बाल साहित्य में गीतिका वेदिका की अनूठी पहल की सराहना



डॉ.विकास दवे बोले ! बाल मन को राष्ट्रधर्म, शौर्य और संस्कारों से जोड़ना समय की आवश्यकता

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

टीकमगढ़। बाल साहित्य के क्षेत्र में साहित्यकार एवं अभिनेत्री गीतिका वेदिका द्वारा की गई अनूठी पहल की साहित्य जगत में सराहना हो रही है। समर्पयामि फाउंडेशन,टीकमगढ़ के तत्वावधान में आयोजित ‘बाल साहित्य गोष्ठी व विमर्श’ कार्यक्रम को ‘अम्मा की बगिया’ नाम दिया गया,जिसकी अध्यक्षता बालगोपाल ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ.विकास दवे उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. दवे ने कहा कि आज बाल साहित्य केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रह सकता।बच्चों के चरित्र निर्माण, राष्ट्रधर्म, शौर्य, संस्कार, पर्यावरण और रिश्तों की समझ विकसित करने वाला साहित्य समय की बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने गीतिका वेदिका द्वारा बाल साहित्य को केंद्र में रखकर किए गए इस नवाचार को सराहनीय बताया।

डॉ. दवे ने कहा कि बाल साहित्य की गोष्ठी में लड्डू गोपाल से अध्यक्षता कराना एक अभिनव प्रयोग है,जो बच्चों को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का माध्यम बनेगा। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि ‘पराग’ और ‘नंदन’ जैसी बाल पत्रिकाओं के बंद होने से बाल साहित्य का दायरा प्रभावित हुआ है। ऐसे समय में इस प्रकार के आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे विद्या भारती की बाल साहित्य पत्रिका ‘देवपुत्र’ के संपादक रहे हैं, जिसकी प्रसार संख्या 3 लाख 71 हजार तक पहुंचकर विश्व कीर्तिमान स्थापित कर चुकी है।

कार्यक्रम में डॉ.दवे ने बच्चों के आदर्शों पर भी चर्चा की और कहा कि वीर शिवाजी, महाराणा प्रताप और वीर सावरकर जैसे ऐतिहासिक महानायकों को बच्चों के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बालकों को पाश्चात्य प्रभाव और काल्पनिक पात्रों की बजाय भारतीय इतिहास की शौर्य गाथाओं से परिचित कराना जरूरी है।

यह गोष्ठी गीतिका वेदिका की माता उमा देवी पाराशर के जन्मदिवस पर आयोजित की गई थी। उमा देवी स्वयं युवावस्था में सरस्वती शिशु मंदिर में बच्चों को बालगीत सिखाया करती थीं। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि का स्वागत तिलक, शाल-श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंटकर किया गया।

कार्यक्रम में स्थानीय साहित्यकारों, शिक्षकों, बालक-बालिकाओं और सामाजिक जनों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही। आयोजन में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए दोना-पत्तल और घर में बने व्यंजनों का उपयोग किया गया तथा थर्मोकोल जैसी सामग्री का निषेध किया गया।

आभार व्यक्त करते हुए गीतिका वेदिका ने कहा कि ‘अम्मा की बगिया’ के अंतर्गत अब नियमित रूप से बालसभाओं और रचनात्मक गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। टीकमगढ़ में बाल साहित्य को समर्पित इस तरह का आयोजन एक प्रेरणादायी पहल माना जा रहा है।