रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने 'अरावली पहाड़ियाँ' बचाने की सर्वोच्च न्यायालय एवं सरकार से की अपील

 


हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा : 21 दिसम्बर, रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्यों ने अरावली पहाड़ियों को बचाने की अपील,माननीय सर्वोच्च न्यायालय और भारत सरकार से की। उन्होंने बताया अरावली की पहाड़ियों पर फतेहपुर सीकरी मे प्राचीनतम दुर्लभ शैलचित्र (रॉक पेंटिंग्स) बनी हैँ जो इस खनन से नष्ट हो जायेंगी सदा के लिये।

अगर यहां खनन या वन कटाई बढ़ी,तो PM10 और PM2.5 जैसे प्रदूषक कणों में तेज बढ़ोतरी होगी और पहले से खराब AQI और बिगड़ेगा। अध्ययनों के अनुसार,अरावली के नंगे हिस्सों से उड़ने वाली धूल सर्दियों की स्मॉग में बड़ा योगदान देती है। दिल्ली-एनसीआर में पहले से ही प्रदूषण की समस्या गंभीर है, और यह फैसला इसे और जटिल बना सकता है।

पर्यावरणविदों को डर है कि इससे अरावली की सुरक्षा कमजोर हो सकती है। कोर्ट के अनुसार, भूमि को वन घोषित करने का निर्णय राजस्व रिकॉर्ड और भौतिक स्थिति के आधार पर होगा, न कि सिर्फ ऊंचाई के आधार पर।

हरियाणा में सिर्फ दो चोटियां ही 100 मीटर से ऊपर हैं – एक तोसाम (भिवानी जिला) और दूसरी मधोपुरा (महेंद्रगढ़ जिला)। बाकी क्षेत्र अब संरक्षण से बाहर हो सकता है। इससे पूरे इकोसिस्टम को खतरा है। अरावली थार मरुस्थल की धूल को रोकती है, भूजल रिचार्ज करती है और जैव विविधता बनाए रखती है। अगर संरक्षण कमजोर हुआ, तो धूल और प्रदूषण बढ़ेगा (दिल्ली में पहले से ही समस्या गंभीर है)।

भूजल स्तर गिरेगा,बोरवेल सूखेंगे। गर्मी अधिक तीव्र होगी। स्वास्थ्य समस्याएं (सांस की बीमारियां आदि) बढ़ेंगी। लोगों का पलायन हो सकता है, क्योंकि रहने लायक जगह कम हो जाएगी। इसलिए ऐसा प्रलयंकारी निर्णय तुरंत वापस ले सर्वोच्च न्यायलय तथा भारत सरकार इन पहाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। डॉ देवाशीष भट्टाचार्य,महंत नंदन श्रोत्रिय, चतुर्भुज तिवारी, मुकेश चौधरी  दिनेश शर्मा, शरद शर्मा, भगवान सिंह ,सोहनलाल आदि उपस्थित रहे।