैं। 

विचार मंथन के बाद सनातन जागरूकता यात्रा में भगवान के स्वरूपों को धारण करने वाले बच्चों को स्मृति चिन्ह देकर देकर सम्मानित किया गया। श्याम तिवारी द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। इस अवसर पर हरिकांत, डॉ एमसी शर्मा, सचिन, शैलेंद्र, प्रदीप, अमित कपूर, प्रमोद आदि ने व्यवस्था संभाली। 

सनातन रक्षा ट्रस्ट(रजि.) के सभी मिलन के प्रमुख साकेत, जनार्दन, विवेक गोयल, राहुल शर्मा, अंकुर जैन, अनुपम शर्मा, सुनील टंडन, विनोद सारस्वत, दिनेश गोयल, संजय दीक्षित, मुकेश शर्मा, सुमीत जी, मनोज सबनानी आदि उपस्थित रहे ।