कवियों ने बहाई रसधार -
मैं ज़मीं पर हूँ तुम तो फ़लक बनती हो। दोस्ती में भी अदावत की झलक बनती हो।
हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
आगरा।12 जनवरी, नागरी प्रचरिणी सभा में हिंदी साहित्य सभा के बैनर तले स्वामी विवेकानन्द की जयन्ती एवं वरिष्ठ गीतकार डॉ.राजकुमार रंजन के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में के अखिल भा. कवि सम्मेलन का आयोजन सम्पन्न हुआ।
आयोजन का शुभारंभ अतिथियों ने माँ सरस्वती एवं स्वामी विवेकानन्द के चित्र पर माल्यार्पण दीप प्रज्जवलन कर किया। इस अवसर पर प्रमुख अतिथि राजवीर सिंह चेयरमैन ठा.तेज सिंह महा विद्यालय ने अपने उद्गार में कहा कि स्वामी विवेकानंद जी राष्ट्रवादी संत थे,उन्होंने जन जन में शिक्षा के प्रसार को बढ़ाने का मंत्र दिया।
आयोजित में मशहूर शाइए अरविन्द समीर ने ये ग़ज़ल पढ़कर तालियां और वाहवाही लूटी।
मैं ज़मीं पर हूँ तुम तो फ़लक बनती हो। दोस्ती में भी अदावत की झलक बनती हो।
वरिष्ठ गीतकार रामेन्द्र मोहन त्रिपाठी ने गीत को परिभाषित किया" गीत नाम का लड़का इक बंजारा है।
अजय शर्मा अजेय ने कुछ इस तरह से अपने भावों को व्यक्त किया -
जिस मनुष्य काल को हम बैठे हैं वे सपने तो टूट गये। सतयुग त्रेता द्वापर मिलकर सब कलयुग में डूब गये।
दिल्ली से पधारे गीतकार राजवीर सिंह देवसर ने गीत पढ़े, गीतकार शिवसागर के पनहारिन वाले छंद खूब सराहे गये । धौलपुर से पधारीं कवयित्री रजिया बेगम जिया के श्रृंगार के गीत दिलो दिमाग पर छा गये। उन्होंने कहा "हे प्रिय छोड़ न जाना जी न सकेंगे बिना तुम्हारे..। वरिष्ठ कवि डॉ.ब्रज विहारी लाल बिरजू ने कहा- समय की रेत पर जो चिह्न अपने छोड़ जाते हैं नई पीढ़ी को सत्पथ की डगर पर मोड जाते हैं।
आयोजन में श्रोताओं सहित शहर के प्रमुख कवियों ने भाग लिया। बाहर से आने वाले कवियों में टूण्डला के सुबोध सुलभ ने वीर रस का संचार कर दिया। प्रसिद्ध गीतकार डॉ राजकुमार रंजन ने इन पंक्तियों पर वाहवाही लूटी -
जो आलोचक बने हमारे उनका अभिनन्दन है।उनके कारण सदा हमारा चला त्वरित स्यंदन है।उनका है आभार भुवन के कई समर जीते हैं।भरा हमारा घट पूरा है उनके सब रीते हैं।वरिष्ठ साहित्यकार शीलेन्द्र वशिष्ठ का गीत सिर चढ़कर बोला -जन्मदिन की आपको शुभ कामनाएं। जिन्दगी भर आप यूँ ही मुस्कराएं।
अन्य कवि एवं कवयित्रियों में डॉ.महेन्द्र शर्मा सूर्य दिल्ली कवि लेखक सम्पादक सूर्यप्रभा मासिक,कवयित्री मधुवाला यादव नई दिल्ली, संजू सूर्यम वीर रस बरनाहल ने कहा-सियासत जुल्म करती है गजब उपहार देती है।,कवयित्री राजबाला राज हिसार,शायर शाहिद महक ने अपनी ग़ज़ल पढ़कर तालियां बटोरी। राकेश तैनगुरिया शिकोहाबाद, रमेश पंडित, डॉ ब्रज बिहारी बिरजू, रजनीकान्त लवानिया,याद राम कवि किंकर, चन्द्रेश जैन, शरद गुप्ता, आचार्य उमाशंकर, अजय दौनेरिया ने भी काव्य पाठ किया। साहित्य सभा के अध्यक्ष अरुण रावत महासचिव डॉ.राजकुमार रंजन, उपाध्यक्ष राजेश दीक्षित, सचिव अरविन्द समीर मीडिया प्रभारी डॉ कृष्ण कुमार सिंह, अमित दीक्षित से सभी कवियों अतिथियों का स्वागत शॉल,माला एवं अभिनन्दन पत्र देकर किया।कार्यक्रम का संचालन डॉ.अंगद धारिया ने किया ।





