बुद्ध पूर्णिमा पर आयोजित कार्यक्रम में आध्यात्मिक जागरण और सामाजिक चिंतन का संदेश
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर विप्र फाउंडेशन एवं तारक सेवा संस्था के संयुक्त तत्वावधान में “श्री भगवान परशुराम : शब्द स्वर वंदन” कार्यक्रम का आयोजन संस्कृति भवन, ललित कला संस्थान में किया गया। कार्यक्रम में संगोष्ठी, काव्य-पाठ और भजन संध्या के माध्यम से सनातन संस्कृति, आध्यात्मिकता और सामाजिक मूल्यों पर गहन चिंतन हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. बल्देव भाई शर्मा, मुख्य वक्ता महंत योगेश पुरी, प्रो.लवकुश मिश्रा एवं संगीतज्ञ मधुकर चतुर्वेदी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तारक सेवा संस्था के अध्यक्ष प्रो. उमापति दीक्षित ने काशी विश्वनाथ के मंगलाचरण से कार्यक्रम की आध्यात्मिक शुरुआत कराई।
मुख्य वक्ता महंत योगेश पुरी ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि भारत ऋषि और कृषि परंपरा का देश है, लेकिन आज भौतिकवाद की दौड़ में लोग अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने भगवान परशुराम को समस्त मानवता का आदर्श बताते हुए उन्हें किसी एक वर्ग तक सीमित करने की धारणा को गलत बताया।
उन्होंने युवाओं को धर्म और संस्कृति से जोड़ने पर जोर देते हुए कहा कि “शिक्षित व्यक्ति भटक सकता है,लेकिन धर्म से दीक्षित व्यक्ति नहीं।” साथ ही उन्होंने पारिवारिक संस्कार, ज्ञान और सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत समाज की आधारशिला बताया।
मुख्य अतिथि प्रो.बल्देव भाई शर्मा ने पढ़ने-लिखने की घटती प्रवृत्ति पर चिंता जताई और गहन अध्ययन की आवश्यकता बताई। प्रो.लवकुश मिश्रा ने कर्तव्यनिष्ठा और वास्तविक ज्ञान के महत्व पर बल दिया, वहीं मधुकर चतुर्वेदी ने वेद-उपनिषदों के आधार पर ब्राह्मणत्व की व्याख्या की।
काव्य एवं भजन से सजा माहौल :
कार्यक्रम में डॉ. रुचि चतुर्वेदी और सचिन दीक्षित ने काव्य-पाठ के माध्यम से श्रद्धा व्यक्त की। संतोष तिवारी की भजन प्रस्तुति ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम का संचालन पदम गौतम ने किया।
इनकी रही उपस्थिति :
कार्यक्रम में डॉ. मनोज पांडेय, डॉ. अजीत कुमार पांडे, बृजेश चतुर्वेदी, प्रभु दत्त उपाध्याय, अशोक गोयल, जितेंद्र फौजदार, मोनिका तिवारी, आचार्य उमाशंकर पाराशर सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


