24 अप्रैल 2018 को जारी हुआ था,शासनादेश : रवि माथुर पार्षद
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा : नगर निगम के वरिष्ठ पार्षद रवि विहारी माथुर ने कहा कि नगर निगम के द्वारा 46 करोड के कार्यों को टेंडर वाक्स के माध्यम से निविदा आमंत्रित करवाया जाना नगर निगम अधिनियम और शासनदादेश के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि अगर टेंडर नोटिस बोर्ड और न्यूज पेपरों के विज्ञापन के माध्यम से प्रकाशित कर आमंत्रित कर आवंटित किये गये हैं,तो यह पूरी तरह से विधि सम्मत है।
श्री माथुर जो कि पीपल मंडी स्थित अपने निवास पर मीडिया से वार्ता कर रहे थे, उन्होंने कहा कि टंडर उठाने की प्रक्रिया में टेंडर बाक्स का उपयोग किये जाने पर आपत्ति करने का कोई औचित्य नहीं है,जो भी टेंडर को ई टेंडर के माध्यम से ही उठाये जाने को लेकर अपत्ति कर रहे है,वे उस शासनादेश से अनभिज्ञ हैं,जिसके माध्यम से कार्यदायी निकाय को 10 लाख तक के कार्य टेंडर बाक्स के माध्यम से करवाये जाने का अधिकार दिया हुआ है।
टेंडरों की संख्या निर्धारित नहीं :
श्री माथुर ने कहा कि टेंडर 10 लाख तक की सीमा होने का तो शासकीय पत्र में जरूर उल्लेख है किंतु कितु टेंडर बाक्स इस प्रक्रिया(टेंडर वक्स ) के माध्यम से कितनी निविदाये उठायी जा सकती है,इस संबध में कोयी सीमा आधिकारिक रूप से निर्धारित नहीं है।एक तथ्य उनकी जानकारी में जरूर है कि वाक्स टेंडर के माध्यम से आवंटित कार्य टेंडर डौक्यूमेंट एस्टीमेट से अधिक का नहीं होना चाहिये।
शासन का पत्र :
श्री माथुर ने कहा कि पूर्व मुख्य सचिव राजीव कुमार के द्वारा अपने कार्यकाल में जारी किये गये शासकीय पत्र सख्या-6/2018/256/78-2-2018-423 आई.टी./2017 टीसे ,दिनांक 24 अप्रैल 2018 के माध्यम से प्रदेश के समस्त सार्वजनिक उपक्रमों के अध्यक्ष/प्रबन्ध निदेशक, निकायों, परिषदों एवं स्वायत्तशासी निकायों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदि को शासन द्वारा सम्यक विचारोपरान्त ई-टेण्डरिंग प्रणाली के माध्यम से आमंत्रित की जाने वाली निविदाओं के लिए उपरोक्त वित्तीय सीमा रु 1,00,000/- को बढ़ाकर रु 10,00,000/- किये जाने का निर्णय लिये जाने की आधिकारिक जानकारी दी गयी थी।
तब तक पूर्व में शासन के -वित्त (लेखा) अनुभाग-1, उत्तर प्रदेश के शासनादेश संख्या- ए-1-864/ दस-08-15 (1) 86 दिनांक 23 सितम्बर 2008 के अनुरूप रु 1,00,000/- से अधिक मूल्य के सामान सेवायें टेण्डर आमंत्रित करके क्रय किये जाने और उक्त वित्तीय सीमा से अधिक की सभी निविदाये ई-टेण्डरिंग प्रणाली द्वारा आमंत्रित किये जाने का ही प्राविधान था।
दिसम्बर 2021 में निगम कार्यकारिणी ने किया था पास :
श्री माथुर ने बताया कि कानपुर और लखनऊ में शासन आदेश लागू हो जाने उपरांत आगरा नगर निगम में भी इसे प्रभावी बनाये जाने के लिये इस शासकीय पत्र (दस्तावेज़) को नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक (दिनांक 30.12.2021) के प्रस्ताव संख्या-3 के रूप में प्रस्तुत कर प्रभावी करने का मार्ग प्रशस्त किया।
प्रस्ताव में स्प्ष्ट बताया गया था कि ₹10 लाख से कम की निविदाओं को 'टेंडर कमेटी' के पास भेजने के बजाय सीधे स्वीकृत किया जाए, ताकि छोटे कार्यों में होने वाली देरी से बचा जा सके और जनता को असुविधा न हो।
कठनाईयों का व्यवहारिक समाधान :
श्री माथुर ने तर्क दिया कि ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया में बहुत समय लगता है। उन्होंने उदाहरण दिया कि कानपुर और लखनऊ नगर निगमों में ₹10 लाख से कम के काम ऑफलाइन (बिना लंबी कमेटी प्रक्रिया के) होते हैं, जबकि यहाँ फाइलों को कमेटी में भेजकर अटका दिया जाता है।
बैठक में मुख्य अभियन्ता, निर्माण: ने पुष्टि की कि कानपुर और लखनऊ में ₹10 लाख तक के टेंडर ऑफलाइन होते हैं और यहाँ भी 'जी.ओ.' (सरकारी आदेश) के आधार पर कार्य किया जा रहा है।
एक प्रश्न के जबाब में उन्होंने कहा कि वह हमेशा करवाये गये कार्यों की ‘गुणवत्ता’ की सुनिश्चितता के पक्षधर रहे हैं।अगर किसी कार्य की निम्न गुणवत्ता से संबधित प्रकरण है,तो वह उसके साथ है।
रिपोर्ट : असलम सलीमी

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