जल संस्थान एसिसमेंट के समय से ही जलमूल्य और जलकर ले सकता है,जल संस्थान के एरियर बिलों के जारी करने पर पार्षदों ने जताया कड़ा आक्रोश



हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा : आगरा नगर निगम के पार्षद जल संस्थान के द्वारा एरियर निकालने के नाम पर भेजे जा रहे बिलों को लेकर बेहद आक्रोशित हैं,उनका कहना है कि भवन स्वामी एसिसमेंट के हिसाब से डिमांड और जल संस्थान की सेवाओं के लिये भुगतान करते रहे हैं तो उन पर जल संस्थान के द्वारा एरियर बिल भेजना ज्यादती है। उसे तत्काल बन्द किया जाना चाहिये।

29 जनवरी 2025 को हुए नगर निगम सदन के 13 वें अधिवेशन में पार्षदों ने सदन में कहा कि था कि जल संस्थान समय से डिमांड नोटिस नहीं भेजे जाने पर कहा कि जब से जलकल विभाग को नगर निगम की ए०आर०बी० प्राप्त हुई है। उसके बाद से ही जलकल विभाग बड़ा हुआ टैक्स ले सकता है।

पार्षद रवि विहारी माथुर ने जल संस्थान के एरियर बिलों को निकालने की प्रक्रिया को तत्काल बन्द करने की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि इसमें उपभोक्ता की कोई गलती नहीं है।

एरियर बिलों के संबध में कमेटी के गठन को औचित्य हीन बताते हुए कहा कि यह नीतिगत विषय है,नगर निगम सदन इस संबध में फैसला लेने में सक्षम है। उपयुक्त तो यही होगा कि इसके संबंध में जी०एम० जलकल स्वयं जवाब दें। उन्होने सदन के द्वारा एरियर बिल के जारी होने के संबध में कहा कि सदन का निर्णय है कि जब से जलकल विभाग को नगर निगम की ए०आर०बी० प्राप्त हुई है.उसके बाद से जलकल विभाग बड़ा हुआ टैक्स ले सकता है। जो उपभोक्ता टैक्स जमा कर चुके हैं,उनसे बढ़ा हुआ टैक्स न लिया जाय।

पार्षद प्रकाश केशवानी ने कहा कि यह समझ से परे हे कि जल संस्थान के बिल डिफरेन्स निकालकर क्यों भेजे जा रहे है, यह महानगर की जनता का उत्पीडन है। उन्होंने कहा कि जब किसी उपभोक्ता का हाउस टैक्स बढता है,उसे जलसंस्थान संज्ञान में लेकर निर्धारण करना चाहिये ,न कि कुछ वर्षों बाद उसके एसिसमेंट को आधार बनाकर आपको अमुक राशि का बिल जमा करना है आदि निर्देशों के साथ अतिरिक्त धन राशि के बिल भेजे जायें,उन्होंने कहा कि यह प्रत्यक्ष रूप से उपभेक्ता का उत्पीडन है।

श्री केशवानी ने कहा कि एसिसमेंट के आधार पर उपभोक्ता को जलमूल्य, जलकर और सीवर कर जमा करने होते हैं,जब वह ग्रहकर एसिसमेंट के साथ जमा करता है। जल संस्थान से संबधित सेवाओं के लिये डिमांड उसी साल से शुरू करनी चाहिये,किन्तु कई कई साल बार बढी डिमांड के बिल भेजना ज्यादती है।उपभक्ताओं की इसमें कोई कमी नहीं है। 

श्री केशवानी ने कहा कि जो भवन स्वामी समय से हाऊस टैक्स और जलसंस्थान से संबधित सेवाओं के टैक्स या डिमांड जमा कर रहा है, फिर एरियर की डिमांड करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं से की जा रही एरियर डिमांड को तत्काल समाप्त किया जाये। उन्होंने कहा उपयुक्त होगा कि पिछला कोई कर नहीं लिया जाये,जो पुराना कर जमा है.वही माना जाये। उन्होने कहा कि इसको तत्काल लागू किया जाय। इसके संबंध में कमेटी को कोई आवश्यकता नहीं है.नगर निगम सदन इसके बारे में निर्णय लेने हेतु स्वतंत्र है।

श्रीमती हेमलता चौहान,पार्षद ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2023 में चुनाव के समय जलकल विभाग से एन०ओ०सी० ली। जलकल विभाग ने दुबारा 17 हजार का बिल बनाकर भेज दिया गया था। जिसपर मेरी आपत्ति थी ,लेकिन अब तक इस मामले में सुनवायी नहीं हुई।

 शरद चौहान,पार्षद द्वारा कहा गया कि यह विषय बहुत गंभीर है। चूंकि यह बिल लगातार बाटे जा रहे है। इसमें उपभोक्ता की कोई गलती नहीं है। इनकी जाँच होने तक बिल न भेजे जायें।

एन०पी० सिंह,जोनल अधिकारी ताजगंज द्वारा अवगत कराया गया कि मा० सदन गृहकर के सबंध में जो निर्णय होगा, उसका अनुपालन किया जाएगा। उल्लेखनिय है कि 2014 में स्वकर प्रणाली लागू की गयी थी। सैल्फ असेसमेंट प्रणाली के तहत गृहस्वामी के द्वारा अपने भवनों का असेसमेंट करवाया जाने लगा। इसके अलावा नगर निगम के इंजीनियरिंग और राजस्व विभाग के द्वारा भी नये निर्माणों आदि का अनवरत निरीक्षण किया जाता है। कामर्शियल भवनों के निर्माण बिना आगरा विकास प्राधिकरण की स्वीकृत के संभव नहीं है।

रिपोर्ट : असलम सलीमी