एमसीबीयू की भूगर्भशास्त्र अध्ययन शाला में मनाया गया विश्व जल दिवस





जल संकट की भयावह स्थिति से निपटने के लिए,जल संरक्षण पर ध्यान दिया जाना अतिआवश्यक -प्रोफेसर जैन

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

 छतरपुर।महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय,छतरपुर की भूगर्भशास्त्र अध्ययन शाला में विश्व जल दिवस का आयोजन कुलगुरु प्रो.शुभा तिवारी के निर्देशन तथा कुलसचिव यशवंत सिंह पटेल के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा-अर्चना से हुआ कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के प्राणी शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एच. एन. खरे रहे,एवं अध्यक्षता भूगर्भशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. पी. के. जैन ने की।

 विश्व जल दिवस के बारे मे प्रो. जैन ने बताया कि दिसंबर 1992 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने निर्णय लिया कि प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जायेगा। इस वर्ष के लिए विश्व जल दिवस की थीम “शांति के लिए जल का इस्तेमाल” रखी गई है। भारत के कई बड़े शहरों मे भूजल का स्तर बहुत ही नीचे पहुंच चुका है। अफ्रीका के केपटाउन मे पेयजल की स्थिति भयाभय है। हमें जल बचाने के प्रयास पूर्ण मनोयोग से करना चाहिए। भूजल का उपयोग सीमित मात्रा में बुद्धिमत्ता पूर्वक करे,जिससे अगली पीढ़ी को भूजल मिल सके,हमें वर्षा जल का पुनः भरण करना होगा, जिससे भूजल का स्तर सुधर सके। मुख्य अतिथि प्रो. एच.एन.खरे ने बतलाया कि छतरपुर शहर में पेयजल की स्थिति गर्मी आते ही खराब होने लगती है। सभी लोग जल को व्यर्थ न बहाएं। वर्षा जल के संरक्षण के लिए प्रयास करें जिससे फसलों के लिए सतही जल से सिंचाई करके भूजल को बचाया जा सके।एमएससी अंतिम वर्ष के विद्यार्थी प्रमोद पाल ने पीपीटी के माध्यम से जल की उपयोगिता पर प्रेजेंटेशन दिया। छात्र मुकेश नारायण द्विवेदी ने भी जल को बचाने के लिए उचित सकारात्मक प्रयास करने की अपील की। कार्यक्रम के अंत में अतिथि विद्वान मुमताज जहां मंसूरी ने सभी का आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन अतिथि विद्वान आशी जैन ने किया। इस कार्यक्रम में एमएससी प्रथम वर्ष तथा अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों ने भाग लिया।

रिपोर्ट-मदन साहू।