सृजनात्मक लेखन : कल्पना से अभिव्यक्ति तक' विषय पर आगरा के कवि कुमार ललित ने गोवा के युवा विद्यार्थियों का किया मार्गदर्शन, अपनी गीत-कविताएँ सुनाकर भावविभोर करते हुए सृजनात्मक लेखन के व्यावहारिक पक्ष से कराया परिचय
सृजनात्मक लेखन एक ओर बिंदु से सिंधु की यात्रा है,वहीं दूसरी ओर यह सिंधु को एक बिंदु में समेटने की कला भी है : कुमार ललित
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
गोवा। भारत के समुद्र तट पर बसे खूबसूरत गोवा के साँखली स्थित कला, विज्ञान एवं वाणिज्य शासकीय महाविद्यालय में स्नातक एवं परास्नातक हिंदी विभाग तथा हिंदी अनुसंधान केंद्र द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा निराला पुरस्कार से सम्मानित आगरा के उदीयमान कवि कुमार ललित को विशिष्ट वक्ता के रूप में सहभागिता करने का गौरवशाली अवसर मिला।
रचना में घनीभूत संवेदना और आत्मा के प्रकाश की झलक आवश्यक :
"सृजनात्मक लेखन : कल्पना से अभिव्यक्ति तक" विषय पर महाविद्यालय के युवा छात्र-छात्राओं और हिंदी विभाग के शिक्षकों को संबोधित करते हुए कुमार ललित ने अपने सारगर्भित,ज्ञानवर्धक,प्रेरणास्पद एवं विचारोत्तेजक वक्तव्य में कहा कि 'सृजनात्मक लेखन : कल्पना से अभिव्यक्ति तक' केवल कुछ शब्दों या वाक्यों का एक विशेष प्रारूप में जोड़-घटाव या संयोजन मात्र नहीं है, अपितु इसमें घनीभूत संवेदना और आत्मा के प्रकाश की झलक भी बेहद आवश्यक है। यह एक ओर बिंदु से सिंधु की यात्रा है,वहीं दूसरी ओर यह सिंधु को एक बिंदु में समेटने की कला भी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे-जैसे चेतना का स्तर बढ़ता जाता है,रचनाकार अपनी कल्पना, विचार, अनुभव या अहसास को कम शब्दों में अभिव्यक्त करना सीख जाता है।
दुनिया की भीड़ में खुद को खोजिए :
कुमार ललित ने महाविद्यालय के युवा छात्र-छात्राओं को सृजनात्मक लेखन की प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि आप भी अपने अनुभवों, एहसासों और कल्पनाओं को अभिव्यक्त कीजिए। चिंतन-मनन और अध्ययन कीजिए। सृजन कीजिए। दुनिया की भीड़ में खुद को खोजिए। खुद से गुफ्तगू कीजिए। अपने को और मानवीय बनाइए ताकि यह दुनिया और प्यारी और खूबसूरत बन सके।
छात्र-छात्राओं की जिज्ञासाओं का किया समाधान :
'लेखक से संवाद' सत्र के अंतर्गत कुमार ललित ने महाविद्यालयी छात्र-छात्राओं द्वारा सृजनात्मक लेखन के विविध पक्षों पर पूछे गए विचारोत्तेजक प्रश्नों के उत्तर देकर उनका मार्गदर्शन किया। उन्होंने अपने समृद्ध साहित्यिक अनुभवों को साझा करते हुए अपनी गीत- कविताओं का सस्वर पाठ करके सृजनात्मक लेखन विषय के व्यावहारिक पक्ष से विद्यार्थियों का परिचय करवाया,जिससे सभागार में एक जीवंत,भावपूर्ण एवं आनंददायक साहित्यिक वातावरण निर्मित हुआ। इस व्याख्यान से विद्यार्थियों,शिक्षकों एवं प्रतिनिधियों सहित कुल 108 प्रतिभागी लाभान्वित हुए।
इनकी रही प्रमुख भूमिका :
इस व्याख्यान कार्यक्रम के संयोजन के साथ स्वागत भाषण एवं विशिष्ट वक्ता का परिचय परा स्नातक हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष एवं हिंदी अनुसंधान केंद्र की समन्वयक प्रो.(डॉ.) सोनिया सिरसाट ने दिया। प्रभारी स्नातक, हिंदी विभाग प्रो. सुविद्य धारवाडकर ने धन्यवाद दिया। परास्नातक हिंदी विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ.रंजिता परब ने संचालन किया।



