5 मई जयंती विशेष : नारी सशक्तिकरण के प्रेरक थे सेठ अचल सिंह

- स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख सेनानी, पांच बार लोकसभा सदस्य रहे

हिन्दुस्तान वार्ता। ✍️ आदर्श नंदन गुप्ता,वरिष्ठ पत्रकार

आगरा। स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी सेनानी एवं स्वाधीन भारत में पांच बार लोकसभा सदस्य रहे सेठ अचल सिंह न केवल एक कुशल राजनेता थे, बल्कि समाज सुधार और नारी सशक्तिकरण के प्रबल समर्थक भी थे। उनकी जयंती (05 मई) के अवसर पर शहरवासी उन्हें श्रद्धा के साथ स्मरण कर रहे हैं।

रोशन मोहल्ला,आगरा में 05 मई 1895 को जन्मे सेठ अचल सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने कई आंदोलनों का नेतृत्व किया और अनेक बार जेल यात्राएं कीं। उनकी धर्मपत्नी भगवती देवी जैन भी इस संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहीं। वे पर्दा प्रथा की विरोधी थीं और महिलाओं की शिक्षा के लिए उन्होंने अपने आभूषण एवं संचित धन (लगभग ढाई लाख रुपये) दान में देकर बालिका विद्यालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।

29 जनवरी 1941 को स्थापित यह विद्यालय प्रारंभ में प्राथमिक स्तर से शुरू हुआ, जो 1949 में जूनियर हाईस्कूल, 1954 में इंटर कॉलेज और आगे चलकर भगवती देवी जैन डिग्री कॉलेज के रूप में विकसित हुआ। आज भी यह संस्थान महिला शिक्षा का प्रमुख केंद्र है।

सेठ अचल सिंह का राजनीतिक जीवन भी अत्यंत प्रभावशाली रहा। उन्हें पंडित मोतीलाल नेहरू द्वारा कांग्रेस की सदस्यता प्रदान की गई थी। 1927 में साइमन कमीशन के विरोध, 1930 के सत्याग्रह, 1940 के व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई। ‘करो या मरो’ के इस आंदोलन में उन्होंने विभिन्न स्थानों पर नेतृत्व किया और लगभग ढाई वर्ष की जेल सजा भुगती।

जेल जीवन को उन्होंने आत्मविकास का माध्यम बनाया। इस दौरान उन्होंने ‘सफल साधना’ और ‘जेल में मेरा जैनाभ्यास’ जैसी पुस्तकों की रचना की। इसके अतिरिक्त उन्होंने ‘ओसवाल उद्धारक’, ‘पशु सेवक’, ‘सिंहनाद’ और ‘सेवक’ जैसे समाचार पत्रों का संपादन भी किया।

स्वतंत्रता के बाद भी वे समाज और राजनीति में सक्रिय रहे तथा पांच बार लोकसभा सदस्य के रूप में जनता की सेवा की। आगरा के दरेसी स्थित ‘अचल भवन’ आज भी उनकी स्मृतियों का सजीव प्रतीक है। 20 दिसंबर 1983 को उनका निधन हो गया, किंतु उनके विचार और कार्य आज भी प्रेरणा देते हैं।

वर्जन -

नैतिकता का दिया संदेश :

सेठ अचल सिंह ने अपने जीवन में नैतिक मूल्यों का पालन किया और समाज को भी इसके लिए प्रेरित किया। अचल ट्रस्ट द्वारा प्रतिवर्ष शहर के नैतिक एवं सदाचारी व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाता है।

- राजीव अग्रवाल, मंत्री,अचल ट्रस्ट,आगरा


मथुरा रिफाइनरी स्थापना में अहम भूमिका :

सेठ अचल सिंह की इच्छा थी कि रिफाइनरी आगरा में स्थापित हो, लेकिन ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से यह संभव नहीं था। इसके बाद उनके प्रयासों से मथुरा में रिफाइनरी स्थापित कराई गई।

-मनोज बोहरा, प्रपौत्र एवं सदस्य,उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी