विश्वविद्यालय में आशुभाषण एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
सागर। डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय,सागर के शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा सतर्कता जागरूकता माह-2026 के अंतर्गत आशुभाषण एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का विषय ‘क्या पारदर्शिता और प्रौद्योगिकी भारत को भ्रष्टाचार-मुक्त बना सकती हैं?’ था। इसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने उत्साह पूर्वक सहभागिता करते हुए भ्रष्टाचार उन्मूलन, सुशासन, प्रशासनिक जवाबदेही और तकनीक की भूमिका पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में सत्यनिष्ठा, नैतिकता, पारदर्शिता तथा भ्रष्टाचार के प्रति शून्य-सहिष्णुता की भावना विकसित करना था,साथ ही विद्यार्थियों की तार्किक चिंतन क्षमता, प्रभावशाली अभिव्यक्ति और जिम्मेदार नागरिकता के मूल्यों को प्रोत्साहित करना भी आयोजन का प्रमुख उद्देश्य रहा।
प्रतिभागियों ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में डिजिटल तकनीक, पारदर्शी कार्यप्रणाली, प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक सहभागिता के महत्व पर प्रकाश डाला। आशुभाषण प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों की त्वरित चिंतन क्षमता एवं अभिव्यक्ति कौशल का आकलन किया गया, जबकि वाद-विवाद प्रतियोगिता में उन्होंने विषय के विभिन्न पहलुओं पर तार्किक ढंग से अपने विचार रखे।
कार्यक्रम शिक्षाशास्त्र विभाग के अध्यक्ष एवं सतर्कता जागरूकता कार्यक्रम के नोडल अधिकारी प्रो. अनिल कुमार जैन के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. अरविन्द कुमार ने निर्णायक की भूमिका निभाई। गतिविधि समन्वयक के रूप में डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव एवं डॉ. शकीला खान ने आयोजन के समन्वय और संचालन में योगदान दिया। प्रतियोगिता के सफल आयोजन में संयोजक डॉ. पुष्पिता राजावत, समन्वयक डॉ.चिंतन वर्मा तथा आयोजन सचिव डॉ. नवीन सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विभाग के विद्यार्थियों ने भी आयोजन में सहयोग किया।
ईमानदारी और जवाबदेही से ही संभव है भ्रष्टाचार पर अंकुश :
सतर्कता जागरूकता माह-2026 की केंद्रीय थीम ‘समृद्धि के लिए सत्यनिष्ठा’ के अनुरूप प्रतियोगिता में इस बात पर जोर दिया गया कि भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल तकनीकी साधन पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए नैतिक प्रतिबद्धता, पारदर्शी कार्यप्रणाली, जवाबदेह प्रशासन और जन-जागरूकता भी आवश्यक हैं।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने व्यक्तिगत,शैक्षणिक एवं सामाजिक जीवन में नैतिक मूल्यों का पालन करने और भ्रष्टाचार के विरुद्ध सजग नागरिक की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि तकनीकी नवाचार, पारदर्शिता, ईमानदारी और जनभागीदारी के समन्वय से भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।

