आगरा के जंगलों पर विलायती बबूल का कब्जा,तितलियां और पक्षी हो रहे गायब

पालीवाल पार्क में पर्यावरणविदों ने देशी वृक्षों के संरक्षण का उठाया मुद्दा

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। आगरा के जंगलों और हरित क्षेत्रों में तेजी से फैल रही विदेशी प्रजाति “विलायती बबूल” को लेकर पर्यावरण प्रेमियों ने गंभीर चिंता जताई है। पालीवाल पार्क में आयोजित प्रातःकालीन भ्रमणकारियों की बैठक में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पर्यावरण प्रेमी के.सी. जैन ने कहा कि यदि स्थानीय वृक्षों और झाड़ियों को नहीं बचाया गया तो आगरा की जैव विविधता धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि आज लोगों में देशी पेड़ों और पौधों की पहचान का अभाव है। सजावटी पौधों के बढ़ते चलन के बीच पारंपरिक स्थानीय प्रजातियां तेजी से खत्म होती जा रही हैं। इसका परिणाम यह है कि मऊ, कीठम, बाह और ताज नेचर वॉक जैसे क्षेत्रों में विलायती बबूल का एकतरफा विस्तार दिखाई दे रहा है, जिससे स्थानीय वनस्पतियों को पनपने का अवसर नहीं मिल पा रहा।

के.सी. जैन ने कहा कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं होते, बल्कि पक्षियों, तितलियों, मधुमक्खियों और अनेक जीव-जंतुओं का पूरा संसार होते हैं। विदेशी प्रजातियों के अत्यधिक विस्तार से यह प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पहले जहां जंगलों में तितलियों और पक्षियों की भरमार दिखाई देती थी, वहीं अब उनका अस्तित्व तेजी से कम हो रहा है।

बैठक में उन्होंने आगरा क्षेत्र के लिए उपयोगी देशी वृक्षों का उल्लेख करते हुए तमाल, केंथ, रेमजा, शमी, बेलपत्र, हिंगोट और बेर जैसे कांटेदार वृक्षों को पर्यावरण के अनुकूल बताया। वहीं अर्जुन, कदम्ब, सहजन, शहतूत, इमली, जामुन, अमलतास, अंकोल और सिरस जैसे वृक्षों को कम पानी में विकसित होने वाला और जैव विविधता के लिए लाभकारी बताया।

फाइकस प्रजाति के गूलर, पीपल, बरगद और पाखड़ को उन्होंने “जीवनदाता वृक्ष” बताते हुए कहा कि इन पर बड़ी संख्या में पक्षी और तितलियां निर्भर रहती हैं। स्थानीय झाड़ियों में अडूसा, वज्रदंती, करील और हिंस को भी उन्होंने पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि तितलियां केवल विशेष प्रकार के पौधों और झाड़ियों पर ही अंडे देती हैं। यदि उनकी पसंद के पौधे नहीं होंगे तो तितलियां किसी क्षेत्र में नहीं आएंगी। ऐसे में केवल “बटरफ्लाई पार्क” बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने होंगे।

बैठक में आगामी वर्षा ऋतु में अधिक से अधिक देशी वृक्ष लगाने और लोगों के बीच जैव विविधता संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चलाने का संकल्प लिया गया। इस दौरान अनिल अग्रवाल, डॉ. संजीव गोयल सहित अनेक पर्यावरण प्रेमी और प्रातःकालीन भ्रमणकारी मौजूद रहे।

रिपोर्ट : असलम सलीमी