'जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल',- मुकेश की स्मृति संध्या में गूंजे सदाबहार नगमे



हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक मुकेश की जयंती पर बुधवार को भोगीपुरा स्थित ग्रीन हाउस में स्मृति संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उनके व्यक्तित्व, गायकी के अनछुए पहलुओं पर चर्चा हुई और उनके सदाबहार गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ कुमारी पूजा तोमर की सरस्वती वंदना से हुआ। अतिथियों का स्वागत करते हुए चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि मुकेश हर पीढ़ी के गायक हैं और उनकी लोकप्रियता ही उनकी गायकी की सबसे बड़ी सफलता है।

दिनेश श्रीवास्तव ने मुकेश के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनका जन्म 22 जुलाई 1923 को हुआ था और 27 अगस्त 1976 को उनका निधन हुआ। उन्होंने वर्ष 1940 से शुरू हुए उनके संगीत सफर और उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए गीत "किसी राह में किसी मोड़ पर..." प्रस्तुत किया।

सुशील सरित ने मुकेश की गायकी के अनछुए पहलुओं पर चर्चा करते हुए बताया कि वे राज कपूर की आवाज बन गए थे,जबकि दिलीप कुमार के लिए उन्होंने मधुमति और यहूदी जैसी फिल्मों में तथा देव आनंद के लिए फिल्म विद्या में एकमात्र गीत "बहे ना कभी नैन से नीर" गाया। उन्होंने कुमारी पूजा तोमर के साथ "दिल तड़प-तड़प के कह रहा है, आ भी जा" की प्रस्तुति दी।

हरीश भदौरिया ने मुकेश को दर्द भरे गीतों का बेमिसाल गायक बताते हुए "आंसू भरी हैं ये जीवन की राहें" का उल्लेख किया। हरीश अग्रवाल ने फिल्म मिलन के गीतों को याद करते हुए "मुबारक हो सबको समां ये सुहाना..." प्रस्तुत किया।

सुधीर शर्मा ने मुकेश के चर्चित गीतों का स्मरण कराया और बताया कि उनकी प्रकाशित पुस्तक 'सिने पा' की चौथी वर्षगांठ है तथा अब तक इसकी लगभग 5000 प्रतियां वितरित की जा चुकी हैं। इस अवसर पर डॉ. रमेश आनंद ने एक ग़ज़ल प्रस्तुत की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुप्रसिद्ध गायक विजय गुप्ता ने कहा कि जब तक सुरों का संसार रहेगा, तब तक मुकेश का स्वर अमर रहेगा। उन्होंने भी उनके कई लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम का संचालन सुशील सरित ने किया तथा सुधीर शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर नीलेंद्र श्रीवास्तव, डॉ. नीरज स्वरूप, दिव्यांशी, अक्षय सहित अनेक संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।

रिपोर्ट : असलम सलीमी