आगरा नगर निगम से आरटीआई के माध्यम से माँगी जानकारी,पूरी न देकर,अधूरी दी गई।


हिन्दुस्तान वार्ता।आगरा

आगरा शहर में सूचना के अधिकार के कानून के अंतर्गत नगर निगम आगरा से निम्न बिंदुओं पर सूचना मांगी गई थी। अपने लेट लतीफी कामों के लिए प्रसिद्ध विभाग ने सूचना भी लेट ही दी।

 प्रथम अपील करने के बाद नगर निगम अधिकारी हरकत में आए, तब आनन फानन में सूचना दी गई।

बड़ी ही विडंबना की बात है शहर के प्रमुख विभागो में से एक नगर निगम को सूचना देने में आरटीआई एक्टिविस्ट ताजगंज निवासी अरशद रब द्वारा सूचना के अधिकार के नियम के अंतर्गत 3 बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी ,जिसमे सिर्फ 1 बिंदु पर ही जानकारी दी गई ।

बिंदु -1 पिछले 5 सालो में कितने चौराहों के नाम बदले गए वा किन तत्यो के आधार पर नाम बदले गए।

बिन्दु - 2 यह भी जानकारी उपलब्ध कराए की चौराहों के नाम बदलने में कितना खर्चा हुआ है वा किसके द्वारा किया गया है। यह जानकारी भी उपलब्ध कराए।

बिंदु -3 यह जानकारी उपलब्ध कराने का भी कष्ट करे कि जो नए चौराहों का नाम रखा गया है। उनका कोई  इतिहास है ।

इन सब ही बिंदुओ पर नगर निगम आगरा से 16 /11/2022 को आरटीआई के तहत जानकारी मांगी गई,जिसका नगर निगम आगरा ने निर्धारित 1 महीने के अंदर जवाब नही दिया। आरटीआई कार्यकर्ता अरशद रब ने प्रथम अपील दायर की, प्रथम अपील दायर करने के 11 दिन बाद नगर निगम द्वारा जवाब दिया गया।

नगर निगम द्वारा दिए गए जवाब में बताया गया कि कुल 59 चौराहों में से 56 का नाम बदला गया है व अभी 2 के नाम का प्रस्ताव एक माध्यमिक शिक्षा विभाग को भेजा गया है।  एक का आदेश हो गया है, लेकिन अभी नाम नही बदला गया है एवं वाटर वर्क्स का प्रस्ताव पारित नहीं किया गया।

 उक्त आरटीआई में सिर्फ नाम बदलने से संबंधी ही जानकारी नगर निगम द्वारा दी गई है।

 बिंदु संख्या 2 व 3 व एक का भी तोड़ मोड़ कर जवाब दिया गया है। चूकि यह जानना जरूरी है कि आखिर किन तथ्यों के आधारों पर पार्षदों व किसके द्वारा नाम बदले गए, इसलिए इसकी जानकारी आरटीआई के द्वारा अरशद रब ने मांगी थी।

अरशद रब पूर्व में भी ए डी ए से विभिन्न मुद्दों पर जानकारी एकत्रित कर चुके है व आरटीआई के तहत देर से मिली जानकारी से भी नगर निगम आगरा के जवाब का इंतजार कर रहे थे। 

उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद थी कि मुझे मांगी गई पूरी जानकारी दी जाएगी, पर नगर निगम आगरा ने पूरी जानकारी न देते हुए आधी अधूरी जानकारी दी।

 आरटीआई के नियम के अनुसार आरटीआई कार्यकर्ता नगर निगम के जवाब से संतुष्ट नहीं है, प्रथम अपील में आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा पूछा गया था कि मेरी आरटीआई का 1 महीने में जवाब क्यों नही दिया गया।

 एक महीने तक मेरी आरटीआई किस अधिकारी के पास कितने दिन रही व उस एक महीने में उस अधिकारी ने उस आरटीआई पर क्या कार्य किया, जिसके बाद प्रथम अपीलीय अधिकारी नगर आयुक्त ने जवाब दिया।

खास बात ये है कि जो डाटा,नगर निगम ने 59 चौराहों का उपलब्ध कराया है, उसमे कुछ चौराहे ऐसे है जिनका नाम तो बदला गया, लेकिन अभी तक वहाँ कोई शिला पट्टिका वा उक्त चौराहे का नाम नही लिखा गया है।जिसमे कुत्ता पार्क का नाम बदल कर हनुमान पार्क किया गया। जिसका सब ही ने मिठाई वितरित कर स्वागत किया, पर अभी तक हनुमान पार्क पर नगर निगम द्वारा कोई भी शिला पट्टिका नही लगाई गई, ना ही उक्त पार्क (चौक) का कोई कायाकल्प भी नही किया गया। ठीक से नगर निगम द्वारा दी गई जानकारी अपूर्ण है।

 मैने आगरा के विषय में क्यूं नाम बदले गए, इस वजह से जानकारी मांगी थी।

 आगरा जो कि ऐतिहासिक शहर है ऐतिहासिक शहर होने के साथ साथ इसका पुराना इतिहास रहा है। इतिहासों की वजह से ही पर्यटन नगरी आगरा, इसे कहा जाता है।

 पर्यटन नगरी में पुराने शहर के चौराहों का अगर नाम बदला गया तो उनके इतिहास की जानकारी हर आगरा वासी को होना जरूरी है, इसलिए आरटीआई का सहारा लेकर जानकारी एकत्रित की गई, जो जानकारी नगर निगम द्वारा नही दी गई है।

 उसके लिए सूचना आयोग में आरटीआई कार्यकर्ता अरशद रब जायेगे व सभी जानकारियो को एकत्रित करेगे ।