“भीख मांग कर खाने वाला भी दे सकता है कुर्बानी”: एड.गुल चमन शेरवानी
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। बकरा ईद के मौके पर जहां एक ओर महंगे और कीमती बकरों की कुर्बानी को लेकर होड़ दिखाई देती है, वहीं शाहगंज के आजमपाड़ा निवासी एडवोकेट गुल चमन शेरवानी ने कुर्बानी को लेकर अलग संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कुर्बानी केवल अमीरों की जागीर नहीं है, बल्कि भीख मांगकर जीवन यापन करने वाला व्यक्ति भी सच्चे मन से अपनी बुराइयों को त्याग दे तो उसकी कुर्बानी अल्लाह की नजर में कबूल हो सकती है।
उन्होंने कहा कि आज कई लोग कुर्बानी के नाम पर अपनी दौलत का प्रदर्शन करते हैं, जबकि इस्लाम दिखावे की इजाजत नहीं देता। अल्लाह को न दिखावा पसंद है और न ही केवल जानवर का गोश्त या खून, बल्कि वह अपने बंदों की नियत और पाकीजगी देखता है।
बकरा ईद से एक दिन पूर्व एडवोकेट गुल चमन शेरवानी ने अपने निवास तिरंगा मंजिल, शेरवानी मार्ग, आजमपाड़ा पर बकरे की तस्वीर वाला केक काटकर विश्व की ऐतिहासिक एवं अनोखी “कुर्बानी” कर जीव हत्या रोकने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि हजरत इब्राहिम ने अल्लाह की राह में अपना सब कुछ कुर्बान कर दिया था। जब अल्लाह की परीक्षा और कठिन हुई तो उन्होंने अपने सबसे अजीज बेटे हजरत इस्माइल को भी कुर्बान करने का इरादा बना लिया। लेकिन अल्लाह को इंसान या जानवर का खून नहीं चाहिए था, बल्कि अपने बंदे की सच्ची नीयत देखनी थी।
शेरवानी ने कहा कि कुर्बानी का असली संदेश अपने अंदर की बुराइयों, अहंकार, लालच और नफरत को खत्म करना है। यदि कोई व्यक्ति अपनी गलत आदतों को छोड़कर इंसानियत और मोहब्बत का रास्ता अपनाता है, तो वही असली कुर्बानी है।
उन्होंने कहा कि आज कई ऐसे लोग भी कुर्बानी कर रहे हैं जिनसे उनके माता-पिता खुश नहीं हैं। जब मां-बाप और अल्लाह ही नाराज हों तो ऐसी कुर्बानी का क्या महत्व रह जाता है। इसलिए लोगों को जीव हत्या से बचते हुए इंसानियत, प्रेम और त्याग का संदेश अपनाना चाहिए।
एडवोकेट गुल चमन शेरवानी की इस अनोखी पहल पर राष्ट्रीय हिंदू परिषद की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गोपाल चौधरी, क्षेत्रीय पार्षद रवि दिवाकर, रमन गोला, सैयद रजब अली, वाजिद अब्बास, रफीक मियां, शरीफ मुल्लाजी, बंटी खान, सचिन गुप्ता, नवीन पोरवाल, एडवोकेट अर्जुन सिंह, एडवोकेट श्रेयांश गौतम, एडवोकेट जैकी सिंह, सोनू अग्रवाल सहित अनेक लोगों ने शेरवानी परिवार को शुभकामनाएं दीं।
अंत में शेरवानी ने कहा कि “कुर्बानी के नाम पर जीव हत्या उचित नहीं है, बल्कि इंसान को अपने भीतर की बुराइयों की कुर्बानी देनी चाहिए।”



