12 मई को सुप्रीम कोर्ट में तय होगी राज्यों की जवाबदेही : एड.के.सी.जैन
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
नई दिल्ली/आगरा। देश में सड़क सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब बिना वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) सक्रिय हुए किसी भी वाहन को प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (पीयूसीसी) और फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाएगा। यह स्पष्ट निर्देश सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के 19 दिसंबर 2025 के परिपत्र में दिए गए हैं।
हर प्रक्रिया में अनिवार्य होगा वीएलटीडी :
सरकार ने वाहन के पूरे जीवनचक्र—पंजीकरण, नवीनीकरण और स्वामित्व हस्तांतरण को वीएलटीडी से जोड़ दिया है।
1 जनवरी 2026 से नए और पुराने वाहनों में इसकी जांच अनिवार्य
1 अप्रैल 2026 से पीयूसीसी और फिटनेस से पहले वीएलटीडी सक्रिय होना जरूरी
राष्ट्रीय परमिट के लिए भी पहले से लागू अनिवार्यता जारी :
यदि वाहन में वीएलटीडी सक्रिय नहीं पाया गया,तो उसे सड़क पर चलाना गैरकानूनी माना जाएगा।
कागजों में नियम,जमीन पर लापरवाही :
केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली के नियम 125एच के तहत पहले ही सार्वजनिक सेवा वाहनों और राष्ट्रीय परमिट वाहनों में वीएलटीडी व पैनिक बटन अनिवार्य किए जा चुके हैं। बावजूद इसके, कई राज्यों में इन नियमों का पालन बेहद कमजोर रहा है। मंत्रालय ने स्वयं माना है कि वीएलटीडी की सक्रियता बहुत कम है, जिससे साफ है कि नियमों का क्रियान्वयन प्रभावी नहीं हुआ।
यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा अहम कदम.
वीएलटीडी और पैनिक बटन केवल तकनीकी उपकरण नहीं,बल्कि यात्रियों की सुरक्षा की महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
रियल टाइम लोकेशन ट्रैकिंग संभव.
आपात स्थिति में तुरंत मदद.
महिला यात्रियों की सुरक्षा में विशेष भूमिका ।
विशेषज्ञों का कहना है कि पैनिक बटन सक्रिय होने पर आपात स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचना मिल सकती है, जिससे कई गंभीर घटनाओं को रोका जा सकता है।
राज्यों की जवाबदेही पर उठे सवाल :
सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में सामने आया है कि कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस दिशा में लापरवाही बरती है। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के साथ समझौता भी है।
सुप्रीम कोर्ट में 12 मई को सुनवाई :
इस मुद्दे पर अब न्यायिक स्तर पर भी सख्ती दिख रही है। 12 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होगी। यह याचिका वरिष्ठ अधिवक्ता के.सी. जैन द्वारा दायर की गई है, जिसमें राज्यों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।
सड़क सुरक्षा विकल्प नहीं,अधिकार है :
अधिवक्ता के.सी. जैन ने कहा कि यह केवल नियमों का विषय नहीं, बल्कि आम जनता की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को केवल नियम बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनका सख्ती से पालन भी सुनिश्चित करना होगा।
सरकार के नए नियमों से अब वाहन मालिकों को सतर्क रहना होगा। बिना वीएलटीडी सक्रिय कराए न तो जरूरी दस्तावेज मिलेंगे और न ही वाहन कानूनी रूप से सड़क पर चल पाएगा। यह कदम सड़क सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रिपोर्ट : असलम सलीमी

