यूपीआई पर एमडीआर शुल्क के विरोध में व्यापारियों ने भरी हुंकार,डीएम को सौंपा ज्ञापन


टीएन अग्रवाल बोले ! सरकार की सुविधा व्यापारियों के लिए मुसीबत न बने, डिजिटल भुगतान पर शुल्क से बढ़ेगा आर्थिक बोझ

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) लेन-देन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क के विरोध में शनिवार को आगरा व्यापार मंडल ने देशव्यापी आंदोलन के तहत कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर जिलाधिकारी मनीष बंसल को ज्ञापन सौंपा। व्यापार मंडल के अध्यक्ष टीएन अग्रवाल के नेतृत्व में पहुंचे व्यापारियों ने ₹2,000 से अधिक के सामान्य व्यापारी यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क लागू नहीं करने की मांग की। व्यापारियों ने कहा कि डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के बजाय उस पर शुल्क लगाना छोटे और मध्यम कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने जैसा होगा।

सरकार की सुविधा व्यापारियों के लिए मुसीबत न बने ;

आगरा व्यापार मंडल के अध्यक्ष टीएन अग्रवाल ने कहा कि सरकार की ओर से दी गई सुविधा अब व्यापारियों के लिए मुसीबत नहीं बननी चाहिए। ग्राहक यूपीआई के माध्यम से भुगतान करते हैं, लेकिन प्रस्तावित एमडीआर शुल्क का भार भुगतान प्राप्त करने वाले व्यापारी पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यूपीआई ने देश में डिजिटल भुगतान को सरल, तेज और पारदर्शी बनाया है। इससे बड़ी संख्या में लेन-देन डिजिटल माध्यम से होने लगे हैं और आर्थिक गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ी है। डिजिटल भुगतान से कर संग्रह को भी लाभ मिलता है। ऐसे में सरकार को शुल्क लगाने के बजाय यूपीआई को और प्रोत्साहित करना चाहिए।

डिजिटल भुगतान पर शुल्क से बढ़ सकती है कालाबाजारी :

व्यापारी नेता संदीप गुप्ता और दिलीप खूबचंदानी ने कहा कि यूपीआई पर शुल्क लगाने से डिजिटल भुगतान के प्रति लोगों का रुझान प्रभावित हो सकता है। यूपीआई ने भारत को डिजिटल लेन-देन के क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाई है। इसकी सरलता और सुविधा के कारण लोग नकद भुगतान के स्थान पर ऑनलाइन भुगतान अपना रहे हैं। यदि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया तो लोग दोबारा नकद लेन-देन को प्राथमिकता दे सकते हैं। इससे पारदर्शिता प्रभावित होने के साथ कालाबाजारी की आशंका भी बढ़ सकती है।

कारोबार की लागत बढ़ने से प्रभावित होगा मुनाफा :

अमित मोरियानी ने कहा कि 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' यानी कारोबार को आसान बनाना देश की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। यूपीआई भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाकर इस उद्देश्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एमडीआर शुल्क लागू होने से व्यापारियों की लागत बढ़ेगी और उनके मुनाफे पर असर पड़ेगा। सरकार को ऐसी व्यवस्था लागू करने से बचना चाहिए, जिससे व्यापार करना महंगा हो।

राकेश बंसल और राजेश अग्रवाल ने कहा कि यूपीआई ने छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए भुगतान प्राप्त करना आसान बनाया है। कम लागत और तत्काल भुगतान इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं। प्रस्तावित एमडीआर व्यवस्था से व्यापारियों के लाभांश में कमी आ सकती है। सरकार को इस संबंध में निर्णय लेने से पहले व्यापारियों की समस्याओं को समझना चाहिए और उन्हें राहत देनी चाहिए।

राजीव गुप्ता और साहूकार सिंह चाहर ने कहा कि यूपीआई को लोकप्रिय बनाने में व्यापारियों की अहम भूमिका रही है। व्यापारियों ने ग्राहकों को डिजिटल भुगतान के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ी। अब यदि भुगतान स्वीकार करने पर ही व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा तो यह उनके लिए आर्थिक परेशानी का कारण बनेगा। सरकार को यूपीआई को कम लागत वाली भुगतान प्रणाली बनाए रखने के साथ व्यापारियों को प्रोत्साहन देना चाहिए।

राजेश सिंघल और दुष्यंत गर्ग ने कहा कि यूपीआई पर एमडीआर शुल्क लागू करने से पहले व्यापारिक संगठनों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। किराना, कपड़ा, हार्डवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवा, खाद्यान्न और होटल-रेस्टोरेंट सहित विभिन्न कारोबार सीमित लाभांश पर चलते हैं। ऐसे में प्रत्येक डिजिटल लेन-देन पर लगने वाला शुल्क सालभर में बड़ी राशि बन सकता है। इससे छोटे और मध्यम व्यापारियों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी।

ज्ञापन में रखीं प्रमुख मांगें :

आगरा व्यापार मंडल ने जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में ₹2,000 से अधिक के सामान्य व्यापारी यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क लागू नहीं करने, छोटे व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान प्रोत्साहन एवं छूट योजना शुरू करने और यूपीआई को कम लागत वाली भुगतान प्रणाली बनाए रखने की मांग की। इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई), बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए स्थायी विचार-विमर्श व्यवस्था बनाने की मांग भी उठाई गई। व्यापारियों ने कहा कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले उसके संभावित प्रभावों का व्यापक अध्ययन कराया जाना चाहिए।

ये रहे उपस्थित :

इस अवसर पर आगरा व्यापार मंडल के महामंत्री अशोक मंगवानी के साथ नरेंद्र बंसल, जय किशन पुरसनानी, संदीप गुप्ता, राकेश अग्रवाल, राजेश सिंघल, राजीव गुप्ता, संजीव अग्रवाल, दिलीप कुमार, अनूप बंसल, राजेश सिंह, गोविंद राम, अशोक ललवानी, योगेश रघवानी, अंशुल अग्रवाल, अनुराग अरोड़ा, महावीर प्रसाद, साहूकार सिंह चाहर, राजीव अग्रवाल, अमित मोरियानी, दिलीप खूबचंदानी, राकेश बंसल, राजेश अग्रवाल, दुष्यंत गर्ग सहित अन्य व्यापारी उपस्थित रहे।