हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
जिनेवा। भारत ने जिनेवा में आयोजित निरस्त्रीकरण सम्मेलन में अपना राष्ट्रीय वक्तव्य पेश करते हुए रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने, हथियारों की नई दौड़ को रोकने और सार्वभौमिक परमाणु निरस्त्रीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। भारत ने स्पष्ट किया कि उभरती हुई प्रौद्योगिकियों (जैसे- एआई) के सैन्य इस्तेमाल में इंसानी नियंत्रण होना चाहिए।
निरस्त्रीकरण सम्मेलन में भारत के स्थायी मिशन ने एक बयान में बताया कि भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत चरणजीत सिंह ने 'नकारात्मक सुरक्षा आश्वासनों' (एनएसए) पर भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए परमाणु-हथियार मुक्त देशों की सुरक्षा और वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर भारत के लंबे समय से चले आ रहे सैद्धांतिक और व्यावहारिक रुख को दोहराया।
भारतीय मिशन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा की गई एक पोस्ट में बताया है कि भारत ने एक ऐसी वैश्विक, बिना शर्त और कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि का समर्थन किया है, जो गैर-परमाणु हथियार संपन्न देशों को परमाणु हथियारों के उपयोग या उनके उपयोग की धमकी के खिलाफ पूरी सुरक्षा की गारंटी दे सके।
इस दौरान भारत ने अपने परमाणु सिद्धांत के तहत 'नो-फर्स्ट-यूज़' (एनएफयू) और गैर-परमाणु राष्ट्रों के खिलाफ परमाणु हथियारों का उपयोग न करने की अपनी नीति को फिर से दोहराया। भारतीय राजदूत ने स्पष्ट किया कि भारत वैश्विक स्तर पर भी सभी परमाणु संपन्न देशों के बीच एक 'ग्लोबल नो-फर्स्ट-यूज़' समझौते की वकालत करता है।
एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति का परिचय देते हुए भारत ने वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था के प्रति एक जिम्मेदार और गंभीर राष्ट्र के रूप में अपनी भूमिका को स्पष्ट किया, जो परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। बता दें कि भारत पारंपरिक रूप से संयुक्त राष्ट्र महासभा में परमाणु खतरों को कम करने और परमाणु हथियारों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने वाले प्रस्तावों को पेश करता रहा है। भारत का यह वक्तव्य वैश्विक, सत्यापन-योग्य और गैर-भेदभावपूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति उसकी दीर्घकालिक और दृढ़ प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

