देशभर के 450 हृदय रोग विशेषज्ञों ने साझा की आधुनिक इलाज की तकनीकें



कार्डियोलॉजी आगरा लाइव 6.0 में हार्ट फेलियर से लेकर बिना सर्जरी वाल्व बदलने तक पर मंथन, पद्मश्री डॉ. डीएस गंभीर को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। हृदय रोगों के आधुनिक उपचार, नई चिकित्सा तकनीकों और मरीजों की बेहतर देखभाल पर मंथन के लिए देशभर के शीर्ष हृदय रोग विशेषज्ञ होटल जेपी पैलेस में जुटे। आगरा इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘कार्डियोलॉजी आगरा लाइव 6.0’ के पहले दिन 450 डेलीगेट्स ने हिस्सा लिया। 20 तकनीकी सत्रों में हार्ट फेलियर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, एओर्टा, कार्डियक सर्जरी और स्ट्रक्चरल हार्ट इंटरवेंशन जैसी जटिल चिकित्सकीय चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और शोध साझा किए। सम्मेलन में बिना ओपन सर्जरी के हृदय के वाल्व का इलाज, हाई रिस्क मरीजों में एंजियोप्लास्टी और हार्ट-किडनी के आपसी संबंध जैसे विषय प्रमुख रहे।

सम्मेलन का शुभारंभ पद्मश्री डॉ. डीके हाजरा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. दलजीत सिंह गंभीर को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। इकोकार्डियोग्राफी के बेसिक्स पर आधारित ईको बुक का लोकार्पण भी हुआ। डॉ. तरुण सिंघल के संयोजन में कार्डियोलॉजी पर ज्ञानवर्धक डिबेट आयोजित की गई।

जीवनशैली में सुधार से कम होगा हृदय रोगों का खतरा 

आयोजन सचिव डॉ. सुवीर गुप्ता ने हृदय रोगों से बचाव के लिए जीवनशैली में सुधार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट और शराब से दूरी बनाने, नियमित टहलने और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने से हृदय को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। परिवार में हृदय रोग का इतिहास होने पर विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। उन्होंने बताया कि डायबिटीज के साथ धूम्रपान करने वालों में हार्ट फेलियर का खतरा काफी बढ़ जाता है।

डॉ. हिमांशु यादव ने ‘हार्ट फेलियर- किडनी इज द की’ विषय पर कहा कि हृदय और किडनी एक-दूसरे के कामकाज से गहराई से जुड़े हैं। एक अंग के अस्वस्थ होने से दूसरे पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए हार्ट फेलियर के मरीजों में किडनी की सेहत पर ध्यान देना भी जरूरी है।

सर्जरी के लिए अनुपयुक्त मरीजों में भी संभव हुआ जटिल एंजियोप्लास्टी उपचार 

नई दिल्ली के डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी में तेजी से प्रगति हुई है। आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञता की मदद से अब उन बुजुर्गों और हाई रिस्क मरीजों में भी जटिल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी की जा रही है, जिन्हें पहले सर्जरी के लिए अनुपयुक्त मान लिया जाता था। उन्होंने बताया कि TAVR, MitraClip और ट्राइकसपिड वाल्व इंटरवेंशन जैसी तकनीकों ने बिना ओपन सर्जरी के वाल्व संबंधी बीमारियों के उपचार की नई संभावनाएं खोली हैं।

डुअल एंटी प्लेटलेट थेरेपी में मरीज की स्थिति के अनुसार फैसला जरूरी 

नई दिल्ली के डॉ. सुमीत सेठी ने एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम के बाद डुअल एंटीप्लेटलेट थेरेपी (DAPT) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उपचार में खून के थक्के बनने से बचाव और ब्लीडिंग के खतरे के बीच संतुलन जरूरी है। प्रासुग्रेल और टिकाग्रेलर कुछ परिस्थितियों में क्लोपिडोग्रेल से अधिक प्रभावी हो सकते हैं, लेकिन दवा का चयन मरीज के चिकित्सकीय इतिहास और जोखिम के आधार पर करना चाहिए। पूर्व में स्ट्रोक या TIA हो चुके मरीजों में प्रासुग्रेल नहीं देना चाहिए।

बिना ओपन सर्जरी उपचार में सुरक्षा सर्वोपरि 

फरीदाबाद के डॉ. सुब्रत अखौरी ने कहा कि मरीज अब ओपन सर्जरी के बजाय कम चीर-फाड़ वाली आधुनिक तकनीकों को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, नई तकनीकों के साथ मरीज की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण है। सही मरीज का चयन, सटीक काउंसलिंग और व्यवस्थित उपचार प्रक्रिया से जटिलताओं को कम किया जा सकता है।

हार्ट और किडनी के मरीजों में पोटैशियम पर नियंत्रण जरूरी 

फरीदाबाद के डॉ. जितेंद्र कुमार ने हृदय और किडनी रोगियों में हाइपरकलीमिया यानी खून में पोटैशियम बढ़ने की समस्या पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि CKD और हार्ट फेलियर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली RAAS और MRA श्रेणी की दवाओं के दौरान पोटैशियम की निगरानी जरूरी है। उन्होंने SZC दवा और REALIZE-K ट्रायल के निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि उचित प्रबंधन से कई मरीजों में जरूरी दवाओं का उपचार जारी रखना संभव हो सकता है। ऐसे मामलों में चिकित्सकीय निगरानी के साथ पोटैशियम नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है।

TAVR वाल्व खराब होने पर जांच और फॉलोअप महत्वपूर्ण 

मैक्स साकेत, नई दिल्ली के डॉ. विवेका कुमार ने बताया कि TAVR के बाद वाल्व का खराब होना एक महत्वपूर्ण दीर्घकालिक जटिलता हो सकती है। इसकी पहचान के लिए इकोकार्डियोग्राफी और सीटी स्कैन की मदद ली जाती है। उपचार में निगरानी, जरूरत के अनुसार एंटीकोआगुलेशन, वाल्व-इन-वाल्व TAVR और चुनिंदा मामलों में सर्जरी शामिल हो सकती है। उन्होंने हार्ट टीम के संयुक्त मूल्यांकन और लंबे समय तक नियमित फॉलोअप पर जोर दिया।

हार्ट फेलियर की समय पर पहचान पर जोर 

फरीदाबाद के डॉ. गजिन्दर गोयल ने ESC 2026 हार्ट फेलियर गाइडलाइंस पर चर्चा करते हुए रोकथाम, शीघ्र पहचान और समय पर उपचार के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने जोखिम वाले लोगों की पहचान, प्रमाणित दवाओं के बेहतर इस्तेमाल और मोटापे के साथ हार्ट फेलियर से जूझ रहे चुनिंदा मरीजों में नई वेट-लॉस थेरेपी की भूमिका पर प्रकाश डाला।

मैसूर के डॉ. राजगोपाल जे. ने हार्ट अटैक के बाद होने वाली एक्यूट सीवियर माइट्रल रिगर्जिटेशन जैसी गंभीर जटिलताओं के उपचार पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चुनिंदा मरीजों में MitraClip जैसी मिनिमली इनवेसिव तकनीक ओपन सर्जरी के बिना वाल्व की मरम्मत का विकल्प उपलब्ध करा सकती है।

सामान्य पंपिंग क्षमता के बावजूद हो सकता है हार्ट फेलियर 

आगरा के डॉ. वरुण शर्मा ने HFpEF यानी हार्ट फेलियर विद प्रिजर्व्ड इजेक्शन फ्रैक्शन पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कुछ मरीजों में हृदय की पंपिंग क्षमता सामान्य होने के बावजूद हार्ट फेलियर के लक्षण बने रहते हैं। थकान, सांस फूलना और शरीर में सूजन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और एट्रियल फाइब्रिलेशन इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। समय पर पहचान के लिए क्लिनिकल मूल्यांकन और जरूरी जांच महत्वपूर्ण हैं।

हार्ट फेलियर के उपचार में फोर पिलर्स और वेरीसिगुएट की भूमिका 

डॉ. सौरभ नागर ने कम इजेक्शन फ्रैक्शन वाले हार्ट फेलियर (HFrEF) के उपचार में फोर पिलर्स थेरेपी और वेरीसिगुएट दवा की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रमाणित दवाओं का समय पर और उचित इस्तेमाल मरीजों की स्थिति सुधारने तथा अस्पताल में दोबारा भर्ती होने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। गंभीर हार्ट फेलियर के मरीजों में उपचार का चयन उनकी स्थिति और चिकित्सकीय जरूरतों के अनुसार किया जाना चाहिए।

देशभर के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव 

सम्मेलन में पद्मश्री डॉ. डीएस गंभीर, डॉ.उमर हसन और डॉ. अनिल भान सहित कई विशेषज्ञों ने अपने शोध और अनुभव साझा किए। डॉ. शरद पालीवाल, डॉ. कैलाश विश्वानी, डॉ. एसके कालरा और डॉ. ईशान गुप्ता ने भी विभिन्न विषयों पर विचार रखे।

विभिन्न तकनीकी सत्रों में डॉ. शरद पालीवाल, डॉ. एके गुप्ता, डॉ. रजनीश सिंह, डॉ. डीपी अग्रवाल, डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल, डॉ. अनिल सारस्वत, डॉ. केके विश्वानी, डॉ. विकास जैन, डॉ. विजय खुराना, डॉ. आनंद रावत, डॉ. दुर्गेश शर्मा, डॉ. ज्योति गर्ग, डॉ. वीएन कौशल, डॉ. तरुण मित्तल, डॉ. राजीव चुघ, डॉ. एसके कालरा, डॉ. सचिन गोयल और डॉ. अमित गुप्ता ने पैनलिस्ट एवं चेयरपर्सन की भूमिका निभाई। सम्मेलन का संचालन देवेंद्र ढल ने किया, जबकि व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सुरेश सिंह ने संभाली।

मेडिकल छात्रों को मिलेगी इकोकार्डियोग्राफी की हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग 

आयोजन सचिव डॉ. सुवीर गुप्ता ने बताया कि 25 अक्टूबर को होटल हॉलीडे इन, संजय प्लेस में सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक मेडिकल छात्रों के लिए विशेष इकोकार्डियोग्राफी वर्कशॉप आयोजित की जाएगी। इसमें LVEF मापने, हृदय के वाल्व में खराबी की पहचान करने और इकोकार्डियोग्राफी रिपोर्ट पढ़ने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।