वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पियूष गोयल द्वारा टेस्टिंग फीस में 50 प्रतिशत कटौती करने की,की गयी घोषणा
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा : चैम्बर का प्रतिनिधिमंडल वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पियूष गोयल जी से नई दिल्ली कार्यालय में मिला। प्रतिनिधि मंडल द्वारा गोयल जी को आगरा में ग्रे-आयरन कास्टिंग का उत्पादन करने वाले सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के लिये बीआईएस प्रमाणीकरण के अनिवार्यता के कारण उत्पन्न समस्याओं के सम्बन्ध में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।
पूर्व अध्यक्ष अमर मित्तल द्वारा मंत्री जी को अवगत कराया गया कि सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को आउटसोर्स परीक्षण सुविधा की अनुमति दी गई है, जो कि उचित एवं स्वीकार्य नहीं है। चूंकि उद्योग में प्रत्येक व्यक्ति अच्छी तरह से समझता है कि बीआईएस द्वारा वांछित गुणवत्ता नियंत्रण तभी संभव है जब पिघलने की प्रक्रिया के दौरान इकाई के अंदर ही उचित परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध हों। गैर-वापसी योग्य नमूनों की लागत, कारखाने से आउटसोर्स की गई एजेंसी तक परिवहन और विनिर्माण की प्रक्रिया के दौरान तत्काल अनुवर्ती/सुधार केवल तभी संभव है जब डेटा उपलब्ध हो। उपकरणों के परीक्षण,उन्हें चलाने के लिए पर्यवेक्षक की नियुक्ति,उनका दस्तावेजीकरण और रिकार्ड रखने की लागत इतनी अधिक है कि यह सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों की पहुंच से बाहर है।
पूर्व अध्यक्ष अशोक कुमार गोयल ने बताया कि 210ः2009 के अनुसार सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों द्वारा उत्पादित ग्रे आयरन कास्टिंग्स एक मध्यवर्ती उत्पाद है,जिसे एचएसएन कोड 73251000 के रूप में वर्गीकृत किया गया है। उपरोक्त उत्पाद केवल प्रसंस्करण के बाद ही उपभोग्य या बिक्री योग्य बनते हैं, जो कि अधिकांशतः अन्य इकाइयों/कार्यशालाओं आदि द्वारा किया जाता है, जिनके पास प्रसंस्करण के लिए मशीनिंग सुविधाएं होती हैं। इसलिए,ग्रे आयरन कास्टिंग इकाइयों पर अनिवार्य बीआईएस लाइसेंस लागू करना बिल्कुल भी व्यावहारिक और उचित नहीं है और इसलिए इस पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।
चैम्बर द्वारा मंत्री जी से मांग की गयी कि सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों द्वारा IS 210 : 2009 के अनुसार उत्पादों के लिए BIS लाइसेंस प्राप्त करने और उसे बनाए रखने में देखी जा रही असामान्य कठिनाइयों को देखते हुए उन्हें अनिवार्य प्रावधान से छूट दी जाए। इसके बजाय इसे वैकल्पिक बनाया जा सकता है तथा सूक्ष्म एवं लघु उद्योग के लिए दिनांक 13.06.2024 के आदेश के कार्यान्वयन की तिथि को वर्तमान 01.03.2025 से बढ़ाकर 01.03.2026 तक बढ़ाया जाएँ, जब तक कि उपरोक्त सभी सुझाव लागू नहीं हो जाते, ताकि प्रवर्तन एवं कार्यान्वयन अधिकारियों द्वारा अनावश्यक उत्पीड़न से बचा जा सके।
मंत्री जी द्वारा चैम्बर द्वारा प्रेषित प्रतिवेदन पर सकारात्मक कार्यवाही करने को आश्वासन दिया गया तथा टेस्टिंग फीस में 50 प्रतिशत कटौती करने की घोषणा की गयी।
प्रतिनिधि मंडल में चैम्बर के पूर्व अध्यक्ष अमर मित्तल,अशोक कुमार गोयल,प्र.समाज सेवी/उद्यमी पूरन डावर, सुनील सिंघल,अंशुल अग्रवाल, विवेक मित्तल आदि प्रमुख रूप जे उपस्थित थे।