हिन्दुस्तान वार्ता। राजीव सक्सेना
आगरा : यमुना नदी के तटीय तीर्थ बटेश्वर घाम पर गणेश उत्सव के बाद प्रतिमा विसर्जन करने आये फीरोजाबाद के चार युवकों को नदी में डूबने से बचाने वाली 'मोहिनी'अब काफी चर्चित हो चुकी है। कुशल तैराक के रूप में उसने अपने कारनामे से न केवल महिला सशक्तिकरण अभियन को जीवंतत: प्रदान करने में योगदान दिया,अपितु सामाजिक सरोकारों के प्रति एक आदर्श युवा नागरिक की भूमिका का निर्वाहन किया।
सोमवार को ‘उटंगन नदी केन्द्रित जल संसाधनों के प्रति जागरूकता’ का प्रस्तावित सम्मेलन के संबध में स्थानीय लोगों से चर्चा करने बटेश्वर धाम जाना हुआ। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ भाड़ के बीच यमुना नदी के रानी घाट पर बरबस ही ‘चार युवकों की जान बचाने ‘ का सहासिक कारनामा करने वाली लड़की के संबध में साथी स्थानीय पत्रकारों से चर्चा चली। यमुना का फोटो शूट कर घाट पर पहुंचा ही था कि पत्रकार के साथ मोहिनी आ चुकी थी। मुस्करहाट के साथ नमस्कार,कर पूछ बैठा कि अब तो तुम बहुत मशहूर हो चुकी हो। मोहिनी संकुचाई बोली कि जी हाँ अब काफी लोग जानने लगे हैं। फिर साथ ही शालीनता के साथ प्रत्युत्तर पूंछ डाला कि आपको हमारा बटेश्वर कैसा लगा अब तो यहां बहुत सारे कार्य हो रहे हैं। लगा कि मेरी मुलाकात एक बहादुर तैराक से ही नहीं ,अपितु बटेश्वर तीर्थ के विकास को योगी सरकार के द्वारा करवाये जाने वाले कार्यों की ब्रांड एम्बेस्डर से हो रही है।
मोहिनी जिसने बचाई डूबने वालों की जानें : मोहिनी विशुद्ध ग्रामीण कस्बे की धनी 18 वर्षीय तरूणी है। बटेश्वर धाम उसे पसंद है,जब भी मौका मिलता है यमुना में तैराकी का कोई अवसर नहीं छोड़ती है। जीवन यापन के लिये पारवारिक आमदनी में वह तीर्थ धाम पर आने वालों के लिये पूजा सामग्री की दुकान लगाती है। वह गणेश पूजा के बाद प्रतिमा विसर्जन को पहुंचे फिरोजाबाद से आये युवकों को डूबने से बचाने के घटना क्रम को याद करते हुए कहती है कि प्रतिमा विसर्जन के उपरांत चारों युवक स्नान करने उतरे थे कि अचानक वे घाट के किनारे से नदी के तेज बहाव के कारण बीच धार में जा पहुंचे।उन्होंने बचाने के लिए चीखना शुरू किया,वहीं घाट पर मौजूद स्नार्थियों ने भी उन्हे बचाने के लिये शोरगुल करना शुरू कर दिया।
जैसे ही शोररगुल उसने सुना,हरकत में आ गयी,दूकान को छोड़ कर घाट पर पहुंची और आव देखा ना ताव सीधे यमुना में छलांग लगा दी। तेज बहाव के कारण उसे शुरू में लगा कि तैरते रहकर युवको तक पहुंचना आसान नहीं है नदी तेज बह रही थी ,पानी गहरा था। उसने अपनी जान की परवाह भी नहीं की और एक-एक कर सभी चारों युवकों की जान बचा ली। यमुना तट पर एकत्रित भीड़ मोहिनी के इस साहसी कारनामें की साक्षी थी,सभी ने प्रशंसा की।
मोहिनी गोस्वामी को मंदिर प्रबंधक अजय भदौरिया,नत्थीलाल गोस्वामी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भतीजे राकेश वाजपेयी ने पुरस्कृत कर उसका हौसला बढ़ाया,इनाम स्वरूप ₹200 दिए। घटना को प्रशासन के द्वारा संज्ञान में लिया जा चुका है,कई अधिकारी भी उससे मिले हैं। संभवत: किसी उपयुक्त सम्मान के लिये पुरुस्कृत भी करें। हाँ अब तक यह जरूर है कि उसका नाम उस तैराक लिस्ट मे जरूर शामिल किया जा चुका है,जो डूबने आदि की घटना होने पर प्रशासन की मदद करने वाले सक्षम तैराकों की है।
बटेश्वर ज्यादा भाता है :
मोहिनी गोस्वामी है.उसके पिता मथुरा के गौस्वामी हैं। बटेश्वर उसकी ननिहाल है,बचपन से ही उसे बटेश्वर में रहना अधिक भाता है। पूजा की सामिग्री की दूकान पर बैठने के साथ ही स्कूल में पढ़ना भी जारी रखे हुए है। पढ़ लिखकर वह कुछ बडा़ करना उसका लक्ष्य है।बाबा बटेश्वर नाथ जी पर उसे विश्वास रहा है,जो कुछ भी परमार्थ का कार्य करवाया वह सब बाबा की कृपा से ही कर सकी। यमुना नदी में तैरना उसने स्वयं अपने अनुभवों से सीखा,नदी में स्नान करने पहुंचना गांव परिवार की महिलाओं के साथ बचपन से ही रहा।
यमुना नदी में डूबने से बचे फिरोजाबाद के आकाश और हिमालय समेत चारों युवक मौके से भाग गए। नदी में डूबने वाले चारों युवकों की जान बचाने वाले प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि लड़की होते हुए मोहिनी ने जो साहस और हौसले का परिचय दिया,वह काबिले तारीफ है। मौत के मुंह से चार लड़कों की जान बचाकर आई है।
कैसे डूबे युवक यमुना में :
फिरोजाबाद से कई श्रद्धालु गणेश विसर्जन के लिए बटेश्वर घाट पर पहुंचे थे। डूबने से बचाये गये युवक इन्हीं के साथ बटेश्वर आये थे। यहां पर आकाश (19साल), हिमालय (17 साल) और उनके दो दोस्त प्रतिमा लेकर जैसे ही यमुना में उतर गए। घाट पर भीड़ अधिक नदी के तेज बहाव के कारण,अचानक चारों का संतुलन बिगड़ गया और वो यमुना में डूबने लगे। फिर तो मोहिनी का एक्शन शुरू हो ही गया।
छाया - असलम सलीमी

