पं.अर्नब के साथ दिल्ली के दुर्जेय भौमिक ने तबला,आगरा के पंडित टी. रविन्द्र ने संवादिनी पर की प्रभावशाली संगत, युवा गायक सागर जग्गी और संगीतालय के शिष्यों ने भी बांधा समां
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा : केंद्रीय हिंदी संस्थान में 3 अप्रैल की शाम अदभुत रही,जहां शास्त्रीय संगीत के कलाकारों ने अपनी एक से बढ़कर एक प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। गुरुवर संगीत समारोह 2026 बेशक यादगार समारोह रहा। जिसमें कलाकारों ने मंचीय प्रस्तुतियों से शास्त्रीय संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर लिया। यह संध्या शास्त्रीय संगीत की समर्पण, गुरु-शिष्य परंपरा और युवा प्रतिभाओं के उत्कर्ष का प्रतीक रही। इस समारोह को 1944 से निरंतर शास्त्रीय संगीत के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित भारतीय संगीतालय द्वारा आयोजित किया गया, जो संस्थापक पं. गोपाल लक्ष्मण गुणे, पं. पुरुषोत्तम माधव पालखे तथा पं. सीताराम व्यवहारे सरीखे संगीत जगत के लब्ध प्रतिष्ठित गुरुजनों के सांगीतिक योगदान को स्मरण करते हुए उनको समर्पित किया गया था।
समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल वर्मा थे। अध्यक्षता सेवानिवृत्त IPS अधिकारी बबीता साहू द्वारा की गई। संस्था के संरक्षक एवं वरिष्ठ संगीतज्ञ पं.नरेश मल्होत्रा द्वारा इस प्रकार के सांगितिक अनुष्ठानो की आवश्यकता एवं समाज के सुनिर्माण में शास्त्रीय संगीत की महत्ता पर प्रकाश डाला। संस्था के सचिव अशोक राव करमरकर ने संस्थान की भावी सांगीतिक कार्य योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए अपने भाव प्रकट किए। उन्होंने संस्था के पदाधिकारियों की ओर से शास्त्रीय संगीत के प्रति अपने प्रेम और समर्पण को और मजबूत करने का संकल्प लिया। प्रधानाचार्य गजेंद्र सिंह चौहान ने स्वागत भाषण दिया। संध्या की शुरुआत में संस्था के संरक्षक स्व. कुंवर चन्द भूषण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
समारोह में कोलकाता से पधारे देश के सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पं.अर्नब चटर्जी ने मनमोहक प्रस्तुति से श्रोताओं का दिल जीत लिया। पं. अर्नब ने अपनी प्रस्तुति में आध्यात्मिक ऊर्जा का श्रोत माने जाना वाला राग रागेश्री में विलम्बित ख्याल आज मिल रघुनाथ दाता,आनंद बधावा..." जो विलम्बत एक ताल में निबंध रचना थी, से अपना गायन प्रारंभ किया- तीन ताल मध्य लय में "सुन्दर नवेली नार ,कर श्रृंगार... बन्दिश के उपरान्त द्रुत एक ताल में भगवान कृष्ण की राधा संग बरजोरी को दर्शाती बन्दिश "देखो श्याम गहलीनो बैया मोरी ,आली..." की भावपूर्ण प्रस्तुति के साथ राग श्री का अत्यंत सौम्य और प्रभावशाली समापन किया। तत्पश्चात ऋतुओं के राजा राग बहार के माध्यम से उन्होंने प्रकृति में नव ऊर्जा और उल्लास का अद्भुत संचार किया। “सकल बन फूल रहे सरसों ,करसूं ले जैयो घरवा...” जैसी मनोहारी बंदिश की सुंदर प्रस्तुति ने श्रोताओं के मन को प्रफुल्लित कर दिया। अपनी प्रस्तुति के अंतिम चरण में राग खमाज की ठुमरी “प्रेम अगनवा जिया जलावे...” के माध्यम से कलाकार ने भावों की गहराई को स्पर्श करते हुए श्रोताओं के हृदय में प्रेम और अनुराग की तरंगें उत्पन्न कर दीं।
संपूर्ण गायन ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर उन्हें रससिक्त संगीत की अनुभूति से सराबोर कर दिया। जिससे वातावरण संगीत और अध्यात्म की मिली-जुली झंकार से गूंज उठा। दिल्ली से आए ख्याति प्राप्त तबला वादक दुर्जेय भौमिक ने गंभीर और अति संतुलित संगत की, जिससे राग की गहराई और भी बढ़ गई, संवादिनी पर मधुर संगत पंडित टी. रविन्द्र द्वारा की जा रही थी, जिनके पानी पर बूँदों जैसे हारमोनियम पर उनकी उँगलियां अत्यन्त चंचल और मधुर रसावृष्टि कर रही थीं।
कार्यक्रम में स्थानीय युवा कलाकार सागर जग्गी ने भी शास्त्रीय गायन से सबको प्रभावित किया, राग शुद्ध कल्याण में उनकी मधुर आवाज़ ने श्रोताओं के दिलों में गहरा असर छोड़ा। उनके साथ तबला पर हरिओम माहौर एवं संवादीनी पर डॉ. राहुल निवेरिया द्वारा सफल संगत की गई। कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय संगीतालय के 50 छात्र-छात्राओं द्वारा राग हेमंत में स्वरबद्ध एक सुंदर 'सरस्वती वंदना' से की गई, जिसमें डॉ. भानु प्रताप सिंह ने तबला संगत एवं डॉ. वंदना वरुण ने हारमोनियम संगत की, जिसने इस पूरे कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ कराया।
समारोह में मंच संचालन लीना परमार ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम की सह संयोजिका संजीवनी द्वारा किया गया। मीडिया समन्वयक डॉ. महेश धाकड़ के मुताबिक कार्यक्रम में प्रतिष्ठित संगीतकार, बुद्धिजीवी, कला मर्मज्ञ विद्वान एवं समाजसेवी विभूतियाँ उपस्थित रहीं।
इनमें प्रमुख रूप से बैकुंठी देवी डिग्री कॉलेज की अवकाश प्राप्त विभागाध्यक्ष डॉ.अमिता त्रिपाठी, विलास पालखे, वीना छाबड़ा, राज बहादुर राज, यतेन्द्र सोलंकी, ललित कला अकादमी की सदस्य आभा सिंह गुप्ता, रितु-रजनीश खण्डेलवाल, ठा. विजय पाल सिंह एडवोकेट, पं. देवाशीष चक्रवर्ती, पं. सदानंद ब्रह्मभट्ट, प्रतिभा तलेगांवकर, प्रहलाद, डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव, रवि अग्रवाल, प्रार्थना, ललिता आहूजा, गीता मलहोत्रा, परमानंद और अरविंद दोहरे डॉ कृष्ण कुमार सिंह (के के सिंह), अजय शर्मा अजेय आदि शामिल रहे।



