हिन्दुस्तान वार्ता। ✍️ जितेन्द्र बच्चन,वरिष्ठ पत्रकार
हर वर्ष 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मीडिया की स्वतंत्रता की रक्षा करना, पत्रकारों के योगदान को सम्मान देना और उन पत्रकारों को श्रद्धांजलि अर्पित करना है जिन्होंने अपने कर्तव्य निभाते हुए प्राणों की आहुति दी। दुर्भाग्य से, यह दिवस कई बार औपचारिकता बनकर रह जाता है। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, अक्सर इस महत्वपूर्ण विषय पर गंभीर विमर्श का अभाव दिखाई देता है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय है।
इस वर्ष की थीम ‘पत्रकारिता : नई तकनीक (एआई) और मानवाधिकारों के समन्वय’ है, जो वर्तमान समय की जटिल चुनौतियों को रेखांकित करती है। डिजिटल युग में सूचना का प्रसार अत्यंत तीव्र हो गया है, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ने इसे और अधिक प्रभावशाली बना दिया है। ऐसे में पत्रकारिता की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वह सटीक, सत्यापित और संतुलित जानकारी जनता तक पहुंचाए। एक छोटी-सी त्रुटि भी व्यापक भ्रम फैला सकती है, जिससे न केवल समाज बल्कि लोकतंत्र की नींव भी प्रभावित होती है।
लोकतंत्र में मीडिया को ‘चौथा स्तंभ’ कहा जाता है, क्योंकि यह सत्ता पर निगरानी रखता है, जनमत का निर्माण करता है और शासन को जवाबदेह बनाता है। लेकिन आज के दौर में निष्पक्ष पत्रकारिता कई चुनौतियों से जूझ रही है। राजनीतिक दबाव, कॉर्पोरेट स्वामित्व, विज्ञापन आधारित मॉडल और भय का माहौल पत्रकारों की स्वतंत्रता को प्रभावित कर रहा है। यही कारण है कि भारत की स्थिति विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में चिंताजनक बनी हुई है।
वर्तमान परिदृश्य में मीडिया का एक हिस्सा निष्पक्षता से भटककर एजेंडा आधारित पत्रकारिता की ओर बढ़ रहा है। कई बार पत्रकारों को डराने-धमकाने, झूठे मुकदमों में फंसाने और हिंसा का शिकार बनाने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। आर्थिक निर्भरता भी एक बड़ा कारण है, जिसके चलते कई बार सच्चाई को दबा दिया जाता है। इससे जनता का विश्वास कमजोर होता है, जो किसी भी लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
इसके बावजूद, यह भी सच है कि आज भी अनेक पत्रकार पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। वे तमाम दबावों के बावजूद सच्चाई को सामने लाने का साहस रखते हैं। ऐसे पत्रकार ही लोकतंत्र की असली ताकत हैं और समाज के लिए प्रेरणा स्रोत भी।
आवश्यकता इस बात की है कि सरकार और समाज दोनों पत्रकारिता की स्वतंत्रता के महत्व को समझें। मीडिया को नियंत्रित करने या उसे प्रभावित करने के प्रयास अल्पकालिक लाभ दे सकते हैं, लेकिन दीर्घकाल में यह लोकतंत्र को कमजोर करते हैं। एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और सशक्त मीडिया ही स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है।
अंततः यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम स्वतंत्र पत्रकारिता का समर्थन करें और उसे संरक्षित रखें। क्योंकि जब मीडिया स्वतंत्र रहेगा, तभी लोकतंत्र मजबूत रहेगा और तभी ‘चौथा स्तंभ’ अडिग बना रहेगा

