आगरा मंडल व्यापार संगठन ने जीएसटी एडिशनल कमिश्नर ग्रेड 1 को सौंपा ज्ञापन



हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा : विगत आगरा मंडल व्यापार संगठन द्वारा वित्त मंत्री भारत सरकार को एक ज्ञापन द्वारा एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 के माध्यम से दिया। उक्त ज्ञापन में संगठन ने कहा है कि आम उपभोक्ता एवं आम जनता के हित के लिए जो कदम जीएसटी के दो स्लैब काम करने आपके विभाग पर उठाए गए हैं उससे आम उपभोक्ताओं को सस्ती दर पर उपयोगी वस्तुएं मिल पाएंगी,जिससे सरकार का विजन साकार होगा, परंतु कुछ समस्याएं आम व्यापारियों को इससे उत्पन्न हुई है जैसे कि जो वस्तुएं अब तक 28, 18 व 12% के स्लेव में आ रही थी उसको घटकर 18 व 5 की श्रेणी में लाया गया है आम व्यापारियों पर जो उच्च दर की जीएसटी अपने स्टॉक में अर्जित हो गई है उसको वह नीचे के स्लेव में बिक्री कर रहे हैं उनको इस बीच के स्लेव के अंतराल में जो जीएसटी उनके खातों में जमा है उसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं विभाग का कहना है कि इसको आप मासिक रिटर्न में ही समायोजित कर सकते हैं जबकि यह रकम इतनी बड़ी है कि वह सालों तक समायोजित नहीं हो सकती क्योंकि हर व्यापारी को अपने पास एक बफर स्टॉक रखना ही पड़ता है।अतः 28% की वस्तुओं का 18% बेचने पर 10% या उससे अधिक का फर्क कैसे सामायोजित होगा जबकि व्यापारी को स्टॉक/बिक्री के लिए हर माह नई खरीद करनी ही पड़ती है।

संगठन ने वित्त मंत्री से मांग की है कि उक्त समस्या को ध्यान में रखते हुए इनपुट क्रेडिट को रिफंड के रूप में दिलाने की कृपा करें,जिससे कि आम व्यापारियों को उनकी पूंजी का लाभ उनके व्यापार में मिल सके।

इसके अलावा संगठन ने रोजमर्रा के व्यवहार में आ रही निम्न समस्याओं के लिए भी एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन को अवगत कराया -

1   सीजीएसटी अधिनियम की धारा 74 के तहत की गई कार्रवाई के मामलों में ब्याज और जुर्माना माफी योजना के संदर्भ में - वर्तमान समय में व्यापारियों और छोटे एवं मध्यम उद्योगों पर कोविद महामारी आर्थिक मंदी और विभिन्न बिहारी परिस्थितियों के कारण अत्यधिक दबाव पड़ा है इसी संदर्भ में पुरानी देनदारी के साथ जुड़ा ब्याज उनकी वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त भोज बन गया है इस प्रकार विचार करते हुए ब्याज माफी का अचित प्रस्तुत किया जा रहा है जिससे व्यापारी पर अतिरिक्त भार से रात मिल सके।

2  अधिकारियों द्वारा मांग आदेशों की वसूली के संबंध में इस संबंध में - विभागीय अधिकारी बिना विधिक नोटिस या उचित प्रक्रिया के विभिन्न व्यापारिक संस्था व प्रतिष्ठानों पर बार-बार दबाव डालकर वसूली करवाई और कुड़की आदेश लागू कर रहे हैं कई मामलों में व्यापारियों को संबंधित आदेशों की जानकारी नहीं मिली और कुछ के जीएसटी पंजीकरण पहले ही रद्द हो चुके हैं। इस प्रकार की कार्रवाई प्रक्रियात्मक दृष्टि पूर्ण होने के साथ-साथ प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के भी विरोध है ऐसे दबाव एवं अवैध कार्यों से व्यापारियों में भय और असुरक्षा का माहौल बन रहा है और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं अतः ऐसी अवैध वसूली और कुड़की कार्यवाहियों पर तुरंत रोक लगाई जाए और भविष्य में केवल विधिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाए।

3   वसूली के नाम पर बिना उचित कारण बताएं व्यापारियों के बैंक खाते फ्रीज किया जा रहे हैं यह न्याय संगत नहीं है इससे व्यापारियों पर आवश्यक दबाव बनता हैं।

4.वाणिज्य कर समयावधि की मांग वसूली ऐसी बादो में की जा रही है जिनकी पत्रावली ही उपलब्ध नहीं है ऐसे वाद/मांग पत्रों में या तो पत्रावली उपलब्ध कराई जाए या मांग पत्र समाप्त किया जाए क्योंकि पूर्व में भी ऐसा देखा गया है कि एक पक्षीय वाद का मांग पर जारी होने के बाद व्यापारी द्वारा बाद का निस्तारण कर लिया गया है किंतु पत्रावली के आधार पर कंप्यूटर में मांग समाप्त नहीं की गई है और कंप्यूटर की सूची के आधार पर ही वसूली की कार्रवाई की जा रही है जो कि अनुचित है ऐसी दुविधा की स्थिति में प्रयुक्त निर्देश देने की अपेक्षा है।

5.वैट समय अवधि में रिफंड विभिन्न खंडो में लंबित है उनका निस्तारण भी तात्कालिक प्रभाव से किया जाए।

संगठन के प्रतिनिधि मंडल ने एडिशनल कमिश्नर  से मांग की,कि उक्त बिन्दुओ का निस्तारण किया जाए तथा व्यापारियों को राहत प्रदान किया जाए.एडिशनल कमिश्नर की रेट बढ़ाने में आश्वासन दिया कि उच्च स्तर के बिंदुओं को शीघ्र ही हाई कमेटी को भेजा जाएगा तथा जो वैट से संबंधित समस्या व्यापारियों को आ रही है उनका शीघ्र निस्तारण विभाग के स्तर से कराया जाएगा और अगर किसी भी सदस्य को वैट में कोई भी समस्या आ रही है तो वह आगरा मंडल व्यापार संगठन के कार्यवाहक अध्यक्ष से संपर्क कर सकता है।

प्रतिनिधि मंडल में संगठन के सर्वश्री चरणजीत थापर, गिरीश चंद्र गोयल, अरविंद बंसल, प्रदीप लूथरा, रवि सिंघल, जितेंद्र गौतम आदि थे।