दरगाह शाह अमीर अबुल उला पर हुआ जलसा आमद-ए-नूर



उलेमाओं ने पैगंबर हजरत मोहम्मद मुस्तफा की सीरत पर डाला प्रकाश,अमन-चैन की दुआ

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। दरगाह हजरत सय्यदना शाह अमीर अबुल उला रह. पर गुरुवार, 10 सितंबर को जलसा आमद-ए-नूर का आयोजन किया गया। पीर-ए-तरीकत हजरत सैय्यद मोहतशिम अली अबुल उलाई सज्जादानशीन की सरपरस्ती में आयोजित जलसे में उलेमाओं ने सरकार-ए-दो-आलम हजरत अहमद मुस्तफा की सीरत-ए-पाक और उनके जीवन संदेश पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने लोगों से पैगंबर-ए-इस्लाम के बताए रास्ते पर चलने और उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने की अपील की।

कार्यक्रम की शुरुआत मौलाना अब्दुल वहाब ने कुरआन पाक की तिलावत से की। इसके बाद मुफ्ती मोहम्मद आसिफ रजा मुसद्दी, कन्नौज ने तकरीर करते हुए पैगंबर हजरत मोहम्मद मुस्तफा ﷺ के जीवन और शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। मौलाना अमान रजा अकबराबादी, कारी इमरान बरकाती (सादाबाद), आरिफ रजा कादरी (आगरा), हाजी सैय्यद गुलजार और सूफी दिलकश जालोनवी सहित अन्य लोगों ने जलसे में शिरकत की।

जलसे में सरकार-ए-दो-आलम हजरत मोहम्मद मुस्तफा की शान में नात-ए-पाक पेश की गईं। दरगाह के नायब सज्जादानशीन ने कहा कि हजरत मोहम्मद मुस्तफा  को अल्लाह ने रहमतुल्लिल आलमीन बनाकर पूरी दुनिया के लिए रहमत का पैगाम दिया। उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम  ने जाहिलियत के दौर को बदलकर इंसानियत को बेहतर जीवन जीने का संदेश दिया। उन्होंने वालिदैन की अहमियत और बच्चों के प्रति जिम्मेदारियों पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने कुरआन की आयत “वमा अरसल्नाका इल्ला रहमतल्लिल आलमीन” का हवाला देते हुए कहा कि हजरत मोहम्मद मुस्तफा ﷺ तमाम आलम के लिए रहमत बनकर तशरीफ लाए। सैय्यद आसिम अली अबुल उलाई ने हजरत मोहम्मद मुस्तफा ﷺ की शान में नात-ए-पाक पेश कर खिराज-ए-अकीदत पेश किया।

इस अवसर पर नायब सज्जादगान हाजी सैय्यद विरासत अली अबुल उलाई, सैय्यद इशाअत अली अबुल उलाई, सैय्यद कैफ अली अबुल उलाई, सैय्यद आसिम अली अबुल उलाई, सैय्यद शाहब अली, सैय्यद अजहर अली, सैय्यद अरीब अली और सैय्यद सलीम उज़-ज़मा सहित सूफी हजरात एवं जायरीनों ने दरगाह शरीफ में चादरपोशी और गुलपोशी की। इसके बाद देश में अमन-चैन, खुशहाली और भाईचारे की दुआ की गई। फातिहा के बाद लंगर का आयोजन किया गया, जो देर तक जारी रहा।

रिपोर्ट : असलम सलीमी