जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई की मांग को लेकर जिलाधिकारी से मिलते,दीवा के अध्यक्ष डॉ.सतीश शर्मा एवं अन्य पदाधिकारी।
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। पशुपालन विभाग में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में संगठन (दीवा) के अध्यक्ष डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ने उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव (पशुधन एवं मत्स्य एवं दुग्ध विकास), निदेशक (प्रशासन एवं विकास) तथा वित्त नियंत्रक को प्रेषित ज्ञापन के माध्यम से दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं विधिक कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि मण्डलायुक्त, आगरा के आदेश के क्रम में जिलाधिकारी आगरा के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी द्वारा गठित जांच समिति, जिसकी अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) ने की, ने अपनी जांच पूर्ण कर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। आरोप है कि जांच रिपोर्ट में तत्कालीन मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. जयन्त यादव तथा तत्कालीन लेखाकार स्वर्गीय ज्ञानेन्द्र भारद्वाज को वित्तीय अनियमितताओं के लिए उत्तरदायी प्रतीत बताया गया है।
डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि वर्तमान मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. डी.के. पाण्डे एवं वर्तमान सहायक लेखाकार द्वारा जांच समिति को क्रय प्रक्रिया से संबंधित मूल अभिलेख एवं पत्रावलियां उपलब्ध नहीं कराई गईं, जिससे जांच प्रभावित हुई। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितता बताते हुए आरोप लगाया कि लगभग 25 लाख रुपये के भुगतान से संबंधित मामलों में प्रक्रियागत शिथिलता सामने आई है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25, 2025-26 तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 में जिला क्रय समिति का गठन न होने के बावजूद क्रय प्रक्रिया संचालित किए जाने की शिकायत की गई है। संगठन ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष विभागीय जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के तहत कार्रवाई की जाए।
डॉ.शर्मा ने बताया कि उन्होंने 30 जून 2026 को जिलाधिकारी आगरा से मुलाकात कर जांच रिपोर्ट से शासन को अवगत कराने का अनुरोध किया था। उनके अनुसार, जिलाधिकारी ने अवगत कराया कि संबंधित जांच आख्या शासन को प्रेषित की जा चुकी है।
संगठन ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि गौवंश संरक्षण एवं पशुपालन विभाग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए, जिससे विभाग में भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

