लखनऊ। प्रेमशर्मा
ऊर्जा मंत्री के ऊर्जा क्षेत्र में जल्दबाजी में निजीकरण के प्रयोग न करने तथा आगरा में फ्रेन्चाईजीकरण के किये गये प्रयोग उपभोक्ता हित एवं विभाग हित में न होने के विभिन्न समाचार पत्रों में छपे बयान का विद्युत अभियन्ताओं ने स्वागत करते हुए ऊर्जा मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए मांग की कि ग्रेटर नोएडा में एनपीसीएल तथा आगरा में टोरेन्ट के साथ किया गया करार निरस्त किया जाये। विद्युत अभियन्ता संघ के अध्यक्ष इं. वी.पी. सिंह एवं महासचिव इं. प्रभात सिंह ने बताया कि विद्युत अभियन्ता लम्बे समय से निजीकरण के दुष्परिणामों की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए निजीकरणध्फ्रेन्चाईजीकरणध्कम्पनीकरण के विफल प्रयोगों को बार-बार न दोहराये जाने की मांग करते रहे है परन्तु सरकारों द्वारा बिना किसी दुष्परिणामों के अध्ययन किये एकतरफा निर्णय लेते हुए अन्धाधुंध निजीकरण,फ्रेन्चाईजीकरण,कम्पनीकरण के प्रयोगों को दोहराते रहे हैं जिसके दुष्परिणामस्वरूप निजी घरानों पर अतिनिर्भरता एवं ऊर्जा निगमों का कुप्रबन्धन सामने आया है तथा ऊर्जा निगम लगभग 95 हजार करोड़ से अधिक के घाटे में चल रहे हैं। यह समय की नितान्त आवश्यकता है कि सरकार इन दुष्परिणामों से सबक ले तथा उ.प्र.राज्य विद्युत परिषद की पुनर्स्थापना करे जिससे विद्युत क्षेत्र जैसे विशेषज्ञ तकनीकी विभाग का तकनीकी व्यक्तियों द्वारा तकनीकी तरीके से संचालन हो सके।
उन्होंने बताया कि टोरेन्ट पावर कम्पनी द्वारा बिजली को रूपये 7.16 के औसत दर से बेचा जा रहा है जबकि दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लि0 से रूपये 4.21 पैसे की दर से खरीदा जा रहा है। इस प्रकार टोरेन्ट पावर कम्पनी प्रति वर्ष लगभग 600 करोड़ रूपये का लाभ अर्जित कर रहा है। टोरेन्ट पावर कम्पनी द्वारा रेगुलेटरी सरचार्ज के रूप में 80 करोड़ रूपये रेगुलेटरी सरचार्ज तथा 30 करोड़ रूपये इलेक्ट्रीसिटी ड्यूटी के रूप में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लि. की देनदारी बकाया है। वर्ष 2018-19 में टोरेन्ट पावर कम्पनी ने लगभग रू0 2.68 प्रति यूनिट की दर से लाभ अर्जित किया, जबकि टोरेन्ट पावर कम्पनी द्वारा बिजली वितरण क्षेत्र में ।ज्-ब् स्वेमे 18.23 प्रतिशत है। जबकि केस्को (सरकारी क्षेत्र) कानपुर द्वारा बिजली वितरण क्षेत्र की ।ज्-ब् स्वेमे मात्र 15 प्रतिशत है। उपरोक्त आकड़ों से स्पष्ट है कि विद्युत क्षेत्र में निजीकरण के विफल प्रयोगों को दोहराने की बजाय उ0प्र0 राज्य विद्युत परिषद की पुनर्स्थापना करने की मांग की है। मा0 ऊर्जा मंत्री को धन्यवाद ज्ञापन एवं ये मांगें विद्युत अभियन्ता संघ की आज लखनऊ में सम्पन्न बैठक में की गयी।
टोरेन्टों कर रही उपभोक्ता हितों से खिलवाड़
ें विद्युत अभियन्ताओं के इस मत की पुष्टि हुई है कि आगरा में टोरेन्ट पावर द्वारा विद्युत उपभोक्ताओं के हितों तथा विभाग के हितों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ग्रेटर नोएडा में निजी कम्पनी मे0 एनपीसीएल को तथा अप्रैल, 2010 में आगरा शहर की बिजली वितरण का कार्य निजी कम्पनी मे0 टोरेन्ट पावर को सौंपा गया तथा इन प्रयोगों के चलते पावर कारपोरेशन को अरबों रुपये का घाटा हो चुका है। मे0 टोरेन्ट पावर लगभग 2200 करोड़ रुपये विभाग का दबाए बैठा है। पावर कारपोरेशन द्वारा मंहगी बिजली खरीद कर टोरेन्ट को सस्ती दरों पर दिये जाने से कई हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पावर कारपोरेशन को हो चुका है। वहीं आगरा की जनता भी मे0 टोरेन्ट पावर से त्रस्त है। आगरा में फ्रेंचाइजी करार घोटाले को लेकर सीएजी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया जा चुका है। इसी प्रकार ग्रेटर नोएडा में मे.एनपीसीएल द्वारा भारी लाभ कमाया गया है, परन्तु उसका प्रतिफल जनता को सस्ती बिजली देकर नहीं किया जा रहा है। ये सभी अनुबन्ध निरस्त किये जायें।

