धर्म के लिए जीवन यापन करना चाहिए : स्वामी रामप्रपन्नाचार्य




कुंती-भीष्म स्तुति एवं शुकदेव प्राकट्य प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा, 2 जून। पंचेश्वर महादेव मंदिर, कालिंदीपुरम कॉलोनी, मऊ रोड, खंदारी बायपास चौराहा पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के द्वितीय दिवस पर कथा व्यास स्वामी श्री रामप्रपन्नाचार्य जी महाराज ने कुंती-भीष्म स्तुति एवं शुकदेव प्राकट्य प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

स्वामी रामप्रपन्नाचार्य जी महाराज ने कहा कि मनुष्य का जीवन केवल धन अर्जित करने के लिए नहीं, बल्कि धर्म पालन और लोककल्याण के लिए होना चाहिए। धन आवश्यकताओं की पूर्ति का साधन है, जबकि धर्म जीवन को सार्थक बनाता है। धर्ममय जीवन से सुख, शांति और संतोष की प्राप्ति होती है।

कुंती स्तुति का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि माता कुंती ने विपत्तियों में भी भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण नहीं छोड़ा। वहीं भीष्म पितामह के प्रसंग में उन्होंने सत्य, त्याग, कर्तव्य और धर्मनिष्ठा के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दी। शुकदेव प्राकट्य प्रसंग में उन्होंने बताया कि महर्षि शुकदेव जन्म से ही आत्मज्ञानी एवं वैराग्यवान थे और उन्होंने श्रीमद्भागवत के माध्यम से मानवता को मोक्ष का मार्ग दिखाया।

मुख्य यजमान मनीष अग्रवाल एवं शिवानी अग्रवाल ने कथा व्यास का स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर जगदीश प्रसाद लवानिया, जगमोहन गौतम, आशीष गौतम, नानक चंद मिश्रा, कैलाश गौतम, जेपी शर्मा, शैलेंद्र सिंह, धर्मेंद्र प्रताप सिंह, संजीव सिंह, निशांत सिंह कन्नू पार्षद, क्षेत्रपाल सिंह, यश कुमार दुबे, प्रीति मिश्रा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कथा के समापन पर आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया तथा श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष लगाए।