क्रिटिकल मिनरल्स चेन मजबूत करने में जुटा भारत, 11 देशों से हुआ करार




हिन्दुस्तान वार्ता।ब्यूरो

 नई दिल्ली। भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए भारत ने क्रिटिकल मिनरल्स (अहम खनिज) की सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। भारत ने इस क्षेत्र में सहयोग के लिए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी और जापान सहित 11 प्रमुख देशों के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय साझेदारी और सहयोग समझौते किए हैं। यह जानकारी विदेश राज्य मंत्री पाबित्रा मार्गेरिटा ने राज्य सभा में एक लिखित उत्तर के दौरान साझा की।

राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने सरकार से क्लीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस प्रोडक्शन के लिए ज़रूरी अहम खनिजों तक पहुंच सुनिश्चित करने को लेकर सवाल किया था। इसका जवाब देते हुए विदेश राज्य मंत्री मार्गेरिटा ने कहा अहम खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को बेहतर बनाने के लिए सहयोगी देशों और संबंधित अंतरराष्ट्रीय पहलों के साथ जुड़ रही है, जिसमें रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी से संबंधित सहयोग, उच्च गुणवत्ता वाले खनिजों तक दीर्घकालिक पहुंच सुनिश्चित करना और भरोसेमंद आपूर्ति के लिए टिकाऊ तरीकों को बढ़ावा देना शामिल है। भारत अहम खनिजों की वैल्यू चेन में रिसर्च और डेवलपमेंट तथा निवेश में सहयोग बढ़ाने की पहलों का भी हिस्सा है।

विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार राज्य मंत्री ने आगे कहा, इस संबंध में अहम खनिजों तक भरोसेमंद पहुँच सुनिश्चित करने के लिए ऑस्ट्रेलिया, अर्जेन्टीना, ब्राज़ील, फ्रांस, जर्मनी, पेरू, जापान, ज़ाम्बिया, मोज़ाम्बिक, मंगोलिया और अमेरिका जैसे देशों के साथ साझेदारी और सहयोग समझौते किए गए हैं। भारत मिनरल सिक्योरिटी पार्टनरशिप (एमएसपी)/ फोरम ऑन रिस्पॉन्सिबल जियोस्ट्रेटेजिक एंगेजमेंट और अहम खनिजों पर क्वाड फ्रेमवर्क जैसी बहुपक्षीय पहलों का भी हिस्सा है।

मार्गेरिटा ने संसद को बताया कि सरकार दीर्घकालिक खनिज सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपाय कर रही है, जिसमें कचरे से खनिजों की रीसाइक्लिंग, टेक्नोलॉजी शेयरिंग और अहम खनिजों से संबंधित सहयोगी रिसर्च प्रयास शामिल हैं। उन्होंने कहा सरकार ने 'नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन' शुरू किया है, जिसका उद्देश्य अहम खनिजों की दीर्घकालिक टिकाऊ आपूर्ति सुनिश्चित करना और खोज, खनन, बेनिफिसिएशन, प्रोसेसिंग और इस्तेमाल के बाद के उत्पादों से रिकवरी को कवर करते हुए अहम खनिज वैल्यू चेन को मज़बूत करना है।

लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स (दुर्लभ पृथ्वी तत्व) जैसे क्रिटिकल मिनरल्स आधुनिक अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बैटरी, सौर पैनल, विंड टरबाइन, सेमीकंडक्टर, स्मार्टफोन और रक्षा उपकरणों के निर्माण में इनकी अनिवार्य आवश्यकता होती है। वर्तमान में वैश्विक स्तर पर इन खनिजों के खनन और प्रसंस्करण पर कुछ ही देशों का एकाधिकार है। भारत अपनी 'नेट-ज़ीरो' उत्सर्जन प्रतिबद्धताओं और घरेलू विनिर्माण को गति देने के लिए इन रणनीतिक खनिजों की निर्बाध आपूर्ति चाहता है, ताकि किसी भी वैश्विक भू-राजनीतिक व्यवधान का असर घरेलू उद्योगों पर न पड़े।

(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)