हिन्दुस्तान वार्ता। ब्यूरो
रसोई गैस को लेकर जो लोगों ने हलचल मचा रखी है ये अत्यन्त शर्मनाक है । गैस की उपलब्धता है तो मिलेगी और अगर युद्ध के कारण आपूर्ति भंग हो रही है तो हमें धैर्य पूर्वक सरकार को सहयोग करना चाहिए ।
अभी तो यह बाहरी युद्ध है,अगर कभी भारत ही युद्ध में उलझ गया और एक आध बम,सप्लाई लाइन या गैस भंडार पर गिर गया तब तो यह जनता जमीन-आसमान एक कर देगी।
हो सकता है सरकार पर दबाव डालकर अपमान जनक समझौता करने को ही विवश कर दे। कंधार कांड में उन्मत्त जनता का ड्रामा टीवी पर दिखा दिखा कर खूब दबाव बनाया गया था ।
शान्तिकाल का उपयोग हमेशा युद्ध की तैयारी के लिये करना चाहिए। युद्ध हुआ तो पहली आफत ऊर्जा संकट के रूप में आयेगी । हमारी पीढ़ी गोबर कंडा,अरहर की झाँखर ,लकड़ी , कोयला जैसे हर तरह के ईंधन से खाना बना लेती थी। अब तो गाँव में भी उज्ज्वला योजना के चलते गैस का प्रयोग करने लगे हैं ।
मकानों की वास्तुकला युग के अनुरूप बदल गई है। अब मिट्टी के चूल्हों , कोयले की अंगीठियों लायक रसोई घर ही नहीं बनते तो आधुनिक युग के अनुरूप तैयारी रखिये।
सोलर कुकर खरीदिये।आपातकाल में सर्वाधिक उपयोगी उपकरण हैं।अंधेरे और बरसात के मौसम में बिजली से भी चल सकता है,इंडक्शन चूल्हा खरीदिये या फिर इन्फ्रारेड चूल्हा खरीदिये।
स्लो कुकिंग सीखिये। चालीस प्रतिशत गैस बरबाद हो जाती है खाना पकाने में, जबकि एक बार उबालने के बाद यदि उसी तापमान पर कुकर को बनाये रखा जा सके तो बार बार सीटी लगाने की जरूरत नहीं होती है। इसके लिए आधुनिक कुकिंग उपकरण वंडरबैग और थर्मल इंसुलेटेड कुकर लाकर रखिये।फायरलेस कुकिंग सीखिये ।
आधुनिक कुकिंग तकनीक का इस्तेमाल करके युद्ध काल में आप न्यूनतम ईंधन में भोजन पका सकेंगे। आपात स्थिति में वन पॉट रेसिपीज़ जैसे खिचड़ी,पुलाव, दलिया, उपमा, पोहा जैसे व्यंजन खा कर गुज़ारा करिए और सरकार पर निर्भरता कम कीजिये। धैर्य,हिम्मत-हौंसला बनाये रखें। हमारा मीडिया से आग्रह है कि वे लोगों को जगरूक करने में अपनी भूमिका अदा करें। यह भी देशभक्ति का ही एक स्वरूप है ।
जय हिन्द...🚩
(लेखक - उ.प्र.जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के प्रदेश सचिव हैं।)

