लता स्मृति संध्या में गूंजे स्वर साम्राज्ञी के सदाबहार गीत



हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। साहित्य संगीत संगम के तत्वावधान में स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर की जयंती के उपलक्ष्य में लता मंगेशकर स्मृति संध्या का आयोजन संस्था कार्यालय अयोध्या कुंज, आगरा में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती विजया तिवारी ने की।

कार्यक्रम में अतिथियों एवं उपस्थितजनों का स्वागत कुमारी दिव्यांशी चंद्रा ने किया। इस अवसर पर हरीश भदोरिया ने काव्य पंक्तियों के माध्यम से लता मंगेशकर को स्मरण करते हुए उनकी स्वर साधना को नमन किया।

कार्यक्रम में लता मंगेशकर द्वारा गाए सदाबहार गीतों की प्रस्तुतियों के माध्यम से उनकी संगीत यात्रा और स्वर साधना को याद किया गया। सुशील सरित ने लता मंगेशकर के प्रारंभिक फिल्मी सफर की जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने बसंत जोगलेकर की फिल्म कीर्ति हसाल के लिए पहला गीत गाया था, हालांकि यह गीत रिलीज नहीं हो सका। उन्होंने 13 वर्ष की उम्र में मंगला गौर फिल्म में अभिनय भी किया था। फिल्म महल के गीत ‘आएगा आने वाला’ से उन्हें व्यापक पहचान मिली।

संस्था अध्यक्ष प्रोफेसर आन्शवना सक्सेना ने लता मंगेशकर के गीत ‘आ जा रे परदेसी, मैं तो कब से खड़ी इस पार’ की प्रस्तुति से गीतांजलि का शुभारंभ किया। कुमारी पूजा तोमर ने ‘बार-बार तोहे क्या समझाएं’ तथा ‘पायल की झंकार, तेरे बिन साजन लागे न जियरा हमार’ प्रस्तुत किए। हरीश अग्रवाल ने ‘हजार बातें कहे जमाना, मेरी वफा पर यकीन रखना’ गीत सुनाया। सुशील सरित ने ‘वो जब याद आए, बहुत याद आए’ की प्रस्तुति दी। संगीत संयोजक पप्पू खान ने ‘तेरे बिना जिंदगी से शिकवा तो नहीं’ गीत प्रस्तुत कर समां बांध दिया।

कार्यक्रम में नीलू शर्मा, चंद्रशेखर शर्मा, शिवा, डॉ. रमेश आनंद, डॉ. असीम आनंद, हुकुम सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में संगीता सिंह ने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया

रिपोर्ट : असलम सलीमी