हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नशा मुक्त युवा, विकसित भारत’ अभियान के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से एम.डी. जैन इंटर कॉलेज के सभागार में ‘शराब है खराब’ नाटक का प्रभावशाली मंचन किया गया। यह आयोजन प्रमुख उद्योगपति स्वर्गीय स्वरूप चंद जैन के जन्मदिवस पर आयोजित स्मृति संध्या में हुआ। नाटक का लेखन एवं निर्देशन सुशील सरित ने किया।
नाटक की शुरुआत “पीने वालों को पीने का बहाना चाहिए, होली या दिवाली हो, बोतल तो खुल जाना चाहिए” गीत से हुई। हरीश अग्रवाल, सुधीर शर्मा, डॉ. असीम आनंद, डॉ. रमेश आनंद, रूपेश मल्होत्रा और विशन स्वरूप ने नशे में धुत शराबियों के रूप में झूमते-लड़खड़ाते मंच पर प्रवेश किया तो सभागार तालियों से गूंज उठा।
नाटक के माध्यम से शराब और मादक पदार्थों के सेवन से होने वाली गंभीर बीमारियों, कैंसर, लकवा सहित स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों तथा इनके वैज्ञानिक पक्ष को हास्य-व्यंग्य के हल्के-फुल्के अंदाज में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
अपनी बहन के लिए लड़का तलाशती बहन की भूमिका में नेहा बागड़ी, नॉनवेज खाने से बीमार हुए बेटे की मां की भूमिका में संगीता सिंह, डॉक्टर की भूमिका में हरीश भदोरिया, पंडित जी की भूमिका में चंद्रशेखर शर्मा तथा कैंसर रोगी की भूमिका में विशन स्वरूप ने शानदार अभिनय किया।
नाटक के अंत में डॉक्टर हरीश भदोरिया ने नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करते हुए कहा— “सिगरेट, बीड़ी या तंबाकू, ये सारे हैं पक्के डाकू; सारे चोर-डाकुओं की सरदार है शराब। शराब है खराब, खराब है खराब।” इसके बाद पूरे सभागार से एक साथ “शराब है खराब” का उद्घोष हुआ।
नाटक का संगीत निर्देशन आगरा कॉलेज, आगरा के संगीत विभाग की प्रोफेसर आंशवना सक्सेना ने किया। प्रस्तुत गीतों को सुशील सरित एवं उनके साथियों ने स्वर दिए। कार्यक्रम का समन्वयन कुमारी पूजा तोमर ने किया, जबकि संचालन डॉ. राजेंद्र मिलन ने किया।
सुशील सरित ने बताया कि नाटक का उद्देश्य मनोरंजन के साथ-साथ युवाओं और समाज को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना तथा नशामुक्त समाज का संदेश देना है।
रिपोर्ट : असलम सलीमी

