ईश्वर से प्रेम ही सच्चा आनंद, निस्वार्थ प्रेम सबसे अनमोल: जया किशोरी



राजदेवम में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ, भजनों पर झूमे श्रद्धालु; सात दिन की कथा में मिलेगा 'होमवर्क'

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। फतेहाबाद रोड स्थित राजदेवम में श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन प्रख्यात कथा वाचिका पूज्य जया किशोरी ने श्रद्धालुओं को कथा का महत्व बताते हुए कहा कि ईश्वर ही शाश्वत सत्य हैं और उनसे किया गया प्रेम ही जीवन का वास्तविक आनंद है। उन्होंने कहा कि संसार परिवर्तनशील है, जबकि ईश्वर हर परिस्थिति में अडिग और सत्य हैं। इसलिए मनुष्य को सदैव ईश्वर का ही आश्रय लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत के प्रथम श्लोक में महर्षि वेदव्यास ने ईश्वर के तीन स्वरूप—सत्य, चित और आनंद—का वर्णन किया है। गृहस्थ जीवन में सभी सुखों का आनंद लें, लेकिन ईश्वर को कभी न भूलें। ईश्वर से जुड़ा प्रेम ऐसा आनंद देता है, जो हर परिस्थिति में मनुष्य को प्रसन्न रखता है।

कथा के दौरान "गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो…", "श्याम प्यारे से जिसका संबंध है, उसको हर घड़ी आनंद ही आनंद है…" तथा "पार्वती बोली भोले से ऐसा महल बना देना…" जैसे भजनों पर श्रद्धालु भक्ति में सराबोर होकर झूम उठे।

जया किशोरी ने कहा कि सबसे कीमती वस्तु निस्वार्थ और अटल प्रेम है। सोना-चांदी या महंगी वस्तुएं हर किसी के पास हो सकती हैं, लेकिन बिना स्वार्थ और बार-बार न बदलने वाला प्रेम ही वास्तव में अनमोल होता है।

नारी शक्ति पर विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि समझदार महिला वही है, जिसे यह ज्ञान हो कि जीवन में कब लक्ष्मी, कब सरस्वती और कब दुर्गा या काली का स्वरूप धारण करना है। साथ ही उन्होंने कहा कि बच्चियों के मन में कभी भी कमजोरी का भाव नहीं आने देना चाहिए। कथा के समापन पर आरती हुई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

सात दिन की कथा बनेगी जीवन की पाठशाला :

जया किशोरी ने श्रद्धालुओं से कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए है। उन्होंने बताया कि सातों दिन कथा के बाद श्रद्धालुओं को "होमवर्क" दिया जाएगा। अगले दिन कथा शुरू होने से पहले पिछले दिन की कथा से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे, ताकि सभी कथा के संदेश पर मनन कर उसे जीवन में अपनाएं।

गलतियां करें, लेकिन एक गलती दोबारा न दोहराएं :

उन्होंने कहा कि मनुष्य से गलतियां होना स्वाभाविक है। नई चीज सीखने और करने में भूल हो सकती है, लेकिन एक ही गलती को बार-बार दोहराना उचित नहीं। यदि व्यक्ति बार-बार वही गलती कर रहा है तो वह आगे नहीं बढ़ रहा। इसलिए गलती से सीखें और उसे दोहराने से बचें।

इस अवसर पर मुख्य यजमान राजकुमार गुप्ता एवं राधा गुप्ता सहित आयोजन समिति के विकास मांगलिक, अनिल कुमार गुप्ता, विनीत मांगलिक, ऋषिक मांगलिक, अर्पित गुप्ता, आलोक अग्रवाल, संजय गुप्ता, मीतेश मित्तल, ऋषभ प्रताप, मोंटू भार्गव, संतोष शर्मा, रेखा गुप्ता, जयश्री मांगलिक, अंजू मांगलिक, तनु मांगलिक, आकांक्षा गुप्ता, अनीता गुप्ता, साक्षी गुप्ता, अर्चना गुप्ता, रेनू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।