हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
थिम्पू। भारत और भूटान ने थिम्पू में आयोजित 5वीं भारत-भूटान विकास सहयोग वार्ता (प्लान टॉक्स) के दौरान भूटान की 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-2029) के तहत जारी 100 अरब रुपये की विकास परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा की। भूटान के विदेश सचिव पेमा लेक्तुप दोरजी के निमंत्रण पर पहुंचे भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने द्विपक्षीय रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
मिसरी की इस दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान भारत और भूटान के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा यात्रा के दौरान, विदेश सचिव मिसरी ने महामहिम राजा से मुलाकात की। उन्होंने दाशो शेरिंग तोबगे (प्रधानमंत्री) और ल्योंपो डी.एन. ढुंगेल (विदेश और बाहरी व्यापार मंत्री) से भी भेंट की। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं पर चर्चा की, जिसमें विकास साझेदारी, ऊर्जा, व्यापार और निवेश, कनेक्टिविटी, लोगों के बीच आपसी संबंध और आपसी महत्व के अन्य क्षेत्रीय मुद्दे शामिल थे।
मंत्रालय ने बताया कुल 12 नई पीटीए परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनकी कुल लागत 332 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं में बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शहरी सुविधाएं और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसके साथ ही, 13वीं पंचवर्षीय योजना के तहत कुल 82 पीटीए परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनकी कुल लागत 6,860 करोड़ रुपये है। भारत सरकार ने ईएसपी के लिए 1,250 करोड़ रुपये, एचआईसीडीपी के लिए 735.20 करोड़ रुपये और प्रोग्राम ग्रांट के लिए 200 करोड़ रुपये जारी किए हैं। बैठक में इन फंड के इस्तेमाल में हुई प्रगति की समीक्षा की गई।
इसके अलावा दोनों विदेश सचिवों ने पीटीए प्रोजेक्ट "थिम्पू में ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और ओपन स्पेस" के तहत बने थिम्पू इकोलॉजिकल पार्क और ओलाखा पार्क का वर्चुअल उद्घाटन किया। इसके अलावा, पीटीए प्रोजेक्ट "भूटान में ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देना" के तहत खरीदे गए 45 इलेक्ट्रिक वाहन भी भूटान को सौंपे गए।
भारत अपनी 'पड़ोसी प्रथम' नीति के तहत भूटान के समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण भूटान की पंचवर्षीय योजना के लिए भारत सरकार द्वारा दी जा रही भारी विकास सहायता से साफ दिखाई देता है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)


