इं.हरिकिशोर तिवारी को टिकट मिलने से शिक्षक-कर्मचारियों में उत्साह


शिक्षक-कर्मचारी और सरकार के बीच सेतु की भूमिका निभाने का जताया भरोसा

हिन्दुस्तान वार्ता। धर्मेन्द्र कुमार चौधरी

लखनऊ, 29 सितंबर। उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष इं. हरिकिशोर तिवारी को आगरा स्नातक क्षेत्र से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का अधिकृत प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद शिक्षक और कर्मचारी संगठनों में उत्साह का माहौल है। टिकट की घोषणा की जानकारी मिलते ही राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद कार्यालय में बड़ी संख्या में पहुंचे शिक्षक-कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने इं. हरिकिशोर तिवारी का जोरदार स्वागत एवं अभिनंदन किया।

टिकट मिलने के बाद राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, घटक संघों, डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ, माध्यमिक शिक्षक, प्राथमिक शिक्षक, विशिष्ट बीटीसी सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने इं. तिवारी से मुलाकात कर उन्हें बधाई दी और चुनाव में हर स्तर पर सहयोग एवं प्रचार का भरोसा दिलाया। इस दौरान इं. तिवारी ने अपनी प्राथमिकताओं और आगामी कार्ययोजना से पदाधिकारियों को अवगत कराया।

इं.हरिकिशोर तिवारी का जन्म इटावा में हुआ। उन्होंने बीएससी तक की शिक्षा इटावा में प्राप्त की। इसके बाद हाथरस से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा ऑनर्स किया और टेक्निकल बोर्ड में उत्तर प्रदेश में नौवां स्थान प्राप्त किया। उन्होंने अर्थशास्त्र विषय से एमए प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया। इसके बाद उन्होंने राजकीय सेवा प्रारंभ की।

सरकारी सेवा में आने से पूर्व इं.तिवारी विद्यार्थी राजनीति में भी सक्रिय रहे। वर्ष 1978 से 1980 तक वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में हाथरस के जिला प्रमुख रहे। वर्ष 1983 में एमजी पॉलीटेक्निक, हाथरस में जनरल सेक्रेटरी के एकमात्र निर्वाचित पद पर चुने गए। वर्ष 1984 से 1986 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के इटावा जिलाध्यक्ष रहे।

इसके बाद लोक निर्माण विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर नियुक्त हुए। वर्ष 1986 से डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ से जुड़े और जनपद अध्यक्ष से लेकर क्षेत्रीय अध्यक्ष तक विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं। कानपुर क्षेत्र के अध्यक्ष के रूप में वर्ष 2008 तक करीब 22 वर्षों तक निर्विरोध निर्वाचित होते रहे। वर्ष 1993 से 1997 तक राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, इटावा के जिला मंत्री रहे।

वर्ष 2008 में डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय अध्यक्ष चुने गए। एफोडे के विभिन्न कार्यक्रमों में उन्होंने उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए श्रीलंका और बांग्लादेश की यात्राएं कीं। इसके अलावा नेपाल, चीन, मालदीव, दुबई, थाईलैंड, सिंगापुर और मलेशिया में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में भी भाग लिया। वर्ष 2005 में कैलाश मानसरोवर यात्रा में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2017 में इंजीनियर संघ के इतिहास में पहली बार उन्हें निर्विरोध प्रदेश अध्यक्ष चुना गया।

इं. तिवारी के अनुसार वर्ष 1990 से 2005 के बीच संघीय आह्वान पर कई आंदोलनों में भाग लिया और कई बार जेल भी गए। छह दिन तक आमरण अनशन जैसे कार्यक्रमों का नेतृत्व कर कर्मचारियों की पदोन्नति सहित विभिन्न मांगों के समाधान के लिए संघर्ष किया। इटावा में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष रहते हुए केंद्रीय संगठनों के साथ रेल रोको आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

विभागीय स्तर पर उत्कृष्ट कार्यों के लिए वर्ष 2005 में पहली बार एक कर्मचारी का नाम पद्मश्री पुरस्कार के लिए सरकार को भेजे जाने की पहल भी उनके कार्यकाल में हुई। विभिन्न वर्षों में उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें प्रशस्ति पत्र भी प्राप्त हुए।

सामाजिक गतिविधियों में भी इं. तिवारी की सक्रियता रही है। रक्तदान शिविर, दिव्यांगजनों के लिए लखनऊ में राष्ट्रीय विकलांग क्रिकेट टूर्नामेंट,जरूरतमंदों को कंबल वितरण, मेधावी छात्रों के सम्मान तथा समाज को जोड़ने के उद्देश्य से होली मिलन, दीपावली मिलन और भुजरिया मिलन समारोह जैसे कार्यक्रमों के आयोजन में उनकी भूमिका रही है। वे थियोसोफिकल सोसाइटी सहित विभिन्न शिक्षण संस्थाओं से भी जुड़े रहे हैं और ट्यूशन मुक्त तथा नकलविहीन शिक्षा के प्रयासों से जुड़े होने की बात कही गई है।

पारिवारिक रूप से भी उनका परिवार सैन्य सेवा से जुड़ा रहा है। उनके पुत्र निकुंज तिवारी और पुत्रवधू भारतीय सेना में मेजर पद पर कार्यरत हैं। पं. दीन दयाल उपाध्याय जागृति समिति के तत्वावधान में संचालित नारायण कॉलेज ऑफ साइंस एंड आर्ट्स, इटावा से भी उनका जुड़ाव बताया गया है।

भाजपा प्रत्याशी घोषित होने के बाद इं.हरिकिशोर तिवारी ने कहा कि वह अपनी लंबे समय की सांगठनिक क्षमता का उपयोग भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रमों और योजनाओं को प्रदेश के लाखों कर्मचारियों, शिक्षकों और आमजन के परिवारों तक पहुंचाने के लिए करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास शिक्षक-कर्मचारियों और सरकार के बीच संवाद तथा समन्वय का प्रभावी माध्यम बनने का रहेगा।