सिविल सोसायटी ऑफ आगरा ने स्मारक को नगर निगम को हस्तांतरित करने की उठाई मांग
स्कूली बच्चों,पूर्व सैनिकों और नागरिक संगठनों के आयोजनों को मिलेगी राहत; ₹100 के प्रवेश शुल्क से घट गई थी आम लोगों की आवाजाही
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा। संजय प्लेस स्थित ऐतिहासिक शहीद भगत सिंह स्मारक एक बार फिर आम नागरिकों की सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। ‘लाइट एंड साउंड शो’ के नाम पर लगाया गया ₹100 का प्रवेश टिकट हटने और टिकट खिड़की बंद होने के बाद स्मारक परिसर में सामान्य गतिविधियों की वापसी का रास्ता खुल गया है। सिविल सोसायटी ऑफ आगरा ने इस कदम का स्वागत करते हुए स्मारक परिसर को संजय प्लेस के सभी ब्लॉकों के साथ नगर निगम को हस्तांतरित करने की मांग की है।
अव्यावहारिक साबित हुई टिकट व्यवस्था :
शहीदों के बलिदान की गाथा को जन-जन तक पहुंचाने और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्मारक में लाइट एंड साउंड शो शुरू किया गया था। इसके लिए ₹100 का प्रवेश शुल्क निर्धारित किया गया। हालांकि, शुल्क के कारण स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित हुई। फुटफॉल कम रहने के बाद टिकट दरों में कमी करने का प्रयोग भी सफल नहीं हुआ। अंततः टिकट खिड़की बंद कर दी गई।
टिकट व्यवस्था का प्रतिकूल असर स्कूली बच्चों के कार्यक्रमों, पूर्व सैनिक संगठनों की गतिविधियों और विभिन्न नागरिक मंचों के आयोजनों पर पड़ा। सिविल सोसायटी ऑफ आगरा सहित कई स्थानीय संगठनों ने इस व्यवस्था को अव्यावहारिक बताते हुए स्मारक को आम जनता के लिए निःशुल्क खोलने की मांग की थी।
सोसायटी के पूर्व सचिव स्वर्गीय अनिल शर्मा ने इस विषय पर आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) से लगातार पत्राचार किया था। उन्होंने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत पर्यटकों की आवाजाही और राजस्व से संबंधित जानकारी भी मांगी थी। इसके माध्यम से लाइट एंड साउंड शो की उपयोगिता और टिकट व्यवस्था की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए गए थे।
नगर निगम को हस्तांतरित हो स्मारक परिसर :
सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के अध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद डॉ. शिरोमणी सिंह ने स्मारक से टिकट व्यवस्था समाप्त किए जाने को सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि शहीद स्मारक को आम नागरिकों की सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए सहज रूप से उपलब्ध रहना चाहिए। उन्होंने मांग की कि शहीद स्मारक परिसर को संजय प्लेस के सभी ब्लॉकों के साथ जल्द से जल्द नगर निगम को हस्तांतरित किया जाए, ताकि इसका बेहतर प्रबंधन और समुचित विकास सुनिश्चित हो सके।
स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों से जुड़ा है स्थल :
शहीद भगत सिंह स्मारक का ऐतिहासिक महत्व भी विशेष है। यह परिसर उस स्थान पर विकसित किया गया है, जहां कभी सेंट्रल जेल के सुपरिंटेंडेंट का निवास हुआ करता था। इस जेल में लोकनायक जयप्रकाश नारायण और डॉ. राम मनोहर लोहिया जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों सहित अनेक राष्ट्रभक्तों को बंदी बनाकर रखा गया था। इस कारण यह स्थल स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों से भी जुड़ा हुआ है।
अनेक विभूतियों के प्रयासों से हुआ विकास :
शहीद भगत सिंह स्मारक के विकास में अनेक स्वतंत्रता सेनानियों, पत्रकारों, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों का योगदान रहा है। शहीद भगत सिंह स्मारक समिति का कार्यालय पहले नूरी दरवाजा स्थित स्वतंत्रता सेनानी डॉ. सिद्धेश्वर नाथ श्रीवास्तव के निवास पर संचालित होता था। समिति के प्रयासों से नूरी दरवाजा का नाम बदलकर ‘भगत सिंह द्वार’ करवाया गया था।
काला पानी की सजा काटने वाले स्वर्गीय ठाकुर राम सिंह ने स्मारक की स्थापना की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तत्कालीन प्रभावशाली पत्रकार एवं अमर उजाला के संपादक डोरीलाल अग्रवाल तथा मुरारी लाल का भी इसके निर्माण और विकास में विशेष योगदान रहा।
इसके अलावा तत्कालीन राजनीतिज्ञों और आगरा विकास प्राधिकरण के सदस्यों निहाल सिंह जैन, डॉ. कृष्ण वीर सिंह कौशल, आजाद कुमार कर्दम तथा ओम प्रकाश जिंदल ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।
केशो मेहरा के कार्यकाल में हुआ सौंदर्यीकरण :
स्मारक के अवस्थापना विकास में भाजपा के पूर्व विधायक केशो मेहरा का भी योगदान रहा। तत्कालीन नगर विकास मंत्री स्वर्गीय लालजी टंडन के कार्यकाल में यहां कई सुधार कार्य कराए गए। इनमें परिसर में हरियाली बढ़ाना और भूमिगत गैराज के ऊपर रूफटॉप गार्डन विकसित करना प्रमुख था।
प्रख्यात उद्यमी, मार्सन इंडस्ट्रीज के संचालकों तथा विख्यात चिकित्सक डॉ. आर.एस. पारीक का भी स्मारक के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्तमान में शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष डॉ. यू.सी. गर्ग और सचिव रामनाथ जी हैं। समिति की ओर से मदन मोहन जी स्वयंसेवक के रूप में स्मारक की लाइब्रेरी में सेवाएं देते हैं।
डॉ.शिरोमणी सिंह ने प्रतिमाओं पर किया माल्यार्पण :
हाल ही में सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के अध्यक्ष डॉ. शिरोमणी सिंह ने शहीद स्मारक परिसर और यहां स्थित पुस्तकालय का निरीक्षण किया। उन्होंने आश्वस्त किया कि शहीद भगत सिंह स्मारक समिति को आवश्यकता के अनुसार सहयोग देने के लिए सोसायटी हरसंभव प्रयास करेगी।
इस अवसर पर डॉ. शिरोमणी सिंह ने सिविल सोसायटी ऑफ आगरा की ओर से शहीद भगत सिंह और शहीद चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान सोसायटी के राजीव सक्सेना और फोटो जर्नलिस्ट असलम सलीमी भी उपस्थित रहे।
सिविल सोसायटी ऑफ आगरा का मानना है कि शहीदों की स्मृतियों से जुड़े ऐसे ऐतिहासिक स्थलों को आम जनता के लिए सुलभ रखना जरूरी है। टिकट व्यवस्था समाप्त होने के बाद अब उम्मीद है कि शहीद स्मारक फिर से शहर की सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों का जीवंत केंद्र बनेगा।
रिपोर्ट : असलम सलीमी


