हाथीघाट पर स्थापित हुआ "अर्पण कलश", 560 किलो प्लास्टिक कचरा हटाकर भेजा गया रीसाइक्लिंग के लिए

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा, 14 जून। यमुना नदी को धार्मिक एवं प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त बनाने की दिशा में संस्कृति यूथ फाउंडेशन ने आगरा नगर निगम के सहयोग से हाथीघाट पर "अर्पण कलश" की स्थापना की। इस पहल का उद्देश्य श्रद्धालुओं को पूजन सामग्री, पुष्प, मालाएं एवं प्रतिमा अवशेषों को यमुना में प्रवाहित करने के बजाय अर्पण कलश में समर्पित करने के लिए प्रेरित करना है, जिससे धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल सके।

संस्था के अनुसार अर्पण कलश में एकत्रित सामग्री को नगर निगम की मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) में भेजकर वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल तरीके से पुनर्चक्रित किया जाएगा। इसे यमुना में धार्मिक अपशिष्ट के प्रवाह को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

अर्पण कलश स्थापना के बाद यमुना तट पर व्यापक स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। अभियान के दौरान स्वयंसेवकों ने लगभग 560 किलोग्राम प्लास्टिक एवं अन्य अपशिष्ट एकत्रित कर उसे पुनर्चक्रण के लिए नगर निगम की एमआरएफ सुविधा में भेजा। उपस्थित वक्ताओं ने नागरिकों से अपील की कि वे धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए नदियों को प्रदूषित होने से बचाने में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।

कार्यक्रम में समाजसेवी संतोष खिरवार, भाजपा जिला मंत्री सतीश देव त्यागी, अखिल विश्व गायत्री परिवार के जिला समन्वयक सुरेश सक्सैना, गायत्री परिवार युवा प्रकोष्ठ के जिला समन्वयक गोपाल कुशवाह तथा समाजसेवी डॉ. आनंद प्रकाश त्यागी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

संस्कृति यूथ फाउंडेशन की ओर से अध्यक्ष आयुष कुलश्रेष्ठ, उपाध्यक्ष दीपक त्यागी, मीडिया प्रमुख वैषाली शर्मा, सचिव मानसी वर्मा, पीआर प्रमुख शांतनु बुधराजा सहित सचिन त्यागी, सुजाता, वर्णिका, कुशाग्र, अंकित त्यागी, मनीष दुबे, नवीन, प्राची, अभिरव तथा संस्था के 120 से अधिक स्वयंसेवकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

संस्था ने बताया कि वर्ष 2021 से वह पर्यावरण संरक्षण,शिक्षा एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्य कर रही है। वर्तमान में संगठन देश के 24 शहरों में 7,500 से अधिक स्वयंसेवकों के नेटवर्क के साथ सक्रिय है। संस्था द्वारा यमुना एवं अन्य जल स्रोतों की स्वच्छता, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, बाल शिक्षा एवं सामुदायिक विकास से जुड़े अभियान निरंतर संचालित किए जा रहे हैं।

संस्कृति यूथ फाउंडेशन के अनुसार अब तक देशभर में 1.20 लाख किलोग्राम से अधिक प्लास्टिक एवं अन्य अपशिष्ट को पर्यावरण से हटाकर पुनर्चक्रण के लिए भेजा जा चुका है तथा 10 हजार से अधिक पौधों का रोपण एवं संरक्षण किया गया है। संस्था का कहना है कि "अर्पण कलश" जैसी पहलें धार्मिक आस्था, जनसहभागिता और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रही हैं तथा भविष्य में भी यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।

रिपोर्ट : मनोहर लाल चुघ