ईस्टर-पूर्व का पवित्र बृहस्पतिवार श्रद्धा,भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास से आयोजित



हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। ईसाई पंचांग के पवित्र सप्ताह के अंतर्गत आने वाला ईस्टर-पूर्व का बृहस्पतिवार,जिसे पवित्र बृहस्पतिवार (मॉंडी थर्सडे) के रूप में भी जाना जाता है। शहर के समस्त गिरजाघरों में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया।

 इस पावन अवसर पर प्रभु यीशु मसीह द्वारा अपने अंतिम भोज के दौरान स्थापित किए गए परम प्रसाद (पवित्र यूखारिस्ट) एवं पुरोहिताई (पुरोहितिक सेवा) के पवित्र संस्कारों को विशेष रूप से स्मरण किया गया।

इस दिन का धार्मिक महत्व अत्यंत गहन है, क्योंकि यही वह अवसर है जब प्रभु यीशु मसीह ने अपने शिष्यों के साथ अंतिम भोज ग्रहण करते हुए उन्हें प्रेम, सेवा एवं त्याग का अमर संदेश दिया। इसी क्रम में उन्होंने अपने 12 शिष्यों के पैर धोकर विनम्रता, समानता एवं सेवा-भाव का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया, जो आज भी समस्त मानवता के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है। निष्कलंक माता महागिरजाघर,आगरा में आयोजित विशेष प्रार्थना सभा (मिस्सा बलिदान) अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई।

 इस अवसर पर महाधर्माध्यक्ष आर्चबिशप डॉ.राफी मंजलि जी ने अपने प्रवचन में कहा कि पवित्र बृहस्पतिवार हमें यह सिखाता है कि सच्ची महानता सेवा में निहित होती है। उन्होंने कहा कि प्रभु यीशु मसीह ने अपने शिष्यों के पैर धोकर यह संदेश दिया कि हमें अपने जीवन में अहंकार, द्वेष एवं स्वार्थ को त्यागकर प्रेम, करुणा और सेवा का मार्ग अपनाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में जब समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब प्रभु यीशु का यह संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है। प्रार्थना सभा के दौरान 12 शिष्यों के पैर धोने की परंपरा को विशेष विधि-विधान,धार्मिक अनुशासन एवं गरिमा के साथ निभाया गया। इस आध्यात्मिक दृश्य को देखकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और अनेक लोगों की आंखें श्रद्धा एवं भावनाओं से नम हो गईं। 

इस अवसर पर गिरजाघर का संपूर्ण वातावरण भक्ति,शांति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत दिखाई दिया।कार्यक्रम में फादर राजन दास, फादर मिरांडा एवं फादर शाजी की गायक मंडली द्वारा प्रस्तुत भजनों एवं स्तुतिगान ने उपस्थित जनसमूह को गहन आध्यात्मिक अनुभूति कराई। प्रभु-भक्ति से परिपूर्ण इन मधुर गीतों ने वातावरण को और अधिक पवित्र एवं भक्तिमय बना दिया, जिससे श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति एवं प्रभु के सान्निध्य का अनुभव हुआ। प्रतापपुर स्थित सेंट मैरी चर्च में भी पवित्र बृहस्पतिवार के उपलक्ष्य में विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। यहां फादर विंसेंट द्वारा 12 शिष्यों के पैर धोने की परंपरा को विधिवत रूप से संपन्न किया गया, जो प्रभु यीशु के सेवा एवं विनम्रता के संदेश का जीवंत प्रतीक है। वहीं फादर बाबिन राइसोन ने पवित्र बाइबिल से पाठ करते हुए इस दिन के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व को विस्तार से समझाया। तत्पश्चात फादर रोगिमोन थॉमस द्वारा संपूर्ण धार्मिक विधियों को पूर्ण कराया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने गहरी आस्था एवं श्रद्धा के साथ भाग लिया।

इस अवसर पर पल्ली पुरोहित फादर जोसेफ डाबरे के साथ फादर संतोष डी’सा, फादर जॉन एवं फादर स्वप्निल भी विशेष रूप से उपस्थित रहे तथा उन्होंने श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया।शहर के विभिन्न गिरजाघरों में आयोजित इन प्रार्थना सभाओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सभी ने प्रभु यीशु मसीह के जीवन, उनके उपदेशों एवं उनके द्वारा दिए गए प्रेम, सेवा एवं त्याग के संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।

क्रिश्चियन समाज सेवा सोसायटी के अध्यक्ष डेनिस सिल्वेरा ने इस अवसर पर कहा कि पवित्र बृहस्पतिवार ईसाई धर्म के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। यह हमें सिखाता है कि सच्चा धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि दूसरों की सेवा,जरूरतमंदों की सहायता एवं मानवता के प्रति समर्पण में निहित है। 

रिपोर्ट : असलम सलीमी