अथक राजनयिक प्रयासों से घाना से सुरक्षित लौटे भारतीय नाविक

 


हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

 अकरा। घाना में पिछले कई महीनों से गंभीर संकट में फंसे मर्चेंट नेवी के 9 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। अकरा स्थित भारतीय उच्चायोग के अथक प्रयासों और त्वरित कूटनीतिक हस्तक्षेप के बाद सभी नाविकों को घाना के अकरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भारत के लिए सुरक्षित रवाना कर दिया गया। भारत सरकार और उच्चायोग की इस त्वरित कार्रवाई ने विदेशी धरती पर संकट में घिरे अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति देश की अटूट प्रतिबद्धता को एक बार फिर साबित किया है।

घाना स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा अकरा में भारतीय उच्चायोग ने नौ भारतीय क्रू सदस्यों की स्वदेश वापसी में मदद की। उच्चायोग ने एम/वी रहाफ मून के नौ भारतीय क्रू सदस्यों की स्वदेश वापसी में सफलतापूर्वक मदद की, जो कुछ समय से घाना में फंसे हुए थे।

उच्चायोग ने आगे कहा घाना मैरीटाइम अथॉरिटी, घाना पोर्ट्स एंड हार्बर्स अथॉरिटी और इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन (आईटीएफ) के सक्रिय सहयोग और मदद से, उच्चायोग ने समय पर सहायता सुनिश्चित की और 23 जुलाई 2026 को अकरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ज़रिए सभी क्रू सदस्यों की भारत सुरक्षित वापसी कराई। यह सफल वापसी विदेशी धरती और समुद्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, कल्याण और भलाई सुनिश्चित करने के प्रति भारत सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला समुद्री इतिहास में 'क्रू एबंडनमेंट' (जहाज के मालिक द्वारा क्रू को लावारिस छोड़ देना) का एक बेहद गंभीर उदाहरण था। ये सभी नाविक मालवाहक जहाज 'एम.वी रहाफ मून' पर तैनात थे, जो सेंट किट्स एंड नेविस के ध्वज तले पंजीकृत था। 

रिपोर्ट्स के अनुसार जहाज के मालिक ने 3 मार्च 2026 को घाना के तेमा बंदरगाह पर इस पोत और इसके चालक दल को पूरी तरह असहाय छोड़ दिया था। चालक दल में 9 भारतीयों के अलावा दो अज़रबैजानी और एक तुर्की नागरिक भी शामिल था। 

इसके अलावा, इन कर्मचारियों को पिछले चार महीनों से अधिक समय से वेतन का भुगतान भी नहीं किया गया था, जिससे उनके सामने गहरा आर्थिक और मानवीय संकट खड़ा हो गया था। लगभग 142 दिनों के लंबे और अनिश्चितता भरे इंतजार के बाद, आखिरकार भारतीय राजनयिकों की मदद से इन नाविकों के चेहरे पर खुशी लौटी है।

(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)