'किस्सा कहानी' कार्यक्रम में कथाकार महेश कटारे द्वारा अपनी कहानी 'पार' का वाचन,श्रोताओं ने की समीक्षा
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। मेरी कहानी आज से 30 या 35 वर्ष पूर्व के चंबल के यथार्थ के बहुत करीब है,तत्कालीन परिस्थितियों ने कुछ ऐसे चरित्र गढ़ने का काम किया जिनका कमला जैसा दस्यु पात्र नुमाइंदगी करता है। लेखिका सिमोन की किताब द सेकेंड सेक्स का हिंदी अनुवाद प्रभा खेतान ने किया है, जिसमें वह एक वाक्य है जो कहानी की पात्र को समझने में मदद करता है, उस वाक्य में कहा है कि स्त्री पैदा नहीं होती उसको स्त्री बनाया जाता है। कहानी की मुख्य पात्र कमला परिस्थितियों के चलते क्रूर थी, मगर स्त्री सुलभ कोमलता उसमें विद्यमान थी, जो जुगनू देखकर जागी।
यह विचार कथाकार महेश कटारे ने रविवार शाम अपनी कहानी पार के प्रति श्रोताओं की जिज्ञासाओं, सवालों और टिप्पणियों के जवाब में व्यक्त किए। श्री कटारे ने बताया मैं बहमई गया था, मैंने शेखर कपूर की फिल्म बैंडिट क्वीन के नग्न अवस्था में कुंए से पानी लाने के दृश्य की हकीकत जानी तो वहां की एक बुजुर्ग महिला ने बताया फूलन के साथ वाकई बहुत अमानवीयता हुई दोषियों को ठीक ही मारा फूलन ने लेकिन अगर उनके सामने नग्न अवस्था में पानी भरने के लिए भेजने की घटना हुई होती तो हम उन लोगों को खुद गोली मार देते। फिल्म में जो यह सीन दिखाया है उसका हकीकत से वास्ता नहीं फिल्म का यह अतिरंजित हिस्सा है।
रंगलीला,शीरोज हैंगआउट और प्रेम कुमारी शर्मा स्मृति समारोह समिति द्वारा संयुक्त रूप से नागरी प्रचारिणी सभा आगरा के पुस्तकालय भवन में आयोजित इस समारोह में उन्होंने अपनी कहानी पार का प्रभावशाली वाचन भी किया। इतिहास लेखक राज गोपाल सिंह वर्मा ने कहा कहानी सामाजिक अध्ययन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। डॉ.खुशी राम शर्मा ने कहा कहानी 'पार' साहित्यकार रेणु और नागार्जुन की कथाओं की तरह यथा स्थितियों पर है। प्रो.आभा चतुर्वेदी, ब्रिगेडियर विनोद दत्ता, दिलीप रघुवंशी, जाकिर सरदार, सीमांत साहू, डॉ.उमेश दुबे ने टिप्पणी की।
कथाकार डॉ.राकेश कुमार सिंह ने टिप्पणी की कि कहानी की भाषा में कुछ शब्द ऐसे हैं, जिनको घर-परिवार के लोगों के साथ सुनने में थोड़ा अटपटा लगेगा। शक्ति प्रकाश ने कहा कि कहानी में निरंतरता नहीं मिली। कमला दस्यु बनी लेकिन उसकी क्या वजह रही यह उसमें नहीं दिखा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कथादेश के संपादक हरिनारायण ने की। मुख्य अतिथि लेखक और कथाकार अरुण डंग थे। इस समारोह की शुरुआत में स्वागत भाषण रंगलीला के निर्देशक अनिल शुक्ला ने दिया। कार्यक्रम के संयोजक शक्ति प्रकाश थे। मंच संचालन डॉ.विजय शर्मा ने किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन अर्जुन सबेदिया ने किया। डॉ.महेश धाकड़, शलभ भारती, रमेश पंडित, सुनीता चौहान, मालती कुशवाह, हिमानी चतुर्वेदी, पूनम भार्गव, उज्मा वाकर, डॉ.राजीव शर्मा, तुषार खन्ना, मनोज शर्मा, भारत सिंह, पीएस कुशवाह, नीरज जैन, सुनयन शर्मा मौजूद थे।
रिपोर्ट - असलम सलीमी



