आगरा से वैश्विक बाजार तक : उ.प्र.एमएसएमई निर्यात सम्मेलन 2026 बना उद्यमियों के लिए परिवर्तनकारी मंच


वैश्विक बाजार से जुड़ने का रोडमैप बना उप्र एमएसएमई निर्यात सम्मेलन 2026 का द्वितीय दिवस

नीतियां,पैकेजिंग,एग्री-एक्सपोर्ट, टैक्सेशन और नए बाजारों पर हुआ व्यापक मंथन

ग्रोथ कैटालिस्ट अवॉर्ड 2026 से एक दर्जन से अधिक निर्यात उद्यमी सम्मानित

हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो

आगरा। 10 जनवरी,आर्थिक आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के सशक्त संकल्प के साथ आगरा में आयोजित दो दिवसीय उत्तर प्रदेश एमएसएमई निर्यात सम्मेलन 2026 का द्वितीय दिवस अत्यंत सफल, सार्थक और परिणामोन्मुखी रहा। केंद्र व राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, नीति-निर्माताओं, निर्यात विशेषज्ञों और प्रदेशभर से आए सैकड़ों उद्यमियों की सक्रिय सहभागिता ने इस सम्मेलन को वैश्विक बाजार से सीधे जुड़ने का व्यावहारिक रोडमैप प्रदान करने वाला ऐतिहासिक आयोजन सिद्ध किया।

द्वितीय दिवस का शुभारंभ डायरेक्टर, डीजीएफटी (डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स, भारत सरकार) आर.के.सोनी,असिस्टेंट डायरेक्टर, FIEO आलोक श्रीवास्तव, डिप्टी डायरेक्टर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग रिशु गौतम, संयुक्त आयुक्त उद्योग अनुज कुमार, प्रोग्रामिंग कमेटी चेयरमैन एवं चमड़ा एवं फुटवियर उद्योग परिषद अध्यक्ष पूरन डावर, प्रोग्राम कमेटी चेयरमैन गोपाल गुप्ता, प्रोग्राम कन्वीनर मनीष अग्रवाल रावी, लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय सचिव दीपक अग्रवाल, राजेंद्र गुप्ता, सीएस अनुज अशोक एवं सीए उमेश गर्ग द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया गया।

मुख्य अतिथि आर.के.सोनी ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र में घरेलू और निर्यात—दोनों स्तरों पर अपार संभावनाएं हैं, परंतु उद्योग को आगे बढ़ाने का पहला और अनिवार्य कदम रजिस्ट्रेशन है। हर उद्योग के विकास के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम आवश्यक होता है,जिसे सुदृढ़ करने पर सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि एमएसएमई उद्यमियों द्वारा डायरेक्ट एक्सपोर्ट अभी अपेक्षाकृत कम है; ऐसे सम्मेलन उद्यमियों को वैश्विक मंच तक सीधे पहुंचने का आधार देते हैं। निर्यात बढ़ाने के लिए मार्केट सर्च/बार सर्च अनिवार्य है—इसके लिए ट्रेड ई-कनेक्ट पोर्टल पर अकाउंट बनाएं और ई-कॉमर्स को भी निर्यात का प्रभावी माध्यम बनाएं।

निर्यात नीति में एमएसएमई के लिए उपलब्ध अवसरों—ड्यूटी स्ट्रक्चर, एफटीए लाभ, संभावित बाजार—की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध है। उन्होंने लागत-प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में वैश्विक उदाहरण साझा करते हुए गुणवत्ता, ब्रांडिंग और दक्षता पर बल दिया। एफआईईओ के असिस्टेंट डायरेक्टर आलोक श्रीवास्तव ने करंट एक्सपोर्ट सिनेरियो, नव घोषित एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन तथा भारत के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स से मिलने वाले अवसरों और संभावित बाजारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सही मार्केट रिसर्च और सरकारी पहलों का लाभ उठाकर एमएसएमई निर्यातक वैश्विक बाजार में सशक्त उपस्थिति बना सकते हैं।

पैकेजिंग मानक निर्यात की कुंजी : रिशु गौतम

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग के डिप्टी डायरेक्टर रिशु गौतम ने वैश्विक पैकेजिंग मानकों, अनुपालन और पैकेजिंग की कमी से होने वाली व्यावहारिक समस्याओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि कई बार उत्कृष्ट उत्पाद भी गलत पैकेजिंग के कारण अस्वीकार हो जाते हैं—सही मानकों से यह जोखिम समाप्त किया जा सकता है।

कृषि प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात,ब्रांडिंग और ग्रोथ पर विशेष सत्र :

दूसरे सत्र में एपिडा के आलोक कुमार मिश्रा ने कृषि प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात, प्रमोशन, ब्रांडिंग एवं इंटरनेशनल बिजनेस ग्रोथ पर कहा कि कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण में भारत की वैश्विक पहचान तेज़ी से बढ़ रही है; ब्रांडिंग और प्रमोशन से निर्यात में बहुगुणित वृद्धि संभव है। एपिडा इस क्षेत्र में पूरी तरह से सहायता करता है। उन्होंने बताया कि 17 तरह के कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य है जिनका निर्यात आसानी से होता है। एपिडा के 19 जगह रीजनल ऑफिस हैं। कहीं भी जाकर देश भर में आप यहां से मार्गदर्शन ले सकते हैं। निर्यात संवर्धन के लिए एपिडा सदैव साथ है। इसके लिए विक्रेता और क्रेता की मीट कराना भी एपिडा का एक महत्वपूर्ण भाग है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में व्यक्ति कुछ वर्षों में हर्बल और मेडिसिनल पौधों के निर्यात तेजी से बढ़े हैं। यूरोप के देशों में एपिडा का प्रमाण पत्र आवश्यक है।

कृषि में कीट नाशक प्रयोग होने से प्रोसेस्ड फूड निर्यात में परेशानी आती है, इस पर उन्होंने बताया कि एपिडा से सर्टिफाइड ऑर्गेनिक कृषि करने वालों से ही खरीदें। सीए आर.के.जैन ने एग्री-फूड,फूड प्रोसेसिंग, कोल्ड-चेन, सरकारी पहल एवं निर्यात सहयोग पर कहा कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और कोल्ड-चेन के बिना एग्री-एक्सपोर्ट टिकाऊ नहीं हो सकता।

अंतरराष्ट्रीय कानून की समझ के साथ रखें निर्यात के क्षेत्र में कदम :

इंटरनेशनल टैक्सेशन और नए बाजारों की समझ पर सीए ऋषि अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक बाजार में प्रवेश केवल उत्पाद बेचने तक सीमित नहीं है,बल्कि प्रत्येक देश की टैक्स संरचना,डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस एग्रीमेंट (DTAA), ट्रांसफर प्राइसिंग और कंप्लायंस नियमों की स्पष्ट समझ अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि टैक्स नियमों की अनदेखी निर्यात लाभ को नुकसान में बदल सकती है, इसलिए एमएसएमई उद्यमियों को निर्यात से पूर्व सही टैक्स प्लानिंग और डॉक्यूमेंटेशन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

इंटरनेशनल टैक्सेशन और नए बाजारों की समझ पर सीए ऋषि अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक बाजार में प्रवेश केवल उत्पाद बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक देश की टैक्स संरचना, डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस एग्रीमेंट (DTAA), ट्रांसफर प्राइसिंग और कंप्लायंस नियमों की स्पष्ट समझ अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि टैक्स नियमों की अनदेखी निर्यात लाभ को नुकसान में बदल सकती है, इसलिए एमएसएमई उद्यमियों को निर्यात से पूर्व सही टैक्स प्लानिंग और डॉक्यूमेंटेशन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

एमएसएमई उद्यमी संगठित होकर करें काम :

FISME के महासचिव अनिल भारद्वाज ने एक्सपोर्ट ऑपर्च्युनिटीज एंड न्यू मार्केट रिसर्च पर कहा कि नए बाजारों की पहचान और उपभोक्ता व्यवहार की समझ निर्यात वृद्धि की कुंजी है। उन्होंने सलाह दी कि एमएसएमई उद्यमी संगठित होकर निर्यात के क्षेत्र में काम करें। इसके लिए जरूरी है कि सरकार एक्सपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी लेकर आए ताकि एक छत के नीचे तमाम छोटे उद्यमी साथ आकर निर्यात के उद्योग में अपने पैर जमा सके।

ओडीओपी से वैश्विक पहचान : अनुज कुमार

सत्र समापन पर संयुक्त आयुक्त उद्योग अनुज कुमार ने ओडीओपी उत्पादों के निर्यात प्रोत्साहन पर कहा कि ओडीओपी उत्तर प्रदेश की विशिष्ट पहचान है और इससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच पर स्थापित किया जा सकता है। मथुरा का पेड़ा और पोशाक, आगरा का पेठा, हस्तकला आदि वैश्विक पहचान बना चुके हैं।

प्रोग्रामिंग कमेटी चेयरमैन पूरन डावर ने कहा कि बिना आर्थिक आज़ादी के कोई देश पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हो सकता। निर्यात-आयात सुदृढ़ होगा, तभी राष्ट्र वास्तविक अर्थों में सशक्त बनेगा। प्रोग्राम कन्वीनर मनीष अग्रवाल रावी ने कहा कि सम्मेलन में विशेषज्ञों द्वारा साझा किए गए अनुभव और सुझाव उद्यमियों के लिए तत्काल उपयोगी और दीर्घकालिक रूप से लाभकारी सिद्ध होंगे। उन्होंने सभी वक्ताओं, अतिथियों, औद्योगिक संस्थाओं, सहयोगी संगठनों और सहभागी उद्यमियों का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि यह सम्मेलन उत्तर प्रदेश को निर्यात हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।

नए उद्यमी बनेंगे निर्यातक :

प्रोग्राम कन्वीनर मनीष अग्रवाल रावी ने कहा कि वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश निर्यात सम्मेलन प्रथम संस्करण के बाद 40 उद्यमी निर्यात के क्षेत्र में आए थे। उम्मीद है कि इस सम्मेलन के बाद और अन्य उद्यमी विश्व पटल स्थापित होंगे। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में विशेषज्ञों द्वारा साझा किए गए अनुभव और सुझाव उद्यमियों के लिए तत्काल उपयोगी और दीर्घकालिक रूप से लाभकारी सिद्ध होंगे। उन्होंने सभी वक्ताओं, अतिथियों, औद्योगिक संस्थाओं, सहयोगी संगठनों और सहभागी उद्यमियों का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि यह सम्मेलन उत्तर प्रदेश को निर्यात हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।

ग्रोथ कैटालिस्ट अवॉर्ड 2026 :

सम्मेलन के अंतिम दिन आगरा, अलीगढ़, हाथरस, फिरोजाबाद एवं मथुरा के एक दर्जन से अधिक निर्यात उद्यमियों को ग्रोथ कैटालिस्ट अवॉर्ड 2026 से सम्मानित किया गया। प्रमुख रूप से गोपाल गुप्ता, डॉ.प्रशांत शर्मा, रजत अस्थाना, ललेश सक्सेना, सीएस आदिति मित्तल, राजकुमार अग्रवाल, अंशुमन अग्रवाल, कृष्णा मित्तल, गगन सचदेवा, विनीत जैन, रोहित अग्रवाल, राकेश लूथरा, कपिल लूथरा, प्रिंस गुप्ता, प्रतीक वासलस, मनु गर्ग, अरुण जैन, शरद गुप्ता, नितिन अग्रवाल एवं रिंकेश अग्रवाल सम्मानित हुए। सम्मेलन का संचालन सीएस अनुज अशोक ने किया। व्यवस्थाएं अनिल सविता, अपरार्क शर्मा, दिलीप कुमार, सोनू आदि ने संभालीं।