अंतरराष्ट्रीय हिंदी दिवस पर "हिंदी का वैश्विक परिदृश्य" चर्चा - परिचर्चा संगोष्ठी संपन्न



हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा : अंतर्राष्ट्रीय हिंदी दिवस पर साहित्य संगीत संगम के तत्वावधान में 'हिंदी का वैश्विक  परिदृश्य'विषय पर चर्चा -परिचर्चा संगोष्ठी ग्रीन हाउस भोगीपुरा आगरा पर संपन्न हुई।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए श्रीमती नीलम शर्मा ने कहा कि हिंदी ही वह माध्यम है जो पुनः भारत को विश्व गुरु बना सकती है। आयोजन का शुभारंभ कुमारी पूजा तोमर की सरस्वती वंदना से हुआ। इस अवसर पर हरीश भदोरिया ने कहा कि हिंदी ने पिछले एक सौ वर्षों में जिस तेजी से ऊंचाइयों को छुआ है, उससे यह विश्वास होता है कि हिंदी शीघ्र ही विश्व भाषा की गद्दी पर आसीन होगी। उन्होंने कहा कि आज विदेश में 770 संस्थान प्रचार प्रसार हेतु कार्यरत हैं, जिनमें 176 विश्वविद्यालय हैं,जहां हिंदी का पठन- पाठन पूरी रुचि से किया जा रहा है। निधि शर्मा ने हिंदी की सामर्थ्य को व्यक्त करते हुए कहा कि आज बाजारवाद के युग में हिंदी सबसे सशक्त अस्त्र है जिसका उपयोग पूरे विश्व की कंपनियां कर रही हैं।

 सुशील सरित ने कहा कि आज हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए भारत सहित विश्व में जो संस्थाएं काम कर रही हैं उन में उत्तर प्रदेश संस्थान ,केंद्रीय हिंदी संस्थान , साहित्य मंडल नाथद्वारा सहित दक्षिणी अफ्रीका यूके और कनाडा आदि की संस्थाएं शामिल हैं।

चंद्रशेखर शर्मा ने हिंदी के वैश्विक रूप को व्यक्त करते हुए कहा 2006 में विश्व हिंदी दिवस का शुभारंभ हुआ था लेकिन इसका प्रारम्भ काफी पहले नागपुर में हुए पहले हिंदी सम्मेलन में हो चुका था जो 10 जनवरी 1975 को हुआ था और मॉरीशस में स्थित विश्व हिंदी सचिवालय इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।

हरीश अग्रवाल ढ़पोर शंख ने बताया कि हिंदुस्तान में तो हिंदी के असंख्य पत्र- पत्रिकाएं आज भी अपना वर्चस्व बनाए हुए हैं, लेकिन अमेरिका, यू के और कनाडा से भी 25 से अधिक हिंदी पत्रिकाएं प्रकाशित हो रही हैं जिनमें पुरवाई का विशेष महत्व है। न्यूयॉर्क से प्रकाशित'भारत दर्शन'और कनाडा से प्रकाशित 'सरस्वती' भी बहुत ही चाव से पूरे विश्व में पढ़ी जाती हैं ।

यह हिंदी हिंदुस्तान की,आज हमारी है कल होगी भाषा में विश्वविधान की..। पंक्तियों के माध्यम से सुशील सरित ने हिंदी के उज्ज्वल भविष्य को चित्रित किया। सुधीर शर्मा, डॉक्टर यश शर्मा , डॉ नीरज स्वरूप, नीलेन्द्र श्रीवास्तव ,,अक्षांश आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। संचालन सुशील सरित ने किया और सुधीर शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

रिपोर्ट : असलम सलीमी