हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। यमुना की अविरलता और निर्मलता के संकल्प के साथ चल रही “यमुना अविरल–निर्मल पदयात्रा” ने आगरा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार किया,जहाँ जल सहेलियों ने लोगों से अपनी नदी को बचाने के लिए आगे आने की अपील की। बुंदेलखंड के प्रख्यात जल-संरक्षक और “बुंदेलखंड के जलपुरुष” के नाम से प्रसिद्ध डॉ. संजय सिंह के नेतृत्व में जल सहेली समिति की यह यात्रा पचनद से दिल्ली के बसुदेव घाट की ओर निरंतर आगे बढ़ रही है।
इस दौरान डॉ.संजय सिंह ने कहा कि यमुना केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति,आस्था और जीवन का आधार है। यदि समाज स्वयं जिम्मेदारी नहीं लेगा, तो नदी को बचाना कठिन हो जाएगा। उन्होंने आगरा के लोगों से जल संरक्षण,प्रदूषण रोकने और नदी किनारों की स्वच्छता बनाए रखने में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। उनकी यह पहल “जल सहेली संगठन” ने ग्रामीण महिलाओं को जल प्रबंधन की अग्रिम पंक्ति में खड़ा किया है। जल सहेली संगठन के माध्यम से बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में तालाब पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और सामुदायिक जल प्रबंधन का सफल मॉडल तैयार किया गया है, जिससे हजारों लोगों को लाभ मिला है। यही अनुभव अब यमुना संरक्षण अभियान में भी दिखाई दे रहा है, जहाँ जल सहेलियाँ गाँव-गाँव जाकर जनसंवाद कर रही हैं और जल जागरूकता फैला रही हैं।
जल सहेली संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पा कुशवाहा ने यमुना की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “यमुना के संरक्षण के लिए आगरा वासियों को आगे आने की ज़रूरत है। यमुना को बचाने के लिए निजी सुविधा और स्वार्थ छोड़ना होगा।”
उन्होंने कहा, “यमुना की दुर्दशा देखकर हम सभी जल सहेलियाँ बेहद दुखी हैं। यमुना के कारण ही आगरा में ताजमहल बना है, लेकिन आज उसी यमुना की हालत बहुत खराब हो चुकी है।”
उन्होंने आगे कहा कि “नदियों के लिए बहुत सी नीतियाँ बन चुकी हैं, लेकिन अब केवल नीति नहीं बल्कि सख्त कानून (एक्ट) बनने चाहिए, ताकि नदियों का वास्तविक संरक्षण सुनिश्चित हो सके।”
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि “आज यमुना ICU में पहुंच गई है। जिस तरह हम जल सहेलियाँ अपने घर-परिवार छोड़कर नदी बचाने के लिए पदयात्रा कर रही हैं, उसी तरह आगरा के लोगों को भी खड़े पानी,प्रदूषण और नदी की बिगड़ती हालत को सुधारने के लिए आगे आना होगा।”
इसी क्रम में आगरा के हाथी घाट पर जल सहेलियों द्वारा भव्य यमुना आरती का आयोजन किया गया। श्रद्धा और अनुशासन के साथ यमुना मैया का पूजन किया गया, दीप प्रज्ज्वलित किए गए और अविरल–निर्मल यमुना का सामूहिक संकल्प लिया गया। स्थानीय नागरिकों, युवाओं और सामाजिक संगठनों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर नदी संरक्षण की शपथ ली।
जल सहेलियों ने बताया कि यह पदयात्रा केवल एक अभियान नहीं, बल्कि समाज को जल के प्रति जिम्मेदार बनाने का प्रयास है। यात्रा के दौरान जल सहेलियाँ यमुना के किनारे श्रमदान भी कर रही हैं, सहायक नदियों की स्थिति का अध्ययन कर रही हैं और लोगों को जल संरक्षण के पारंपरिक तरीकों से जोड़ रही हैं। उन्होंने कहा कि कभी यमुना नदी की अविरलता और निर्मलता को देखकर ही ताजमहल का निर्माण इसके किनारे किया गया था, लेकिन आज नदी की स्थिति चिंता का विषय बन चुकी है।
इस अवसर पर पंडित अश्वनी मिश्रा , डॉ. धीरज मोहन सिंघल, सुधीर पचौरी, अशोक अग्रवाल, अनिल मिश्रा, मुकेश शर्मा, राजेश अग्रवाल,अनिल शर्मा, असलम सलीमी, राजेश कुमार नमामि ,पार्षद अनुज शर्मा, गंगे के DPO शुभम सक्सेना एवं महेश शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
यात्रा आगे भी विभिन्न स्थानों पर जनसंवाद,जल आरती और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जोड़ती हुई दिल्ली की ओर बढ़ेगी।
रिपोर्ट : असलम सलीमी






