हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा : केंद्रीय बजट को लेकर भाजपा नेताओं ने इसे विकास,रोजगार और आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप बताया, जबकि कर्मचारी संगठनों ने पेंशन,वेतन आयोग और असंगठित क्षेत्र की अनदेखी का आरोप लगाते हुए बजट को निराशा जनक करार दिया।
जिलाध्यक्ष प्रशांत पोनिया ने बजट को किसानों के हितों में मजबूत बताते हुए कहा कि इसमें कृषि क्षेत्र को संबल देने के साथ-साथ सेना के बजट में वृद्धि और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों की स्पष्ट झलक मिलती है। उन्होंने इसे नई सदी के भारत की रफ्तार तय करने वाला रोडमैप बताया, जिसमें गरीब,किसान, युवा और महिलाओं के सशक्तिकरण को केंद्र में रखा गया है।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष इंजी.हरि किशोर तिवारी ने बजट को कर्मचारी और शिक्षक वर्ग के लिए निराशा जनक बताया। उन्होंने कहा कि बजट में न तो पेंशन व्यवस्था का कोई उल्लेख है और न ही आठवें वेतन आयोग को लेकर कोई स्पष्ट संकेत,जिससे यह माना जा रहा है कि इस वर्ष आठवां वेतन आयोग लागू नहीं होगा।
उन्होंने असंगठित क्षेत्र,मानदेय और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए ईपीएफओ पेंशन,जो वर्षों से 1000 रुपये पर अटकी है,उसे बढ़ाने और न्यूनतम वेतन में सुधार की मांग को भी नजरअंदाज बताया। साथ ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए रेलवे रियायतें बहाल न होने पर भी नाराज़गी जताई। उनका कहना था कि कर्मचारियों और शिक्षकों की दृष्टि से यह बजट उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका।
ब्रिगेडियर विनोद दत्ता (रक्षा विशेषज्ञ और कारगिल योध्दा) ने कहा कि रक्षा बजट में 15% का इजाफा एक Welcome step है, लेकिन जिस तरह के सुरक्षा समीकरण भारत के आस-पास हैं, सरकार को कम से कम 30% का इजाफा करना चाहिए था।रणनीति और रण कौशल दोनो तकनीक से प्रभावित हैं। उसके लिए आधुनिक शस्त्र और सैनिको के प्रशिक्षण पर ज्यादा खर्च करना होगा।
रिपोर्ट : असलम सलीमी


